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Bangladesh Awami League Leader Death Sentence: बांग्लादेश में 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. आवामी लीग के संयुक्त महासचिव महबूबुल आलम हनीफ को छह प्रदर्शनकारियों की हत्या से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में मौत की सजा दी गई है. 3 अन्य नेताओं को उम्रकैद हुई है. अदालत ने चारों की आधी अचल संपत्ति जब्त करने का भी आदेश दिया है.
बांग्लादेश में शेख हसीना के करीबी रहे नेता महबूबुल आलम हनीफ को सजा-ए-मौत.
ढाका: बांग्लादेश में 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. इंटरनेशनल क्राइम ट्राइब्यूनल-2 ने आवामी लीग के संयुक्त महासचिव महबूबुल आलम हनीफ को मौत की सजा सुनाई है. उन पर कुश्तिया में छह प्रदर्शनकारियों की हत्या से जुड़े मामले में मानवता के खिलाफ अपराध का आरोप था. इसके अलावा पार्टी के तीन अन्य नेताओं को भी उम्रकैद की सजा दी गई है. 23 अक्टूबर को तीन न्यायाधीशों की पीठ ने यह फैसला सुनाया.
सजा पाने वाले अन्य नेताओं में कुश्तिया जिला अध्यक्ष सदरुद्दीन खान, जिला महासचिव असगर अली और शहर महासचिव अताउर रहमान अत्ता शामिल हैं. खास बात यह है कि चारों आरोपी फिलहाल फरार हैं. अदालत में उनकी गैरमौजूदगी में ही मुकदमे की सुनवाई हुई. अदालत ने केवल सजा सुनाने तक ही फैसला सीमित नहीं रखा. उसने चारों नेताओं की आधी अचल संपत्ति जब्त करने का आदेश भी दिया है. जब्त संपत्ति बेचकर मिलने वाली रकम का इस्तेमाल हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों और घायलों को मुआवजा देने के लिए किया जाएगा.
प्रदर्शनकारियों पर गोली चलवाने का आरोप
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, जुलाई 2024 में छात्र आंदोलन के दौरान हनीफ ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का समर्थन किया था. आरोप है कि 27 जुलाई को कुश्तिया में हुई पार्टी बैठक में उन्होंने दूसरे नेताओं को आंदोलन दबाने के लिए बल प्रयोग करने का निर्देश दिया था. इसके बाद 5 अगस्त 2024 को कुश्तिया में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी हुई, जिसमें 6 लोगों की जान चली गई. इस हिंसा में हनीफ और अन्य नेताओं की भूमिका को जिम्मेदार बताया गया.
छात्र आंदोलन से बदली थी बांग्लादेश की राजनीति
बांग्लादेश में जुलाई 2024 में सरकारी नौकरियों में आरक्षण के विरोध से छात्र आंदोलन शुरू हुआ था. धीरे-धीरे यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया और तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन बन गया. हिंसा में हजारों लोग मारे गए और घायल हुए. 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना ने सत्ता छोड़ दी और भारत चली गईं. इससे पहले नवंबर 2025 में बांग्लादेश के इसी ट्राइब्यूनल ने शेख हसीना को भी मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में मौत की सजा सुनाई थी.