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8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ था. आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है. आयोग अब कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक कर वेतन और भत्तों पर उनकी राय जान रहा है. कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने आयोग के सामने इस बार डीए से जुड़ी तीन मांगे रखी हैं.
कर्मचारियों की मांग है कि महंगाई भत्ते को आयकर (Income Tax) से पूरी तरह छूट मिले.
नई दिल्ली. केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में संशोधन के लिए गठित आठवें वेतन आयोग को 18 महीनों के भीतर केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है. आयोग कर्मचारी यूनियनों और पेंशनर्स संगठनों के साथ बैठक कर उनकी मांगे सुन रहा है. पिछले कुछ महीनों में आयोग ने दिल्ली, पश्चिम बंगाल, लद्दाख और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बैठकें की हैं. इन बैठकों कर्मचारी यूनियनों ने महंगाई भत्ते को लेकर आयोग के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं. अगर आयोग इन डिमांड्स को मांग लेता है तो कर्मचारियों को मोटा आर्थिक लाभ हो सकता है. इन मांगों को कर्मचारी संगठनों ने पिछले वेतन आयोग के सामने भी रखा था, लेकिन ये पूरी नहीं हो पाईं.
कर्मचारियों की पहली और सबसे बड़ी मांग महंगाई भत्ते में हर छह महीने के बजाय हर तीन महीने में बढ़ोतरी करने की है. इसके अलावा महंगाई भत्ते को इनकम टैक्स के दायरे से पूरी तरह बाहर रखने और डीए के 25 फीसदी का आंकड़ा पार करते ही इसे सीधे बेसिक पे में जोड़ देने की मांग भी कर्मचारी संगठनों ने आठवें वेतन आयोग के सामने रखी है.
हर तिमाही में हो DA संशोधन
वर्तमान में केंद्र सरकार साल में दो बार महंगाई के आंकड़ों के आधार पर डीए और डीआर में संशोधन करती है. 28 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1 जुलाई 2026 से डीए में तीन फीसदी बढ़ोतरी का ऐलान किया था. अब डीए बढ़कर 63 फीसदी हो गया है. कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि महंगाई के दौर में छह महीने का अंतराल बहुत ज्यादा है. भारत पेंशनर्स समाज (BPS) ने मांग उठाई है कि डीए की समीक्षा हर तीन महीने के औसत महंगाई आंकड़ों के आधार पर की जाए.
DA का 25% पार होते ही बेसिक पे में विलय
यूनियनों का दूसरा बड़ा प्रस्ताव यह है कि महंगाई भत्ते के 25% होते ही इसे मूल वेतन (Basic Pay) में मिला दिया जाए. फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशंस (FNPO) का कहना है कि डीए की गणना बिना राउंडिंग के पॉइंट-टू-पॉइंट की जाए. अगर ऐसा होता है, तो कर्मचारियों का बेसिक पे बढ़ जाएगा, जिससे ग्रेच्युटी, पीएफ और अन्य भत्तों की गणना पर भी सीधा सकारात्मक असर पड़ेगा.