क्या महाराष्ट्र में भी बन गया कैंची धाम? सोशल मीडिया पर वायरल हुए मंदिर का जानिए सच 

क्या महाराष्ट्र में भी बन गया कैंची धाम? सोशल मीडिया पर वायरल हुए मंदिर का जानिए सच 


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Kainchi Dham / Neem Karoli Baba : महाराष्ट्र में बना एक मंदिर काफी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसे उत्तराखंड के नैनीताल स्थित बाबा नीम करौली महाराज के प्रसिद्ध कैंची धाम की प्रति बताई जा रही है. मगर प्रबंधन का तो कुछ और ही कहना है. आइए जानते हैं सबकुछ.  

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कैंची धाम.

हल्द्वानी: बाबा नीम करौली के पवित्र कैंचीधाम के नाम से जुड़े कई दावे इन दिनों सोशल मीडिया में खूब चर्चा में है. बाबा की कृपा की कहानियां इतनी ज्यादा ट्रेडिंग में हैं कि बाबा के नाम से मंदिर और चमत्कार की कहानी भी खूब गड़ी जा रही है. ऐसे ही मंदिर और चमत्कार की कहानी महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव में गढ़ दी गई. जिस पर अब विवाद गहरा गया है और कैंची मंदिर ट्रस्ट को सामने आकर अपना पक्ष भी सामने रखना पड़ा है.

क्या है विवाद वाला सोशल दावा

दरअसल, महाराष्ट्र में बने एक मंदिर को उत्तराखंड के नैनीताल स्थित बाबा नीम करौली महाराज के प्रसिद्ध कैंची धाम की प्रतिकृति (प्रति कैंची धाम) बताने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. इस मामले में कैंची धाम मंदिर प्रबंधन ने सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई है. यह विवाद 29 अक्टूबर 2026 को सामने आया. इसके मुख्य तीन पहलू हैं.

  • पहला महाराष्ट्र के मंदिर को प्रति कैंची धाम बताने का दावा
    महाराष्ट्र के माडा गांव में बने एक मंदिर को सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों में प्रति कैंची धाम के रूप में प्रचारित किए जाने की बात सामने आई. कैंची धाम के प्रबंधक प्रदीप साह भय्यू ने इस दावे को खारिज किया है. उनका कहना है कि उत्तराखंड के कैंची धाम की कोई अधिकृत शाखा या मान्यता प्राप्त प्रतिरूप महाराष्ट्र में घोषित नहीं किया गया है.
  • दूसरा है ज्योति जी को मानस कन्या बताने का विवाद
    कैंची धाम के प्रबंधक ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने ज्योति जी को ‘मानस कन्या’ की उपाधि नहीं दी है. उनके नाम से जो दावे किए जा रहे हैं वो पूरी तरह से गलत हैं.
  • तीसरा रामजल से बीमारियां ठीक होने का दावा
    इस विवाद का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू रामजल से जुड़ा है. महाराष्ट्र के मंदिर के संदर्भ में रामजल से रोग और पीड़ा दूर होने जैसे चमत्कारी दावे किए जा रहे हैं. कैंची धाम के प्रबंधक ने इन दावों को भी खारिज किया है. उनका कहना है कि बाबा नीम करौली महाराज ने कभी किसी चमत्कारी जल का प्रचार नहीं किया. उन्होंने सेवा और हनुमान जी की प्रार्थना का मार्ग दिखाया था.

विवाद के बीच आया बागेश्वर वाले धीरेंद्र शास्त्री का बयान

अभी महाराष्ट्र से विवाद उठा ही था कि इस विवाद में बाबा बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री भी कूद पड़े. उन्होंने कथा के दौरान कह दिया कि इस देश में भगवान भी ट्रेंड में चलते हैं और इन दोनों बाबा नीम करौली महाराज ट्रेडिंग में हैं. इसलिए लोग उनके धाम में भीड़ लगाकर खड़े हैं. बता दें कि इससे पहले केदारनाथ धाम जैसे ही एक मंदिर के उत्तर प्रदेश और दिल्ली में बनने से विवाद खड़ा हो गया था, जिसे बाद में धार्मिक दखल के बाद शांत करना पड़ा था.



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