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Chintaman Ganesh Temple: धार्मिक नगरी उज्जैन में भगवान गणेश जी का सबसे बड़ा चिंतामण गणेश मंदिर है. इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां भगवान राम की चिंता दूर हुई थी. यहां माता सीता का कार्य सिद्ध और लक्ष्मण की इच्छा पूर्ण हुई थी. पुजारी के अनुसार मंदिर में दर्शन करने वाले सभी भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है.
Chintaman Ganesh Temple: धार्मिक नगरी उज्जैन में पर भगवान गणेश का एक ऐसा मंदिर है, जिसका संबंध भगवान श्रीराम से बताया जाता है. क्षिप्रा नदी के किनारे फतेहाबाद रेलवे लाइन के पास स्थित चिंतामण गणेश मंदिर शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर है. मान्यता है कि वनवास के समय भगवान श्रीराम ने यहां गणेशजी की स्थापना कर पूजा-अर्चना की थी. इसी धार्मिक कथा के चलते मंदिर की प्रतिमा को स्वयंभू माना जाता है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां दर्शन करने से मन की चिंताएं दूर होती हैं.
भगवान राम ने की थी मंदिर की स्थापना
मान्यताओं के अनुसार, इस गणेश मंदिर में भगवान चिंतामण गणेशजी की स्थापना स्वंय भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान की थी. भगवान गणेश के इस प्रसिद्ध मंदिर के गर्भगृह में 3 प्रतिमाएं स्थापित हैं. जहां पहला चिंतामण, दूसरा इच्छामन और तीसरा सिद्धिविनायक की प्रतिमा है. इच्छामन और सिद्धिविनायक की स्थापना लक्ष्मण जी और माता सीता ने की थी. जबकि चिंतामण का भगवान श्री राम ने की. इस मंदिर में दर्शन पूजन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है.
मंदिर को लेकर चली आ रही यह परंपरा
मालवा क्षेत्र में सैंकडों सालों से एक परंपरा चली आ रही है कि जो भी शादी करता है. उसके परिजन यहां लग्न लिखवाने आते हैं. इसके साथ ही शादी के बाद पति-पत्नी मंदिर में पूजा-पाठ करने आते हैं. साथ ही पति-पत्नी प्रार्थना करते हैं कि उनकी चिंता दूर हो जाए. इसका लाभ मिलने से यह परंपरा सैकड़ों सालों से चली आ रही है.
गणेश चतुर्थी पर होती है विशेष पूजा
उज्जैन के इस मंदिर में गणेश चतुर्थी के अवसर पर चिंतामन गणेश भगवान की बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन करने पहुंचते हैं. यहां एक पहले दिन सवा लाख लड्डुओं का भोग भी भगवान को लगाया जाता है. उसके बाद भक्तो मे यह प्रसाद वितरित किया जाता है. परंपरा यह भी है कि रक्षाबंधन के पर्व पर क्षेत्र की महिलाएं बड़ी संख्या में राखियां गणेश जी को भेंट करती हैं.
आज भी स्थित है लक्ष्मण बावड़ी
माना जाता है कि तब भगवान राम ने चिंतामण गणेश, लक्ष्मण ने इच्छामण गणेश और माता सीता ने सिद्धिविनायक की पूजा की थी. मंदिर के सामने लक्ष्मण बावड़ी आज भी स्थित है, जहां भक्त दर्शन के लिए आते हैं. इस मंदिर का वर्तमान स्वरूप महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने लगभग 250 साल पहले बनवाया था. गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. खासकर बुधवार के दिन और गणेश चतुर्थी के अवसर पर यहां भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं.