क्या है मिजोरम में 721 लोगों की मौत की वजह? रिपोर्ट में हुआ खुलासा
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मिजोरम में साल 2025 में मौतों की वजह से जुड़ी एक रिपोर्ट ने सबका ध्यान खींचा है. यहां सबसे ज्यादा लोगों की जान सांस से जुड़ी बीमारियों ने ली, जबकि पाचन तंत्र की बीमारियां दूसरे नंबर पर रहीं. रिपोर्ट में कैंसर से लेकर संक्रामक रोगों तक, मौतों के कई कारण सामने आए हैं. आखिर राज्य में कितने लोगों की मौत हुई और किस जिले में सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए?
मिजोरम में मौतों की वजहें चौंकाने वाली
आइजोल: सोचिए, अगर किसी राज्य में सबसे ज्यादा लोगों की जान सांस से जुड़ी बीमारियों की वजह से जा रही हो, तो यह चिंता बढ़ाने वाली बात है. मिजोरम में साल 2025 के आंकड़े कुछ ऐसी ही तस्वीर दिखाते हैं. यहां सबसे ज्यादा मौतें श्वसन संबंधी बीमारियों से हुईं. इसके बाद पाचन तंत्र की बीमारियां जानलेवा साबित हुईं. राज्य की एक नई रिपोर्ट में मौतों की वजह से जुड़े ऐसे कई आंकड़े सामने आए हैं, जो आपको चौंका सकते हैं.
अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय के एक कार्यक्रम में जारी ‘मृत्यु के कारणों का चिकित्सीय प्रमाणीकरण रिपोर्ट (एमसीसीडी), 2025’ के अनुसार, राज्य में कुल चिकित्सीय रूप से प्रमाणित मौतों में 17.3 प्रतिशत मामले श्वसन संबंधी बीमारियों के थे जबकि 15 प्रतिशत मौतों का कारण पाचन तंत्र संबंधी बीमारियां रहीं.
सांस की बीमारी से सबसे ज्यादा मौतें
रिपोर्ट के मुताबिक, रक्त संचार तंत्र संबंधी बीमारियां 13.7 प्रतिशत मौतों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं. इसके अलावा, संक्रामक एवं परजीवी रोगों से 12.2 प्रतिशत और कैंसर से 11 प्रतिशत चिकित्सीय रूप से प्रमाणित मौतें हुईं.
721 लोगों की गई जान
मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म एवं मृत्यु) सह आयुक्त एवं सचिव वनलालदीना फनाई की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में श्वसन संबंधी बीमारियों से 721 लोगों की मौत हुई, जिनमें 268 महिलाएं थीं. वहीं, पाचन तंत्र संबंधी बीमारियों के कारण 613 लोगों की जान गई.
आइजोल में सबसे ज्यादा मौतें
रिपोर्ट के अनुसार, मिजोरम में वर्ष 2025 में चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित मौतों के कुल 4,146 मामले दर्ज किए गए. वर्ष 2024 में यह संख्या 4,329 थी. जिलावार आंकड़ों में आइजोल सबसे आगे रहा, जहां 2,664 मौतें दर्ज की गईं. इसके बाद लुंगलेई में 350 और कोलासिब जिले में 282 मौतें दर्ज की गईं.