नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हिमांशु भाऊ गैंग के दो गुर्गों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों की पहचान गाजियाबाद के पसौंडा निवासी 25 वर्षीय मुर्सलीन उर्फ गुल्लू और हरियाणा के भिवानी निवासी 20 वर्षीय नवीन के रूप में हुई है. पुलिस के मुताबिक, दोनों विदेश में बैठे गैंगस्टर हिमांशु भाऊ के निर्देश पर काम कर रहे थे और गैंग के शूटरों को लॉजिस्टिक और आर्थिक मदद मुहैया कराते थे. आरोपियों के कब्जे से एक पिस्टल और पांच जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं.
शूटरों तक पहुंचाते थे गैंगस्टर का पैसा
स्पेशल सेल की नॉर्दर्न रेंज की टीम ने इंस्पेक्टर अनुज नौटियाल और इंस्पेक्टर चंदन कुमार के नेतृत्व में तथा एसीपी राहुल कुमार सिंह की निगरानी में यह कार्रवाई की.
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार मुर्सलीन उर्फ गुल्लू जनवरी 2026 में विशाखापत्तनम में हिमांशु भाऊ गैंग के दो शूटरों के संपर्क में आया था. ये शूटर दिल्ली-एनसीआर में वारदातों को अंजाम देने के बाद वहां छिपे हुए थे. इसके बाद मुर्सलीन गैंग के लिए काम करने लगा. वह हिमांशु भाऊ से शूटरों तक पैसे पहुंचाने और उनके होटल में ठहरने के लिए फर्जी पहचान पत्रों का इंतजाम करता था.
पुलिस जांच के मुताबिक, अगस्त 2026 में गैंग के शूटरों की गिरफ्तारी के बाद हिमांशु भाऊ ने मुर्सलीन को शूटर के तौर पर तैयार करना शुरू कर दिया था. उसे हथियार भी मुहैया कराए गए थे. पुलिस का दावा है कि गिरफ्तारी के समय वह टारगेट किलिंग को अंजाम देने या रेकी करने के लिए निर्देश मिलने का इंतजार कर रहा था.
बैंक खाते से पैसे ट्रांसफर करता था नवीन
मुर्सलीन से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने नवीन को हरियाणा के भिवानी से गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक, नवीन को भी गैंग के शूटरों ने अपने नेटवर्क में शामिल किया था.
शुरुआत में नवीन अपने बैंक खाते के जरिए हिमांशु भाऊ की तरफ से भेजी गई रकम को आगे पहुंचाने में मदद करता था. बाद में वह गैंग के लिए हथियार पहुंचाने का काम करने लगा. दोनों आरोपी इंटरनेट आधारित सुरक्षित कम्युनिकेशन ऐप के जरिए विदेश में बैठे गैंगस्टर के संपर्क में रहते थे.
युवाओं को गैंग में शामिल कर रहा था नेटवर्क
स्पेशल सेल की जांच में सामने आया है कि गैंग के विदेश में बैठे सरगना युवाओं को अपने नेटवर्क में शामिल कर रहे थे. कुछ युवाओं को शूटर बनाया जा रहा था, जबकि दूसरे युवाओं से हथियार पहुंचाने, पैसे ट्रांसफर करने और फरार शूटरों के ठहरने का इंतजाम कराने जैसे काम कराए जा रहे थे.
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