पिछले दो दशकों में भारत की डिजिटल कहानी मुख्य रूप से एक्सेस बढ़ाने पर फोकस्ड रही है. यानी ज्यादा बैंक खाते, ज्यादा स्मार्टफोन और ज्यादा लोगों तक इंटरनेट की सुविधा पहुंचाना. इससे करोड़ों भारतीयों के जीने और लेन-देन का तरीका बदल गया. लेकिन अब डिजिटल सेवाएं हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं, इसलिए किसी बिजनेस के लिए सिर्फ उपलब्ध होना ही काफी नहीं है. अब मायने यह रखता है कि ग्राहक उन सेवाओं का इस्तेमाल कितनी आसानी से कर पाते हैं. इसी बदलाव पर News18 राइजिंग भारत समिट – ईस्ट एडिशन में HDFC बैंक के ग्रुप हेड (डिजिटल एंड कस्टमर एक्सपीरियंस) अंजनी राठौर ने विस्तार से चर्चा की. उन्होंने बताया कि ग्राहकों की उम्मीदें कैसे बदल रही हैं और बंगाल की एक्सपीरियंस इकोनॉमी भारत के नए ग्राहकों के बारे में हमें क्या सिखा सकती है.
अंजनी राठौर ने कहा, भारत धीरे-धीरे एक्सेस की अर्थव्यवस्था से ‘एक्सपीरियंस की अर्थव्यवस्था’ में बदल रहा है. चाहे फिल्म देखते हुए खाना ऑर्डर करना हो, सेकंडों में कैब बुक करनी हो या वित्तीय सेवाओं का लाभ उठाना हो, ग्राहक अब ऐसी चीजें चाहते हैं जो उनके लिए आसान हों और उनकी जरूरतों के हिसाब से बनी हों. दी जा रही सर्विस के साथ-साथ अब उससे मिलने वाला अनुभव एक्सपीरियंस भी उतना ही महत्वपूर्ण होता जा रहा है. उन्होंने कहा कि आने वाला दशक ग्राहकों की जरूरतों का पहले से अनुमान लगाने और वे जहां हैं, वहीं उन्हें सर्विस देने का होगा. बिजनेस को यह समझना होगा कि ग्राहक क्या चाहते हैं, कई बार तो उनके मांगने से पहले ही.
दुर्गा पूजा’एक्सपीरियंस इकोनॉमी’ का शानदार उदाहरण
अनुभव कैसे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे सकते हैं, बंगाल इसका एक दिलचस्प उदाहरण पेश करता है. दुर्गा पूजा अब सिर्फ एक धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव नहीं रह गई है, बल्कि यह थीम वाले पंडालों, कारीगरी, सामुदायिक भागीदारी और पर्यटन का एक पूरा इकोसिस्टम बन गई है.
राठौर ने बताया कि पश्चिम बंगाल की जीडीपी (GDP) में दुर्गा पूजा का योगदान लगभग 2 से 2.5% माना जाता है. इसका असर सिर्फ उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कारीगरों, स्थानीय व्यवसायों, ट्रांसपोर्टरों, होटलों और दुकानदारों के लिए बड़े अवसर पैदा करता है.
देर रात कार लोन की मांग: बदलता बैंकिंग व्यवहार
सुविधा की यही उम्मीद लोगों के बैंकिंग के तरीके को भी बदल रही है. कोलकाता में ग्राहकों के व्यवहार का जिक्र करते हुए राठौर ने बताया कि लोग अब पारंपरिक बैंकिंग घंटों के बाद भी डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं. उदाहरण के तौर पर, ग्राहक देर रात को भी कार लोन जैसे उत्पादों के बारे में जानकारी ले रहे हैं और उनके लिए अप्लाई कर रहे हैं. ग्राहकों के लिए अब बैंकिंग तब हो सकती है जब उन्हें जरूरत हो, न कि सिर्फ तब जब कोई ब्रांच खुली हो.
फिजिकल और डिजिटल का बेहतरीन तालमेल
भविष्य की बैंकिंग पर बात करते हुए राठौर ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ फिजिकल या सिर्फ डिजिटल के बीच का चुनाव नहीं है. उन्होंने कहा, यह फिजिकल या डिजिटल नहीं है, बल्कि यह फिजिकल और डिजिटल दोनों है. जहां डिजिटल प्लेटफॉर्म रोजमर्रा की सेवाएं 24 घंटे उपलब्ध कराते हैं, वहीं घर खरीदने जैसे बड़े वित्तीय फैसलों के लिए आज भी ब्रांच और रिलेशनशिप मैनेजर मायने रखते हैं, क्योंकि वहां ग्राहक व्यक्तिगत सलाह चाहते हैं. HDFC बैंक का फोकस इन दोनों चैनल्स को एक साथ लाने पर है ताकि ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से डिजिटल सुविधा या किसी इंसान से बात करने का विकल्प चुन सकें.
डेटा और AI से बदलेगा अनुभव
राठौर ने बताया कि वित्तीय सेवाओं को ग्राहकों के अनुकूल बनाने में तकनीक बहुत काम आएगी. उन्होंने कहा, “डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) दोनों मिलकर अनुभव को बड़े पैमाने पर बदलने जा रहे हैं.” ग्राहकों की सहमति से डेटा और एआई का इस्तेमाल कर सेवाओं को ज्यादा प्रासंगिक बनाया जा सकता है. हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस ‘पर्सनलाइजेशन’ के साथ ग्राहकों की जानकारी को सुरक्षित रखने और उनका भरोसा बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी भी आती है.