Is Mathematics Subject or Language: गणित विषय है या भाषा? हर सवाल में आएगा गजब मजा, बस दिमाग में फिट कर लें ये लॉजिक

Is Mathematics Subject or Language: गणित विषय है या भाषा? हर सवाल में आएगा गजब मजा, बस दिमाग में फिट कर लें ये लॉजिक


नई दिल्ली (Is Mathematics Subject or Language). स्कूल के दिन याद आने पर गणित का ख्याल जरूर आता है. फिर दिमाग में लंबे-चौड़े फॉर्मूले, कठिन इक्वेशंस और मास्टरजी का डंडा घूमने लगता है. ज्यादातर लोगों ने गणित को हमेशा ऐसे ‘विषय’ के रूप में देखा, जिसके सवाल किसी तरह हल करके बस परीक्षा पास करनी है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस विषय से हम इतना डरते हैं, क्या वह वाकई सिर्फ किताबों तक सीमित कोई सब्जेक्ट है? या इसके पीछे कोई बड़ा और गहरा रहस्य छिपा है?

गौर से सोचें तो समझ में आएगा कि गणित केवल अंकों का जोड़-घटाव नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया, प्रकृति और ब्रह्मांड को समझने का जरिया है. यह बिना किसी शब्द के बहुत कुछ कह जाता है. वैज्ञानिकों, दार्शनिकों और गणितज्ञों का एक बड़ा वर्ग मानता है कि गणित कोई सामान्य विषय नहीं, बल्कि बेहद शक्तिशाली ‘भाषा’ है. जैसे हम अपनी बात कहने के लिए हिंदी, अंग्रेजी या अन्य भाषा के शब्दों और व्याकरण का इस्तेमाल करते हैं, वैसे ही गणित अपने नियमों, प्रतीकों और इक्वेशंस के जरिए ब्रह्मांड के रहस्य बयां करता है.

क्या गणित भाषा है?

भारत के प्राचीन शून्य से लेकर मॉडर्न स्पेस साइंस तक, हर जगह भाषा के तौर पर गणित का इस्तेमाल किया जाता है. आप जापान जाएं या अमेरिका, वहां की भाषा भले ही अलग हो, लेकिन ‘2+2=4’ का मतलब हर जगह एक ही रहता है. इस दिलचस्प गुत्थी को सुलझाते हुए समझने की कोशिश करें कि आखिर गणित विषय है या खास ग्लोबल भाषा.

गणित और भाषा में क्या समानता है?

भाषा की परिभाषा देखें तो वह एक माध्यम है. इसके जरिए विचारों, तर्कों और भावनाओं को दूसरों तक पहुंचाया जाता है. यही काम गणित भी बखूबी करता है. इसमें भी अपने ‘शब्द’ होते हैं जिन्हें अंक (Digits) कहा जाता है. इसके ‘व्याकरण’ को नियम या फॉर्मूला और इसके ‘वाक्यों’ को समीकरण (Equations) कहते हैं. किसी इक्वेशन को लिखने वाला कोई Physicist पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों से एक ही बार में संवाद कर रहा होता है. इसलिए स्ट्रक्चर के मामले में गणित किसी भी आम भाषा से कम नहीं है.

प्रकृति की अपनी किताब है गणित

महान वैज्ञानिक गैलीलियो गैलिली ने सदियों पहले कहा था- प्रकृति की महान पुस्तक गणित की भाषा में लिखी गई है. सोचिए, सूरज का उगना, ग्रहों की चाल, समुद्र की लहरों का उठना, फूलों की पंखुड़ियों की गिनती और संगीत के सुरों की ताल- इन सब के पीछे निश्चित पैटर्न और गणितीय नियम हैं. प्रकृति कभी तुक्के से काम नहीं करती. पेड़ के पत्तों के फैलने से आकाशगंगा के घुमाव तक, सब कुछ गणितीय कोडिंग से चलता है. इससे साबित होता है कि गणित इंसानों का बनाया रटा-रटाया मेथड नहीं, बल्कि प्रकृति का मूल स्वभाव है.

ब्रह्मांड की यूनिवर्सल भाषा है गणित

इंसानों ने हजारों भाषाएं और बोलियां डेवलप कर ली हैं. इन्हें समझने के लिए ट्रांसलेटर की जरूरत पड़ती है. लेकिन गणित इकलौती ऐसी भाषा है, जिसे ब्रह्मांड की ‘यूनिवर्सल लैंग्वेज’ कहा जाता है. अगर कभी पृथ्वी से बाहर अंतरिक्ष में किसी अन्य ग्रह पर Aliens मिले तो हम उन्हें शेक्सपियर की कविताएं या हिंदी के मुहावरे नहीं समझा सकते हैं. लेकिन ‘पाइथागोरस थ्योरम’ या ‘प्राइम नंबर्स’ के जरिए संवाद कर सकते हैं. गणित के नियम ब्रह्मांड के हर कोने में एक जैसे लागू होते हैं, चाहे आप धरती पर हों या ब्लैक होल के पास.

नजरिया बदलने की जरूरत: विषय से आगे की सोच

गणित को ‘सब्जेक्ट’ मानकर परीक्षा पास करने का साधन बना लेना गलत है. इसे मार्क्स लाने की मजबूरी समझेंगे तो यह डराता रहेगा. जिस दिन इसे नई भाषा या धुन की तरह सीखना शुरू कर देंगे, उस दिन इसके इक्वेशन भी पहेली की जगह सुंदर कविता जैसे लगने लगेंगे. गणित सोचना सिखाता है, लॉजिक मजबूत करता है और जिंदगी की उलझनें सुलझाने का साफ नजरिया देता है. अगली बार जब मैथ्स की किताब खोलें तो यह न सोचें कि आप कोई सवाल हल कर रहे हैं, बल्कि यह समझें कि ब्रह्मांड की कोई नई बात पढ़ रहे हैं!



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