Suzlon Energy Q2 Results: आधे पर अटका सुजलॉन एनर्जी का शेयर, अब रेवेन्यू में तगड़ा उछाल, क्‍या लौटेंगे अच्छे दिन?

Suzlon Energy Q2 Results: आधे पर अटका सुजलॉन एनर्जी का शेयर, अब रेवेन्यू में तगड़ा उछाल, क्‍या लौटेंगे अच्छे दिन?


Suzlon Energy Q2 Results: सुजलॉन एनर्जी के शेयर में गिरावट के बीच कंपनी के तिमाही नतीजे सामने आ गए हैं. वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर करीब 26% बढ़कर 4,869 करोड़ रुपये पहुंच गया. हालांकि, कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पिछले साल के 1,279.4 करोड़ रुपये से घटकर 394 करोड़ रुपये रह गया. पहली नजर में आंकड़े कंपनी के लिए चिंता बढ़ाते हैं, लेकिन मुनाफे में इस बड़ी गिरावट के पीछे पिछले साल मिला एकमुश्त टैक्स लाभ भी अहम वजह है. दूसरी ओर, कंपनी ने सुजलॉन फाउंडेशन की 100% हिस्सेदारी खरीदने का भी एलान किया है.

सुजलॉन एनर्जी का शेयर 29 अक्टूबर 2026 को बीएसई और एनएसई पर दबाव में रहा. एनएसई पर शेयर 36.79 रुपये पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव से करीब 1.37% नीचे था. शेयर अपने 52 हफ्ते के ऊंचे स्तर 61.45 रुपये से करीब 40% नीचे आ चुका है. इस गिरावट के बीच निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि कंपनी की बढ़ती कमाई आगे चलकर मुनाफे में बदल पाती है या नहीं. तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि कारोबार का आकार बढ़ा है, लेकिन परिचालन मार्जिन पर दबाव बना हुआ है.

रेवेन्यू बढ़ा, लेकिन मुनाफा क्यों घटा?

सुजलॉन एनर्जी का रेवेन्यू वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही के 3,865.5 करोड़ रुपये से बढ़कर चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 4,869.1 करोड़ रुपये हो गया. इस दौरान कंपनी ने भारत में रिकॉर्ड 710 मेगावाट की विंड टर्बाइन डिलीवरी की, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह आंकड़ा 565 मेगावाट था.

इसके बावजूद कंपनी का घोषित नेट प्रॉफिट 69.2% गिरकर करीब 394 करोड़ रुपये रहा. इसकी बड़ी वजह पिछले साल का ऊंचा आधार है. वित्त वर्ष 2025-26 की सितंबर तिमाही में कंपनी को 891 करोड़ रुपये के डिफर्ड टैक्स एसेट से जुड़ा लाभ मिला था. इस एकमुश्त प्रभाव ने उस अवधि के मुनाफे को काफी बढ़ा दिया था.

अगर पिछले साल के इस टैक्स प्रभाव को अलग करके तुलना की जाए, तो कंपनी का तुलनीय मुनाफा करीब 389 करोड़ रुपये से बढ़कर 394 करोड़ रुपये हुआ. यानी इस आधार पर मुनाफे में लगभग 1.3% की बढ़ोतरी हुई. इसलिए केवल 69% की गिरावट देखकर कंपनी के कारोबारी प्रदर्शन का पूरा आकलन करना सही नहीं होगा.

EBITDA में मामूली गिरावट, मार्जिन पर दबाव

रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद सुजलॉन के परिचालन प्रदर्शन में उतनी तेजी नहीं दिखी. आपके उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी का EBITDA 716 करोड़ रुपये से घटकर 713 करोड़ रुपये रहा. EBITDA मार्जिन भी 18.7% से घटकर 14.7% पर आ गया.

इसका मतलब है कि कंपनी की बिक्री बढ़ने के बावजूद प्रत्येक 100 रुपये की कमाई से परिचालन स्तर पर बचने वाली रकम कम हुई. कंपनी को अब बढ़ती डिलीवरी के साथ लागत पर नियंत्रण और मार्जिन में सुधार करने की चुनौती का सामना करना होगा.

सुजलॉन फाउंडेशन की 100% हिस्सेदारी खरीदेगी कंपनी

तिमाही नतीजों के साथ सुजलॉन एनर्जी ने सुजलॉन फाउंडेशन के अधिग्रहण की घोषणा की है. कंपनी इसके 1 लाख इक्विटी शेयर खरीदेगी. प्रत्येक शेयर का फेस वैल्यू 10 रुपये है और पूरी हिस्सेदारी के लिए 10 लाख रुपये का भुगतान किया जाएगा. यह अधिग्रहण पूरा होने के बाद सुजलॉन फाउंडेशन, सुजलॉन एनर्जी की पूर्ण मालिकाना हक वाली सहायक कंपनी बन जाएगी. फाउंडेशन एक गैर-लाभकारी संस्था है, जो कल्याणकारी और परोपकारी गतिविधियों से जुड़ी है. कंपनी की घोषणा के मुताबिक, अधिग्रहण नवंबर 2026 के पहले सप्ताह तक पूरा करने की योजना है.



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