दुनिया में मौजूदा आर्थिक स्थिति उलझन भरी है, जहां एक तरफ, यूक्रेन और खाड़ी देशों में जारी युद्धों के कारण महंगाई है. इसके साथ ही भोजन और अन्य जरूरी चीजों की कमी हो गई है. वहीं दूसरी तरफ, AI में निवेश में तेजी की वजह से आशावाद और आर्थिक विकास देखने को मिल रहा है. यह स्थिति अफ्रीका के सामने चुनौतियां भी पेश करती है और अवसर भी उपलब्ध कराती है. पॉजिटिव एंगल यह है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक ने 2026 और 2027 में अफ्रीका की आर्थिक वृद्धि दर लगभग 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. यह 2026 में वैश्विक वृद्धि दर 3.1 प्रतिशत और 2027 में 3.4 प्रतिशत रहने के आईएमएफ के अनुमानों से अधिक है. आखिर भारत के लिए क्या संदेश छिपा है?
आईएमएफ का कहना है कि अफ्रीकी देशों को इस सदी की शुरुआत में किए गए कठिन व्यापक आर्थिक सुधारों का लाभ मिल रहा है. इन सुधारों से अफ्रीकी सरकारों को यूक्रेन और खाड़ी क्षेत्र में युद्धों के कारण पैदा हुए आर्थिक झटकों से निपटने में मदद मिल रही है. लेकिन विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि 2027 में अफ्रीका में गरीबी का स्तर 2022 की तुलना में अधिक रह सकता है. संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास (UNCTAD) की रिपोर्ट के अनुसार, 2010 से इस महाद्वीप का कर्ज, इसकी जीडीपी की वृद्धि दर की तुलना में लगभग चार गुना तेजी से बढ़ा है.
इसके अलावा, गरीबी कम करने की अफ्रीकी सरकारों की क्षमता भी घट रही है. अफ्रीकी सरकारें अपने राजस्व का औसतन 12 प्रतिशत हिस्सा कर्ज की अदायगी पर खर्च करती हैं. UNCTAD के अनुसार, यह राशि कई अफ्रीकी देशों के स्वास्थ्य या शिक्षा पर होने वाले खर्च से भी अधिक है. वहीं, आईएमएफ के अफ्रीका विभाग के निदेशक ने चेतावनी दी है कि उर्वरकों की बढ़ती कीमतें और अल नीनो के संयुक्त प्रभाव से अफ्रीकी देशों में खाद्य असुरक्षा बढ़ने और महंगाई में तेजी आने की आशंका है.
इस बात के भी संकेत बढ़ रहे हैं कि अफ्रीकी देश सतत विकास लक्ष्यों (SDG) और जलवायु संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए 2030 तक आवश्यक 4,100 अरब अमेरिकी डॉलर की राशि जुटाने में सक्षम नहीं होंगे. साल 2010 के बाद से अफ़्रीकी देशों के निर्यात के प्रतिशत के रूप में औसत विदेशी कर्ज दोगुना हो गया है और अब यह निर्यात के 140 प्रतिशत के बराबर है.
प्राइवेट लोन देने वालों से लिए गए कर्ज का हिस्सा काफी बढ़ गया है और अब यह उप-सहारा अफ़्रीका के कुल कर्ज का लगभग 45 प्रतिशत है. इसके अलावा, अफ्रीका को अक्सर दूसरे क्षेत्रों के समान स्थिति वाले देशों की तुलना में अधिक ब्याज दरों पर वित्त उपलब्ध कराया जाता है.
यह स्थिति ऐसे समय में पैदा हुई है, जब आधिकारिक विकास सहायता 2025 में 2024 के मुकाबले 24 प्रतिशत घट गई. जो ऐतिहासिक रूप से अफ्रीका की विकास परियोजनाओं और कार्यक्रमों के वित्तपोषण का महत्वपूर्ण स्रोत रही है. 2026 और 2027 में इसमें और गिरावट आने का अनुमान है. वास्तविक रूप में यह अब 2015 के स्तर पर आ गई है.
ऐसे में विश्व बैंक और अफ्रीकी विकास बैंक जैसे पुराने बहुपक्षीय विकास बैंक अफ्रीकी देशों के लिए वित्त के अधिक महत्वपूर्ण स्रोत बनते जा रहे हैं. वास्तव में विश्व बैंक उप-सहारा अफ्रीका का सबसे बड़ा लोन प्रोवाइडर है. इन संस्थानों का दावा है कि वे अपनी फाइनेंसिंग क्षमता बढ़ाने के प्रयास कर रहे हैं. उदाहरण के लिए, विश्व बैंक ने घोषणा की कि प्राइवेट सेक्टर के साथ उसके सहयोग से 2023 में 35 अरब डॉलर और 2025 में 112 अरब डॉलर का वित्त जुटाया गया.
लोअर इनकम वाले देशों के लिए फाइनेंसिंग में बढ़ोत्तरी इतनी तेज नहीं है. हकीकत में, साल 2000 के बाद से विकासशील देशों के लिए वर्ल्ड बैंक के फाइनेंसिंग में वास्तविक मूल्य के आधार पर सालाना केवल लगभग एक प्रतिशत की वृद्धि हुई है. अंतरराष्ट्रीय विकास वित्त और अफ्रीका के विकास से जुड़े मुद्दों पर काम कर रहे लोगों के अनुसार अफ्रीका आज दशकों के सबसे अप्रत्याशित, जोखिमपूर्ण और प्रतिकूल वैश्विक आर्थिक माहौल का सामना कर रहा है.
हालांकि, अफ्रीकी लोग केवल किस्मत के भरोसे बैठकर खुद को हालात का बंधक नहीं बनने दे सकते. इसके बजाय, उन्हें इस उलझन भरे माहौल में पैदा हो रहे कुछ अवसरों का लाभ उठाना चाहिए. ऐसा करने के छह तरीके हैं.
- पहला, महाद्वीप को अपने आंतरिक संसाधनों का अधिक प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करना होगा.
- दूसरा, अफ्रीकी सरकारें अपने द्वारा स्थापित क्षेत्रीय बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकती हैं.
- तीसरा, यह महाद्वीप हाल में बनाए गए ‘कर्जदारों के मंच’ की एक अफ्रीकी शाखा स्थापित कर सकता है.
- चौथा, अफ्रीकी देशों को अंतरराष्ट्रीय कर सुधारों के लिए अपने प्रयास जारी रखने चाहिए.
- पांचवां, गुलामी के अपराध के लिए मुआवजे का मुद्दा महत्वपूर्ण है.
- छठा, अफ्रीकी देशों को आईएमएफ में सुधार को बढ़ावा देने के लिए अपने प्रयास तेज करने चाहिए.