यमुना में डुबकी के लिए मनोज तिवारी का न्योता, पर रिपोर्ट क्या कह रही?
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छठ पर्व से पहले दिल्ली में यमुना की सफाई पर सियासत तेज हो गई है. बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने यमुना में डुबकी लगाकर नदी के साफ होने का दावा किया है. जबकि आम आदमी पार्टी ने उन पर ड्रामा करने का आरोप लगाया है. अब आइए जानते हैं कि यमुना नदी में प्रदूषण और सफाई को लेकर डीपीसीसी की ताजा रिपोर्ट क्या कहती है?
आप दिल्ली की यमुना में डुबकी लगाने कब आ रहे हैं? मनोज तिवारी का निमंत्रण, पर लेटेस्ट रिपोर्ट में क्या है नदी की हालत?
छठ पर्व को लेकर दिल्ली में तैयारियां तेज हैं. दिल्ली सरकार लगातार छठ घाटों और यमुना की सफाई करवा रही है. गुरुवार को उत्तर-पूर्वी दिल्ली से भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने तो साफ यमुना की तस्वीर पेश करते हुए सोनिया विहार में नदी में डुबकी लगाई. नदी में तैरते हुए उन्होंने पीएम मोदी और दिल्ली सरकार के काम की जमकर तारीफ की और कहा कि अब यमुना साफ हो गई है और लोग आकर इसमें डुबकी लगा सकते हैं. हालांकि सिर्फ विपक्ष ही नहीं बल्कि लोग भी सवाल कर रहे हैं कि क्या वास्तव में यमुना नदी एकदम साफ हो गई है?
मनोज तिवारी के इन दावों पर आम आदमी पार्टी ने भी निशाना साधा है. पार्टी ने इस दावे को कोरा नाटक बताया है. हालांकि राजनीतिक आरोप और दावों को छोड़ दें तो यमुना की हालत को लेकर आई हालिया रिपोर्ट कुछ और ही बयां कर रही है.
क्या कहती है डीपीसीसी की ताजा रिपोर्ट
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक डीपीसीसी की सितंबर की ताजा रिपोर्ट नदी की कुछ और ही हालत बयां कर रही है. इस रिपोर्ट के अनुसार इस साल दिल्ली में चार महीने तक हुई मानसून की बारिश से भी यमुना में पानी की गुणवत्ता नहीं सुधर पाई है. जांच में देखा गया कि कई जगहों पर सितंबर 2026 में प्रदूषण सितंबर 2025 से ज्यादा था. हालांकि पल्ला से वजीराबाद बैराज तक का वो हिस्सा जहां मनोज तिवारी ने डुबकी लगाई अपेक्षाकृत साफ और मानकों के अंदर है. लेकिन वजीराबाद बैराज के बाद नजफगढ़ नाले के मिलने के बाद नदी बहुत ज्यादा प्रदूषित हो जाती है.
- रिपोर्ट बताती है कि पल्ला में बीओडी 2 मिलीग्राम/लीटर, घुलित ऑक्सीजन 6.5 मिलीग्राम/लीटर और फीकल कोलीफॉर्म 1,100 एमपीएन/100 मिलीलीटर है. ये सभी मानकों के अंदर हैं.
- वजीराबाद के बाद आईएसबीटी ब्रिज पर 7 सितंबर के नमूने में बीओडी 30 मिलीग्राम/लीटर था जो पिछले साल 3 सितंबर को 8 था. सीओडी 44 से बढ़कर 92 हो गया. फीकल कोलीफॉर्म 2,800 से 35,000 तक पहुंच गया.
- आईटीओ ब्रिज पर भी बीओडी 4 से 18 और सीओडी 20 से 60 हो गया. फीकल कोलीफॉर्म 1,800 से 17,000 हो गया.
- छठ जैसे त्योहारों में पल्ला से वजीराबाद तक हथनी कुंड बैराज से ताजा पानी आता है, जिससे प्रदूषण कुछ कम हो जाता है. लेकिन यह हिस्सा भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है.
अक्टूबर में मरी थीं सैकड़ों मछलियां
बता दें कि अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में वजीराबाद के आसपास सैकड़ों मरी मछलियों की सूचना आई थी. ऑक्सीजन के लिए तड़पती मछलियों के वीडियो आने से फिर चिंता बढ़ गई थी. इन मौतों के लिए विशेषज्ञों ने हरियाणा से आने वाले औद्योगिक कचरे को जिम्मेदार बताया था.
हर साल नदी की हालत बनती है चिंता
हर साल छठ से पहले यमुना की हालत राजनीतिक मुद्दा बन जाती है. छठ पर लाखों भक्त नदी में पूजा करते हैं, लेकिन हर साल नदी में सीवेज प्रदूषण और जहरीले झागों की वजह से चिंता पैदा हो जाती है और इसकी तस्वीरें वायरल हो जाती हैं. जहां नदी को लेकर पक्ष सफाई के दावे करता है वहीं विपक्ष इसे लेकर सरकार पर निशाना साधता है.