इटली में बर्फ की कब्र से निकल रहे मौत के सामान, 100 साल बाद भी जिंदा हैं ये बम

इटली में बर्फ की कब्र से निकल रहे मौत के सामान, 100 साल बाद भी जिंदा हैं ये बम


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इटली में बर्फ की कब्र से निकल रहे मौत के सामान, 100 साल बाद भी जिंदा हैं ये बम

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इटली के डोलोमाइट्स पहाड़ों में तेजी से पिघलते ग्लेशियरों से प्रथम विश्व युद्ध के 250 विस्फोटक बाहर आए हैं. इटैलियन आर्मी ने तलाशी अभियान चलाकर इन बमों को बरामद किया और निष्क्रिय किया. इनमें तोप के गोले और फ्रांस में बने मोर्टार बम भी शामिल हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, बढ़ती वैश्विक गर्मी के कारण बर्फ में दबे ये खतरनाक हथियार अब सामने आ रहे हैं.

सोचिए, आप पहाड़ों पर घूमने निकले हों और अचानक बर्फ के बीच से ऐसा बम दिखाई दे, जो 100 साल से ज्यादा समय से दबा पड़ा हो और आज भी फट सकता हो. इटली के डोलोमाइट्स पहाड़ों में इस गर्मी कुछ ऐसा ही हुआ. तेजी से पिघलते ग्लेशियरों ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान इस्तेमाल किए गए विस्फोटकों को बाहर ला दिया. इतालवी सेना ने इलाके में तलाशी अभियान चलाकर 250 विस्फोटक बरामद किए और उन्हें निष्क्रिय किया. इनमें इटली के तोप के गोले और फ्रांस में बने मोर्टार बम भी शामिल थे. (AI इमेज)

इटली की सेना के मुताबिक, गर्मियों में पहाड़ों पर घूमने गए लोगों ने कई जगह बम देखे जाने की सूचना दी थी. इनमें ज्यादातर मामले पूर्वी ट्रेंटिनो के प्रिमिएरो वैली में कैनाल सैन बोवो इलाके से सामने आए. इसके बाद सेना की जूलिया अल्पाइन ब्रिगेड ने इस क्षेत्र के साथ डोलोमाइट्स के दूसरे ऊंचाई वाले और ग्लेशियर वाले इलाकों में भी तलाशी अभियान चलाया. इस दौरान कुल 250 विस्फोटक मिले, जिन्हें बरामद करने के बाद निष्क्रिय कर दिया गया. (AI इमेज)

सेना के मुताबिक, इनमें इटली के 75 मिलीमीटर के 18 तोप के गोले और फ्रांस में बने 37 थेवेटो मोर्टार बम शामिल थे. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान फ्रांस में बने ये मोर्टार बम इतालवी शाही सेना को भी दिए गए थे. ये हथियार उस लड़ाई के दौर के हैं, जिसे ‘व्हाइट वॉर’ कहा जाता है. 1915 से 1918 के बीच ऑस्ट्रो-हंगेरियन सेना और इतालवी सैनिकों के बीच डोलोमाइट्स और आल्प्स के बेहद ठंडे, दुर्गम पहाड़ी इलाकों में लड़ाई हुई थी. (AI इमेज)

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इन पुराने हथियारों का बर्फ से बाहर आना कोई नई बात नहीं है. पिछले एक दशक से ज्यादा समय में ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार बढ़ी है और हर गर्मी के अंत में ऐसे खतरनाक अवशेष सामने आने लगे हैं. बर्गामो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और स्टेल्वियो नेशनल पार्क में विरासत परियोजनाओं के समन्वयक स्टेफानो मोरोसिनी ने इसे बढ़ती वैश्विक गर्मी का नतीजा बताया. उनके मुताबिक, बर्फ ने इन विस्फोटकों को 100 साल से ज्यादा समय तक सुरक्षित रखा था. कुछ पहले ही फट चुके थे, लेकिन कई अब भी सक्रिय थे. ऐसे में बर्फ से बाहर आने के बाद ये बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं. (AI इमेज)

विशेषज्ञों ने पहाड़ों पर जाने वाले लोगों को सलाह दी है कि अगर उन्हें कहीं भी विस्फोटक जैसा कोई सामान दिखे, तो उसे बिल्कुल न छुएं. उसकी जगह और स्थिति चाहे जो हो, तुरंत पुलिस को सूचना दें. ग्लेशियरों के पिघलने से सिर्फ हथियार ही नहीं, बल्कि प्रथम विश्व युद्ध से जुड़ी कई ऐतिहासिक चीजें भी सामने आई हैं. 1990 के दशक से बर्फ के पीछे छिपे हथियार, स्लेज, चिट्ठियां और सैनिकों की डायरियां मिलने लगी थीं. (AI इमेज)

2015 में माउंट स्कोर्लुज्जो की चोटी पर एक गुफा के भीतर बना लकड़ी का बैरक सामने आया. यह पहाड़ 3,095 मीटर ऊंचा है और स्टेल्वियो दर्रे के ऊपर स्थित है. करीब एक सदी तक बर्फ ने इस ठिकाने को ढक रखा था. नवंबर 1918 में प्रथम विश्व युद्ध खत्म होने के बाद सैनिक इस जगह को बंद करके चले गए थे. अंदर पुआल से बने बिस्तर, कपड़े, लालटेन, अखबार, पोस्टकार्ड, सिक्के और डिब्बाबंद खाना अच्छी हालत में मिला था. (AI इमेज)

इन ऐतिहासिक अवशेषों को सहेजने के लिए बोर्मियो में ‘व्हाइट वॉर’ संग्रहालय खोलने की योजना है. इसके जून 2027 में खुलने का कार्यक्रम है.
युद्ध में 1.8 लाख तक लोगों की मौत का अनुमा. ‘व्हाइट वॉर’ में करीब 1.8 लाख लोगों की मौत होने का अनुमान है. इनमें से ज्यादातर मौतें सीधे गोलीबारी के बजाय हिमस्खलन, पहाड़ों से गिरने और अत्यधिक ठंड के कारण हुई थीं. पिछले 15 वर्षों में पिघलती बर्फ से दर्जनों शव भी बाहर आए हैं. कुछ शवों पर अब भी सैनिकों की वर्दी थी. 2017 में एक इतालवी सैनिक के परिवार को उसके शव के साथ मिले दस्तावेजों के आधार पर उसकी पहचान होने के बाद उसे दफनाने का मौका मिला था. उसका शव प्रेसना ग्लेशियर पर मिला था. (AI इमेज)

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