गुजरात में फ्रेंच फ्राइज प्रोसेसिंग प्‍लांट का उद्घाटन आज, यूपी में खुल जाएं ऐसी फैक्‍टरियां तो आलू किसानों की हो जाए बल्‍ले-बल्‍ले

गुजरात में फ्रेंच फ्राइज प्रोसेसिंग प्‍लांट का उद्घाटन आज, यूपी में खुल जाएं ऐसी फैक्‍टरियां तो आलू किसानों की हो जाए बल्‍ले-बल्‍ले


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Banas Dairy’s French fries processing plant : गुजरात में बनास डेयरी के फ्रेंच फ्राइज प्रोसेसिंग प्लांट का उद्घाटन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे. यह प्‍लांट स्‍थानीय किसानों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हुआ है. बनास डेयरी किसानों को उन्‍नत बीज देती है उनकी फसल को अच्‍छे रेट पर खरीद लेती है. इससे किसानों को दोहरा लाभ हो रहा है. बढिया बीज मिलने से उत्‍पादन अच्‍छा होता है और खरीद की गारंटी की वजह से बाजार में अचानक रेट गिरने पर उन्‍हें नुकसान भी नहीं होता.

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बनास डेयरी ने वर्ष 2019 में अमूल ब्रांड के तहत फ्रेंच फ्राइज के कारोबार में कदम रखा था. (Photo :@Narendra Modi/Facebook)

नई दिल्‍ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 30 अक्टूबर को गुजरात के वाव-थराद जिले में बनास डेयरी के फ्रेंच फ्राइज प्रोसेसिंग प्लांट का उद्घाटन करेंगे. पहले इस प्‍लांट की उत्‍पादन क्षमता 2 टन प्रति घंटे थी. अब यह प्‍लांट हर घंटे में आलू से 5 टन फ्रेंच फ्राइज बनाएगा. इस प्‍लांट से स्थानीय आलू किसानों को खूब फायदा हो रहा है. उन्‍हें न केवल अच्‍छा भाव मिल रहा है बल्कि उन्‍नत बीज मिलने से उनकी उपज भी बढ़ रही है. आलू की ऐसी प्रोसेसिंग यूनिट्स अगर उत्‍तर प्रदेश के आलू उगाने वाले जिलों में भी लग जाए तो किसानों की बल्‍ले-बल्‍ले हो जाए.

देश के कुल आलू उत्पादन का लगभग 30 से 35 फीसदी हिस्सा अकेले यूपी के खेतों में उगाया जाता है. राज्य के आगरा, फर्रुखाबाद, कन्नौज, फिरोजाबाद, हाथरस, अलीगढ़, इटावा और मैनपुरी जैसे जिले आलू की बंपर पैदावार के लिए जाने जाते हैं. इसके बावजूद, यूपी के किसानों को अक्सर फसल तैयार होने पर उचित भाव नहीं मिलता. कई बार तो उन्‍हें अपना आलू सड़कों पर फैंकना पड़ जाता है.

उन्‍नत बीज करती है तैयार

बनास डेयरी ने वर्ष 2019 में अमूल ब्रांड के तहत फ्रेंच फ्राइज के कारोबार में कदम रखा था. इसके बाद से डेयरी ने बीज से लेकर फ्रेंच फ्राइज तैयार करने तक की सप्लाई चेन विकसित की है. इसका खूब फायदा स्‍थानीय किसानों को हुआ है. बनास डेयरी केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान और अन्य संस्थानों से रोगमुक्त जर्मप्लाज्म यानी बीज की मूल आनुवंशिक सामग्री लेती है. इस सामग्री को बनास डेयरी की टिश्यू कल्चर लैब में विकसित किया जाता है. इसके बाद कानपुर स्थित एरोपोनिक फैसिलिटी में G0 मिनीट्यूबर्स तैयार किए जाते हैं. इन मिनीट्यूबर्स को खेतों में G3 पीढ़ी तक विकसित किया जाता है. फिर प्रमाणित बीज तैयार होते हैं. इन उन्‍नत बीजों को किसानों को दिया जाता है. किसान के उगाए आलू को बनास डेयरी खरीदती है और फ्रेंच फ्राइज बनाती है.

पहले से तय होता है आलू का रेट

बनास डेयरी किसानों को बीज देते समय ही आलू का रेट भी तय कर देती है. यानी किसान को पता होता है कि उसके माल का उसे क्‍या भाव मिलेगा. बनास डेयरी ने वर्ष 2024-25 में किसानों से आलू 13 रुपये किलो और 2025-26 में 14 रुपये प्रति किलो लिया था. रेट पहले से ही तय होने से किसान आलू खुदाई के समय अचानक भाव गिरने पर होने वाले नुकसान से बच जाते हैं.

मजबूत स्‍टोरेज चेन

आलू की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने के लिए बनास डेयरी ने वर्ष 2024 में 10,000 टन क्षमता वाला कोल्ड स्टोरेज स्थापित किया था. नवंबर 2025 में डेयरी ने भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (Bharatiya Beej Sahakari Samiti Ltd) के साथ एक एमओयू किया था. इसका उद्देश्य देशभर के किसानों को प्रमाणित बीज उपलब्‍ध कराना है.

कचरे से तैयार की जा रही बायोगैस

बनास डेयरी ने अपने आलू प्रोसेसिंग में निकले कचरे से बायोगैस तैयार करती है. वहीं, इस प्रक्रिया में बनी खाद को खेतों में डालने के लिए किसानों को दिया जाता है. इससे कचरे का बेहतर प्रबंधन तो होता ही है, साथ ही किसानों को भी लाभ होता है.



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