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Corporate Loan : आरबीआई ने रेपो रेट बढ़ाकर कर्ज महंगा कर दिया तो देश की दिग्गज कंपनियों ने फंड जुटाने के लिए बॉन्ड बाजार का रुख कर लिया है. रेपो रेट बढ़ने के बाद से अब तक कंपनियों ने 27 हजार करोड़ रुपये बॉन्ड के जरिये जुटाए हैं. बॉन्ड पर कंपनियों की तरफ से दिया जाने वाला ब्याज, उन्हें बैंक लोन पर चुकाए जाने वाले ब्याज से कम पड़ता है.
कॉरपोरेट बॉन्ड पर कंपनियों को बैंक लोन से कम ब्याज देना पड़ता है.
नई दिल्ली. रिजर्व बैंक ने पिछले दिनों रेपो रेट में 0.25 फीसदी बढ़ोतरी की तो बैंकों ने भी अपना कर्ज महंगा करना शुरू कर दिया. इसी महंगे कर्ज से बचने के लिए बड़ी कंपनियों ने पैसे जुटाने का नया जुगाड़ बना लिया है. इन बड़ी कंपनियों ने धन जुटाने के लिए बॉन्ड बाजार का रुख किया है, जहां उनकी लागत बैंकों के ब्याज दर से भी कम आती है. इस तरह कंपनियां ब्याज के रूप में करोड़ों रुपये बचाकर बैंकों के बजाय बॉन्ड के जरिये पैसे जुटा रही हैं.
हालिया आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि एएए रेटिंग वाली कंपनियों ने अक्टूबर में अब तक 8.13 फीसदी से 8.85 फीसदी तक की ब्याज दर पर पैसा जुटाया है. ये बॉण्ड इस महीने की शुरुआत में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समीक्षा के तुरंत बाद आए. इस समीक्षा में केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की वृद्धि की थी और मौद्रिक नीति के रुख को भी ‘तटस्थ’ से बदलकर ‘सूझ-बूझ के साथ सख्ती’ वाला कर दिया था. इसका मतलब है कि आने वाले समय में भी बैंकों की ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं.
कैसे सस्ता पड़ रहा बॉन्ड से कर्ज लेना
विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी कंपनियों के लिए बॉण्ड के जरिये कर्ज लेना बाहरी मानकों से जुड़ी ब्याज दरों वाले बैंक कर्ज की तुलना में सस्ता हो सकता है. इसकी वजह यह है कि बैंक ऋण में मानक उधारी दर के ऊपर अतिरिक्त प्रीमियम भी लिए जाते हैं. रॉकफोर्ट फिनकैप एलएलपी के संस्थापक एवं प्रबंध साझेदार वेंकटकृष्णन श्रीनिवासन ने कहा कि देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई से कर्ज लेने पर प्रभावी ब्याज दर 8.65 फीसदी होगी. इसमें बाहरी मानक से जुड़ी उधारी दर (ईबीएलआर) 8.15 फीसदी के साथ ऋण जोखिम प्रीमियम (सीआरपी) और कारोबारी रणनीति प्रीमियम (बीएसपी) शामिल हैं.
बॉन्ड पर कितनी ब्याज दर
आंकड़े बताते हैं कि इसके मुकाबले सरकारी कंपनी आरईसी ने मंगलवार को 5 साल वाले बॉण्ड जारी कर 8.30 फीसदी की ब्याज दर पर 4,000 करोड़ रुपये जुटाए. श्रीनिवासन ने कहा कि इससे बॉण्ड के जरिये धन जुटाना लागत के लिहाज से काफी फायदेमंद हो जाता है. यह लाभ एएए रेटिंग वाली सरकारी कंपनी को भी मिलता है. इसमें बॉण्ड जारी करने के खर्च और कर्ज की शर्तों में अन्य अंतर को अभी शामिल नहीं किया गया है. अक्टूबर से पहले के कुछ महीनों में बैंकों ने कंपनियों की ओर से कर्ज लेने में तेज ग्रोथ दर्ज की थी. बैंकों ने इसका कारण आरबीआई की ओर से ब्याज दरें बढ़ाए जाने की आशंका के बीच मुद्रा बाजार में उपलब्ध अन्य विकल्पों की बढ़ती संख्या को बताया था.
एसबीआई कितने ब्याज पर दे रहा लोन
एसबीआई की वेबसाइट के अनुसार, 15 अक्टूबर से पहले बैंक की रेपो और ट्रेजरी से जुड़ी उधारी दर 7.90 फीसदी थी. इसके ऊपर कर्ज का जोखिम प्रीमियम और कारोबारी रणनीति प्रीमियम भी लागू होते हैं. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बीएसई के ‘इलेक्ट्रॉनिक बुक प्रोवाइडर’ (ईबीपी) मंच से जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, सुंदरम फाइनेंस ने 23 अक्टूबर को 48 महीने की अवधि वाले बॉण्ड जारी कर 8.53 फीसदी की ब्याज दर पर 1,210 करोड़ रुपये जुटाए. यह एसबीआई की कुल ब्याज दर से कहीं कम है.
किन कंपनियों ने बॉन्ड से जुटाए पैसे
सरकारी कंपनी आरईसी ने 5 साल और 3 दिन की अवधि वाले बॉण्ड को 8.3 फीसदी ब्याज दर पर जारी किया. कंपनी ने बाजार से 4 हजार करोड़ रुपये जुटाए. भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) ने 38 महीने की अवधि वाले बॉण्ड जारी कर 8.05 फीसदी की ब्याज दर पर 5,176 करोड़ रुपये जुटाए. यह बैंकों की ब्याज दरों से काफी कम है. आंकड़ों के अनुसार, आरबीआई की इस महीने में मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद से कंपनियों ने बॉण्ड जारी कर 27,500 करोड़ रुपये से अधिक जुटाए हैं. एएए रेटिंग वाली कंपनियां घरेलू बॉण्ड बाजार का रुख कर रही हैं, क्योंकि फिलहाल बॉण्ड पर ब्याज दरें बैंकों से काफी कम हैं.