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Account Aggregator : देश में डिजिटल इन्फ्रा जिस तेजी से बढ़ रहा है, अकाउंट एग्रीगेटर की जरूरत भी बढ़ती जा रही है. इन्फोसिस के कार्यकारी अध्यक्ष नंदन नीलेकणि ने कहा है कि अकाउंट एग्रीगेटर को भी अब बढ़ावा देने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि यूपीआई की तरह अकाउंट एग्रीगेटर के भी 50 करोड़ यूजर्स तक पहुंचने की क्षमता है. आखिर यह अकाउंट एग्रीगेटर क्या होता है और यह कैसे काम करता है.
भारत में अकाउंट एग्रीगेटर का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है.
नई दिल्ली. डिजिटल भारत में कारोबार और रोजगार के नए-नए रास्ते भी खुल रहे हैं. इन्फोसिस के सह-संस्थापक और गैर-कार्यकारी अध्यक्ष नंदन नीलेकणि ने कहा है कि अकाउंट एग्रीगेटर (Account Aggregator) का बिजनेस भारत में यूपीआई की तरह बड़ा बन सकता है. इसका ढांचा भी तैयार है और यह तेजी से ग्राहकों तक अपनी पहुंच भी बढ़ा रहा है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह 50 करोड़ ग्राहकों तक अपनी पहुंच बना सकता है. लिहाजा यूपीआई की तरह इस कारोबार को भी रेगुलेट करने पर काम शुरू करना चाहिए.
उन्होंने कहा कि अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क को बड़े पैमाने पर असर डालने की दिशा में बढ़ना चाहिए. चूंकि, अब बुनियादी ढांचा तैयार है, इसलिए अगले दो-तीन साल इसे और अधिक लोगों तक पहुंचाने, इसके उपयोग के दायरे को बढ़ाने और लाखों ऐसे लोगों और व्यवसायों को औपचारिक फाइनेंशियल सिस्टम से जोड़ने का एक बेहतरीन अवसर है. उन्होंने आधार और यूपीआई का उदाहरण देते हुए कहा कि अकाउंट एग्रीगेटर की पहुंच अब तक 20.7 करोड़ यूजर्स तक हो चुकी है. यूपीआई के पास 55 करोड़ यूजर हैं और ऐसा कोई कारण नहीं दिखता कि अकाउंट एग्रीगेटर भी इस लेवल तक न पहुंच सके.
बड़ी जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार
नीलेकणि ने कहा कि इस इकोसिस्टम ने अपनी उपयोगिता साबित कर दी है और अब यह बड़ी जिम्मेदारियां उठाने के लिए तैयार है. अब इसमें भागीदारी और डाटा की उपलब्धता बढ़ाने की जरूरत है. साथ ही अकाउंट एग्रीगेटर को ऐसा माध्यम बनाने पर जोर देना चाहिए जिसके जरिये फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन ग्राहकों की सहमति से अपनी जरूरत का डाटा हासिल कर सकें. उन्होंने कहा कि वित्तीय क्षेत्रों की भागीदारी बढ़ने से इस सेक्टर में डाटा की उपलब्धता भी बढ़ेगी.
क्या होते हैं अकाउंट एग्रीगेटर
अकाउंट एग्रीगेटर रिजर्व बैंक से रेगुलेटेड होते हैं. यह अलग-अलग वित्तीय संस्थाओं में मौजूद जानकारी को ग्राहकों की सहमति से एक संस्था से दूसरी संस्था तक पहुंचाती हैं. मान लीजिए कि आपके पास तीन-चार बैंक खाता है और म्यूचुअल फंड में निवेश भी है. जब आप बैंक में लोन लेने जाएंगे तो अंकाउंट एग्रीगेटर की मदद से ही बैंक को आपकी सभी वित्तीय जानकारियां अलग -अलग संस्थानों से मिलती हैं. इससे आपको अलग-अलग बैंक का अकाउंट स्टेटमेंट डाउनलोड नहीं करना पड़ेगा.