भवरसेन घाट की विशाल चट्टान पर दिखाई दी काली माता की आकृति, दुर्गम पहाड़ी पर उमड़ा जनसैलाब, कड़ी सुरक्षा

भवरसेन घाट की विशाल चट्टान पर दिखाई दी काली माता की आकृति, दुर्गम पहाड़ी पर उमड़ा जनसैलाब, कड़ी सुरक्षा


सीधी. मध्यप्रदेश के सीधी जिले के भवरसेन घाट में एक विशाल चट्टान पर काली माता की आकृति दिखाई देने के दावे के बाद इलाके में आस्था और कौतूहल का ऐसा संगम देखने को मिल रहा है कि दुर्गम पहाड़ी तक श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा है. कोई इसे मां काली का चमत्कार मानकर दर्शन करने पहुंच रहा है, तो कोई इस अद्भुत आकृति को अपनी आंखों से देखना चाहता है. लेकिन जिस स्थान पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है, वहां की भौगोलिक स्थिति बेहद खतरनाक है. तीन तरफ हजारों फीट गहरी खाई और नीचे सोन व बनास नदियों का संगम, जबकि पहुंचने के लिए महज एक ऊबड़-खाबड़ रास्ता. बढ़ती भीड़ और हादसे की आशंका को देखते हुए वन विभाग और पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया है. आखिर आस्था के इस केंद्र पर ऐसा क्या है, जिसने लोगों को खींच लिया है? देखिए

सीधी जिले के भवरसेन घाट में इन दिनों एक विशाल चट्टान पर काली माता की आकृति दिखाई देने के दावे ने लोगों के बीच जबरदस्त कौतूहल पैदा कर दिया है. खबर फैलते ही दूर-दराज के इलाकों से लोग यहां पहुंचने लगे. चट्टान पर उभरी आकृति को श्रद्धालु मां काली का स्वरूप मानकर दर्शन कर रहे हैं. देखते ही देखते यह दुर्गम इलाका लोगों की आस्था का केंद्र बन गया. यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ केवल पहाड़ी तक सीमित नहीं है. लोगों की आवाजाही बढ़ने से आसपास की सड़क पर भी वाहनों का दबाव बढ़ गया है. कई किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लगने की स्थिति सामने आई है. जिस रास्ते पर सामान्य दिनों में आवाजाही सीमित रहती है, वहां अचानक बढ़ी भीड़ ने सुरक्षा व्यवस्था को बड़ी चुनौती दे दी है. लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चिंताजनक पहलू उस स्थान की भौगोलिक स्थिति है, जहां श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं.

भवरसेन घाट का यह इलाका बेहद दुर्गम और जोखिम भरा बताया जा रहा है. तीन तरफ गहरी खाइयां और नीचे सोन और बनास नदियों का संगम है. पहाड़ी तक पहुंचने के लिए भी कोई सुगम रास्ता नहीं, बल्कि ऊबड़-खाबड़ मार्ग का सहारा लेना पड़ता है. ऐसे में यहां एक साथ बड़ी संख्या में लोगों का पहुंचना किसी बड़े हादसे की आशंका को बढ़ा सकता है. पहाड़ी की ऊंचाई, खाई की गहराई और सीमित आवागमन मार्ग के बीच यदि भीड़ बेकाबू होती है, तो लोगों को सुरक्षित निकालना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

क्या है पूरा मामला
इस पूरे मामले को लेकर काली माता के पुजारी का कहना है कि वह इंदौर के पीथमपुर में थे. उनके मुताबिक, मां काली ने उन्हें सपने में आकर अपने स्थान का संकेत दिया. पुजारी का दावा है कि भवरसेन घाट की विशाल चट्टान पर शेर पर सवार काली माता की आकृति दिखाई देती है और उसका पूरा स्वरूप चट्टान में स्पष्ट नजर आता है. पुजारी के इस दावे के बाद श्रद्धालुओं के बीच इस स्थान को लेकर जिज्ञासा और बढ़ गई है. लोग दूर-दूर से यहां पहुंच रहे हैं और चट्टान पर दिखाई देने वाली आकृति के दर्शन कर रहे हैं.

हालांकि, इस आकृति को लेकर श्रद्धालुओं की अपनी-अपनी मान्यताएं हैं. फिलहाल, इस स्थान को लेकर लोगों के बीच चर्चा और कौतूहल का माहौल बना हुआ है. लेकिन आस्था के साथ सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है, खासकर तब, जब दर्शन स्थल तक पहुंचने का रास्ता जोखिम भरा हो. लगातार बढ़ती भीड़ और स्थान की संवेदनशीलता को देखते हुए वन विभाग ने सुरक्षा के इंतजाम किए हैं. अधिकारियों के मुताबिक, इलाके की खतरनाक स्थिति को ध्यान में रखते हुए चारों तरफ कांटेदार तार लगाकर घेराबंदी कराई गई है. लोगों की आवाजाही को नियंत्रित किया जा रहा है, ताकि कोई भी श्रद्धालु असुरक्षित हिस्से में पहुंचकर अपनी जान जोखिम में न डाले.

सुरक्षा के लिए भी किए गए कड़े इंतजाम
मौके पर पुलिस और वन विभाग के दो दर्जन से अधिक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाए जाने की जानकारी है. इनका काम भीड़ को नियंत्रित करना, लोगों को सुरक्षित दूरी पर रखना और एक साथ अधिक संख्या में लोगों को खतरनाक स्थान पर एकत्रित होने से रोकना है. व्यवस्था के तहत लोगों को चरणबद्ध तरीके से दर्शन कराने का प्रयास किया जा रहा है. एक समूह के दर्शन कर वापस लौटने के बाद दूसरे लोगों को आगे जाने दिया जा रहा है, ताकि संकरे रास्ते पर भीड़ का दबाव न बढ़े. भवरसेन घाट की यह तस्वीर एक तरफ लोगों की गहरी आस्था और धार्मिक विश्वास को दिखाती है, तो दूसरी तरफ दुर्गम पर्यटन और धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा प्रबंधन की अहमियत भी सामने लाती है.

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आस्था के इस उभरते केंद्र पर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आगे क्या स्थायी इंतजाम किए जाते हैं. क्योंकि श्रद्धा अपनी जगह है, लेकिन गहरी खाई और दुर्गम रास्तों के बीच एक छोटी-सी चूक भी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है.



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