एक साल पहले बनी टंकी, आज भी प्यासे हैं लोग! सुपलगा के डांडपारा में जल जीवन मिशन की खुली पोल

एक साल पहले बनी टंकी, आज भी प्यासे हैं लोग! सुपलगा के डांडपारा में जल जीवन मिशन की खुली पोल


Danpara Water Crisis: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सुपलगा गांव में जल जीवन मिशन के तहत टंकी बनाई गई. पाइप लाइन का विस्तार हुआ तो लोगों की उम्मीद जागी की अब घर-घर पानी सप्लाई होगा. लेकिन एक साल बाद पता चलता है कि टंकी केवल नाम के लिए बनाई गई है. इसका कोई काम का नहीं है. दरअसल, सुपलगा गांव में आदिवासी बसाहट है और 1500 से अधिक की जनसंख्या जिसमें गंजहर पारा, डाडपारा से लेकर कई बस्ती ऐसी हैं, जहां लोगों को बूंद बूंद शुद्ध पेयजल के लिए तरसना पड़ रहा है. टंकी में पानी नहीं तो कही टंकी ही नहीं बनी है. नल की टोटियां जो घर के आंगन में बनाई गई हैं, वो सूखी हैं. क्योंकि टंकी में बनी नहीं है. ऐसे में घर-घर पानी पहुंचाने की योजना धरातल पर शोपीस बनकर रह गया है. गांव के सरपंच ने भी जल जीवन मिशन योजना पर सवाल खड़े किए हैं. अब कब तक इन इलाकों में पानी की समस्या दूर होगी. देखिए ये रिपार्ट…

जल जीवन मिशन की टंकी बनी शोपीस, ग्रामीण पानी के लिए परेशान
सुपलगा के डांडपारा में जल जीवन मिशन के तहत पानी की टंकी का निर्माण कराया गया था. उद्देश्य था कि बस्ती के प्रत्येक घर तक पाइपलाइन के माध्यम से पानी पहुंचाया जाए. लेकिन ग्रामीणों की मानें तो आज भी उन्हें नियमित रूप से पानी नहीं मिल रहा है. बस्ती में एक ही पानी की टंकी है, जिससे पूरी आबादी को पानी उपलब्ध कराने में परेशानी हो रही है. मौके पर मौजूद टंकी में भी पर्याप्त पानी नजर नहीं आता. ऐसे में योजना का लाभ ग्रामीणों को पूरी तरह नहीं मिल पा रहा है.

कभी पानी आता है तो कभी सूखी रह जाती है टंकी
स्थानीय ग्रामीण बनस राम ने बताया कि बस्ती में पानी की काफी समस्या है. टंकी सोलर सिस्टम से संचालित होती है, लेकिन इससे पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता कभी एक-दो घंटे पानी आता है तो कभी पानी की सप्लाई ही नहीं होती. ग्रामीणों का कहना है कि टंकी बनने के बाद भी उनकी परेशानी कम नहीं हुई है पानी की नियमित उपलब्धता नहीं होने से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

बरसात में भी नहीं मिल रहा पर्याप्त पानी, ग्रामीणों ने बताई परेशानी
वहीं, ग्रामीण रामभलेस ने बताया कि पानी की सप्लाई कभी पूरी होती है तो कभी अधूरी रह जाती है. बरसात के दिनों में भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है. आसपास के कुछ इलाकों में बोरिंग की व्यवस्था है, लेकिन यहां के ग्रामीणों को उसका भी लाभ नहीं मिल रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था से बस्ती की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है.

ग्रामीणों ने की बोर खनन और हैंडपंप निर्माण की मांग
पेयजल की समस्या से परेशान ग्रामीण अब बस्ती में एक अतिरिक्त बोर खनन और हैंडपंप निर्माण की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि अगर यहां एक और बोरिंग या हैंडपंप की व्यवस्था कर दी जाए तो लोगों को पानी की किल्लत से कुछ राहत मिल सकती है. फिलहाल, एक ही पानी टंकी पर निर्भर पूरी बस्ती के लोगों को नियमित पानी नहीं मिल पा रहा है.

सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर
गौरतलब है कि करीब एक साल पहले इस पानी टंकी का निर्माण कराया गया था. उस समय दावा किया गया था कि जल जीवन मिशन के तहत घर-घर तक पानी पहुंचाया जाएगा. लेकिन आज भी ग्रामीण नियमित जलापूर्ति का इंतजार कर रहे हैं. मौके की तस्वीरें सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर को साफ बयां कर रही हैं. अब सवाल यह है कि जिम्मेदार विभाग इस समस्या पर कब संज्ञान लेगा और डांडपारा के ग्रामीणों को कब नियमित पेयजल की सुविधा मिल पाएगी.

गांव के मुखिया सरपंच ने कही बड़ी बात
जल जीवन मिशन योजना को सुपलगा गांव के मुखिया सरपंच दसरत मझवार ने बताया कि जल जीवन मिशन केवल नाम का है. कोई काम का नहीं है. पंचायत में कहीं पानी सफलाई नहीं हो रहा है, जहां पानी टंकी बनी भी है, वहां भी पानी नहीं है. फिलहाल, ये योजना फैल है और हम चाहते हैं कि गांव के मुखिया होने के नाते हमारे गांव में पानी की उचित व्यवस्था हो ताकि लोगों को समस्या न हो.



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