जंग एक देश का क्या हाल कर सकती है, इसका नजारा ईरान में साफ नजर आ रहा है. अगर ये कहें कि इस शिया देश को ‘महंगाई डायन’ निगल चुकी है तो गलत नहीं होगा. बाकी चीजों का खर्च तो छोड़ ही दो ईरान में खाने की एक प्लेट के लिए इतनी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है कि सुनने वाले की भूख ही खत्म हो जाए. ईरान के किसी सामान्य रेस्तरां नें एक प्लेट साधारण खाना, जैसे चेलो कबाब, चावल और एक कोल्ड ड्रिंक ऑर्डर करें, तो आम लोगों को जेब से सौ-हजार नहीं, बल्कि लाखों ‘तोमान’ चुकाने पड़ सकते हैं.
88.7% महंगाई दर: रिकॉर्ड तोड़ महंगाई और बेकाबू दाम
ईरान में आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक महंगाई दर रिकॉर्ड तोड़ 88.7% तक पहुंच चुकी है. दूध, पनीर, अंडे और कुकिंग ऑयल जैसी बुनियादी चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं. हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि लोग अब एक वक्त के पेट भरने के लिए भी तरस रहे हैं. ईरान के ‘स्टैटिस्टिकल सेंटर’ द्वारा जारी ताजा आंकड़ों ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. अक्टूबर महीने में ईरान में औसतन सालाना महंगाई दर भी बढ़कर 76.8% दर्ज की गई है.
लेकिन सबसे डरावनी स्थिति शहरों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में है, जहां महंगाई दर 107% के पार चली गई है. यानी गांवों में रहने वाले गरीब परिवारों के लिए जीवन जीना एक रोज का संघर्ष बन चुका है. रसोई के सबसे जरूरी सामानों के दाम जिस तेजी से बढ़े हैं, उसने आम आदमी की कमर तोड़कर रख दी है:
- खाने का तेल: इसमें पिछले एक साल के भीतर 255% की अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है.
- दूध, पनीर और अंडे: इनके दाम 154% तक बढ़ चुके हैं.
- रोटी: सब्सिडी हटने के बाद ब्रेड की एक पैकेट की कीमत 23,800 तोमान से सीधे छलांग लगाकर 60,000 तोमान पहुंच गई है.
एक प्लेट खाने की क्या है कीमत? खाली हो रही लोगों की जेब
ईरान में अगर कोई व्यक्ति बाहर एक प्लेट बुनियादी खाना खाने जाता है, तो उसे अपनी जेब से लाखों तोमान खर्च करने पड़ रहे हैं. चिकन, मटन और प्रोटीन के अन्य साधन इतने महंगे हो चुके हैं कि आम परिवारों ने अपनी थाली से मांसाहार को पूरी तरह बाहर कर दिया है.
ईरानी अखबार ‘हममिहान’ की रिपोर्ट के मुताबिक, चिकन और बुनियादी प्रोटीन की पहुंच से बाहर होने के कारण कुपोषण का खतरा बढ़ गया है. जो लोग दिन भर मेहनत-मजदूरी करते हैं, वे भी अब एक प्लेट भरपेट खाने के लिए तरस रहे हैं.
अगर कोई व्यक्ति सामान्य रेस्तरां में जाकर एक प्लेट चावल, थोड़ा कबाब और रायता मांगता है, तो बिल देखकर उसके पसीने छूट जाते हैं. कई परिवारों का तो पूरा बजट ही सिर्फ दो वक्त के साधारण खाने में खत्म हो रहा है.
14 लाख नौकरियां खतरे में, भुखमरी की ओर बढ़ता देश
महंगाई के इस तूफान के बीच बेरोजगारी का संकट आग में घी डालने का काम कर रहा है. लेबर मिनिस्ट्री के उप मंत्री मालिक हुसैनी ने चेतावनी दी है कि ईरान का आर्थिक मंदी का दौर अगर ऐसे ही जारी रहा, तो मार्च 2027 तक 12 लाख से 14 लाख और नौकरियां खत्म हो सकती हैं.
आंकड़ों के मुताबिक, मार्च से अगस्त के बीच ही करीब 11.5 लाख लोग अपनी पक्की नौकरियों और बीमा सुरक्षा से बाहर हो चुके हैं, जिनमें से महज 3 लाख लोगों को ही बेरोजगारी भत्ता मिल पा रहा है. जब हाथ में नौकरी ही नहीं होगी और जेब खाली होगी, तो लोग एक प्लेट खाना भी कैसे खरीदेंगे?
कड़ाके की ठंड में बिन गैस और बिजली के ठिठुरेंगे 11 प्रांत
आर्थिक मोर्चे पर मार झेल रहे ईरानियों के लिए आने वाला शीतकालीन मौसम और ज्यादा मुसीबतें लेकर आ रहा है. नेशनल गैस कंपनी के अधिकारी हूशंग सेयदली के अनुसार, देश के गैस प्रोसेसिंग प्लांटों में आई खराबी के कारण रोज 13 करोड़ क्यूबिक मीटर गैस का उत्पादन प्रभावित है.
इसके चलते ईरान के 11 प्रांतों खासकर उत्तरी खोरासान, माजंदरान और गोलेस्तान में इस सर्दी भारी गैस कटौती हो सकती है. कारखानों को बैकअप फ्यूल इस्तेमाल करने को कह दिया गया है. यानी ठंड के मौसम में लोगों को न सिर्फ महंगे खाने का सामना करना पड़ेगा, बल्कि हीटर जलाने और खाना पकाने के लिए गैस की भारी किल्लत भी झेलनी पड़ेगी.
संसद में हंगामा और सरकार की लाचारी
महंगाई और आर्थिक तबाही के इस बवंडर ने मसूद पेजेशकियान की सरकार पर भारी राजनीतिक दबाव बना दिया है. संसद में सांसदों ने अर्थव्यवस्था मंत्री अली मदनीजादेह के तर्कों को खारिज करते हुए उन्हें औपचारिक चेतावनी जारी की है.
हालांकि, मंत्री ने माना कि मजदूर, पेंशनभोगी और कम वेतन वाले कर्मचारी इस महंगाई की सबसे भीषण मार झेल रहे हैं, लेकिन सरकार के पास इस संकट से बाहर निकलने का कोई ठोस रोडमैप नहीं है.
जनता में आक्रोश, विरोध दबाने के लिए तगड़ा पहरा
जैसे-जैसे महंगाई और भुखमरी बढ़ रही है, जनता का गुस्सा सड़कों पर फूटने लगा है लेकिन ईरानी प्रशासन जन आक्रोश को दबाने के लिए सुरक्षा बलों का सख्त इस्तेमाल कर रहा है.
शिराज में शिक्षक और ट्रेड यूनियन एक्टिविस्टों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है. 2022 के विरोध प्रदर्शनों में घायल हुए प्रदर्शनकारियों को दोबारा हिरासत में लिया जा रहा है. दक्षिण-पूर्वी इलाके काश में पुलिस फैसिलिटी पर गोलीबारी और विरोध प्रदर्शन की खबरें आ रही हैं.
क्या एक और बड़े जन-आंदोलन की ओर बढ़ रहा है ईरान?
ईरान में आज हालात ये हैं कि आम जनता के लिए पेट भरना लग्जरी बन गया है. जब देश की 88.7% महंगाई दर लोगों की थाली से एक प्लेट खाना भी छीन लेगी, तो लोगों के पास सड़कों पर उतरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा.
अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, गैस की किल्लत, घटती नौकरियों और बेकाबू महंगाई के बीच फंसा ईरान अब एक ऐसे मुहाने पर खड़ा है, जहां से सामाजिक विस्फोट और नए राष्ट्रव्यापी विद्रोह की आशंका दिन-ब-दिन गहरी होती जा रही है.