BJP विधायक पर चुनावी हलफनामे में आपराधिक रिकॉर्ड छिपाने का आरोप, कांग्रेस नेता बोले- चुनाव आयोग ने नहीं लिया एक्शन, तो जाएंगे कोर्ट


Last Updated:

Katni News: कांग्रेस नेता राघवेंद्र सिंह ने बड़वारा विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह पर आरोप लगाते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल किए गए फॉर्म-26 में आपराधिक मामलों की जानकारी देना अनिवार्य होता है. विधायक ने अपने शपथपत्र में अपराध क्रमांक 99/2000 का जिक्र नहीं किया था.

Top Deals Inside

BJP MLA ने छिपाया आपराधिक रिकॉर्ड? कांग्रेस नेता ने RTI लगाकर जुटाए दस्तावेजZoom

कांग्रेस नेता राघवेंद्र सिंह ने चुनाव आयोग से शिकायत की है.

रिपोर्ट- नारायण गुप्ता, कटनी. मध्य प्रदेश के कटनी जिले की बड़वारा विधानसभा सीट से जुड़े एक मामले ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है. कांग्रेस के प्रदेश सचिव सोशल मीडिया प्रभारी राघवेंद्र सिंह ने बीजेपी विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह पर 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान नामांकन के साथ दाखिल शपथ पत्र में आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया है. कांग्रेस नेता ने RTI के जरिए जुटाए दस्तावेजों का हवाला देते हुए वर्ष 2000 में दर्ज एक मामले का जिक्र किया और इसकी शिकायत शुरुआती तौर पर जिला निर्वाचन अधिकारी से लेकर इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया से की है. उन्होंने कहा कि धीरेंद्र बहादुर सिंह की विधायकी निरस्त न होने पर वह न्यायालय का रुख करेंगे.

दरअसल बड़वारा विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह पर आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेता राघवेंद्र सिंह ने कहा कि चुनाव के दौरान दाखिल किए गए फॉर्म-26 में आपराधिक मामलों की जानकारी देना जरूरी होता है. उनके मुताबिक, विधायक ने अपने शपथपत्र में अपराध क्रमांक 99/2000 का उल्लेख नहीं किया था जबकि इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 448, 324, 325 और 506 सहित अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज होने का दावा किया गया है.

बाद में हो गया था समझौता
कांग्रेस नेता का कहना है कि इस मामले में शिकायतकर्ता विधायक धीरेंद्र सिंह उर्फ धीरू की बहन उषा बाई थीं. उन्होंने दावा किया कि सूचना के अधिकार के माध्यम से उन्हें संबंधित दस्तावेज मिले हैं. इनमें पुलिस अधीक्षक कार्यालय से प्राप्त आपराधिक रिकॉर्ड की सत्यापित छायाप्रति और विधायक के नामांकन से संबंधित दस्तावेज शामिल होने की बात कही गई है. कांग्रेस नेता ने कहा कि संबंधित प्रकरण में बाद में समझौता हो गया हो, तब भी चुनावी शपथपत्र में आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने के आरोप की जांच होनी चाहिए.

हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे
उनका कहना है कि मतदाताओं को उम्मीदवार की पृष्ठभूमि की पूरी जानकारी मिलनी चाहिए ताकि वे सोच-समझकर अपना प्रतिनिधि चुन सकें. राघवेंद्र सिंह ने कहा कि दस्तावेज मिलने के बाद वह इस मामले को जिला निर्वाचन अधिकारी लेकर निर्वाचन आयोग तक पत्राचार कर चुके हैं और जरूरत पड़ी, तो वह उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय का रुख करेंगे और MLA धीरेंद्र सिंह की विधायकी निरस्त करने की मांग करेंगे. उन्होंने हाल में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन से जुड़े मीनाक्षी नटराजन मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि वह भी कानूनी प्रक्रिया के जरिए इस मुद्दे को उठाएंगे.

फिलहाल यह मामला कांग्रेस नेता की ओर से लगाए गए आरोपों और उनके बताए दस्तावेजों पर आधारित है. विधायक का पक्ष और संबंधित प्रकरण की मौजूदा कानूनी स्थिति सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी.



Source link