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Inverter Battery Maintenance Tips: गर्मियों की उमस हो या सर्दियों की रात, बिजली गुल होते ही घर को रोशन रखने वाला इन्वर्टर अगर अचानक जवाब दे जाए, तो परेशानी दोगुनी हो जाती है. अधिकांश घरों में इन्वर्टर तो लग जाता है, लेकिन उसकी रीढ़ यानी ‘बैटरी’ की सही देखभाल पर लोग ध्यान नहीं देते. नतीजतन, जो बैटरी सालों-साल चल सकती थी, वह लापरवाही और गलत पानी डालने की आदत से समय से पहले दम तोड़ देती है. आइए जानते हैं जौनपुर के बैटरी एक्सपर्ट से कि कैसे एक छोटी सी सावधानी आपकी बैटरी की उम्र को दोगुना कर सकती है.
Inverter Battery Maintenance Tips: घर में बिजली जाने पर इन्वर्टर ही लोगों के काम आता है. गर्मी हो या सर्दी, बिजली कटते ही पंखे, लाइट और दूसरे जरूरी उपकरण चलाने के लिए इन्वर्टर की जरूरत पड़ती है. लेकिन क्या आप अपने इन्वर्टर की बैटरी का ध्यान रखते हैं? अगर आप कई महीनों तक बैटरी में पानी का स्तर नहीं देखते हैं, तो इससे उसकी उम्र काफी कम हो सकती है. बैटरी की सही देखभाल नहीं करने पर उसकी लाइफ आधी तक होने का खतरा रहता है.
महीने में एक बार जांचना जरूरी है पानी का स्तर
बैटरी दुकानदार अजीज ने बताया कि इन्वर्टर की बैटरी को लंबे समय तक सही रखने के लिए समय-समय पर उसका पानी चेक करना सबसे जरूरी है. आमतौर पर लोग तीन से चार महीने में बैटरी में पानी डालते हैं, लेकिन महीने में एक बार पानी का स्तर देखना अच्छी आदत है. इससे समय रहते पता चल जाता है कि बैटरी में पानी कम तो नहीं हो गया है. अजीज ने बताया कि कई लोग घर में इस्तेमाल होने वाला सामान्य पानी ही बैटरी में डाल देते हैं.
नल, एसी या बारिश का पानी डालने से बचें
कुछ लोग एसी से निकलने वाले पानी या बारिश के पानी का भी इस्तेमाल करते हैं, लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए. बैटरी में हमेशा डिस्टिल्ड वॉटर यानी आसुत जल का इस्तेमाल करना चाहिए. सामान्य पानी में मौजूद खनिज और दूसरी अशुद्धियां बैटरी को नुकसान पहुंचा सकती हैं. इसलिए बैटरी में पानी डालते समय सावधानी बरतना जरूरी है.
टर्मिनल्स की सफाई और सोलर बैटरी के नियम
बैटरी की देखभाल के लिए सिर्फ पानी का स्तर देखना ही काफी नहीं है. उसके टर्मिनल यानी कनेक्शन वाली जगह की सफाई भी समय-समय पर करनी चाहिए. वहां गंदगी और जंग जमने से कनेक्शन प्रभावित हो सकता है. अजीज ने बताया कि सही देखभाल करने से बैटरी की कार्यक्षमता बनाए रखने में मदद मिलती है. अगर आपके घर में सोलर पैनल लगा है, तो उसकी बैटरी का प्रकार जानना भी जरूरी है.
लेड-एसिड बनाम लिथियम बैटरी: कंपनी के निर्देश जरूरी
अजीज ने बताया कि लेड-एसिड बैटरी में जरूरत के अनुसार पानी डालना पड़ता है, जबकि लिथियम बैटरी में पानी डालने की जरूरत नहीं होती. इसलिए बैटरी के प्रकार और कंपनी के निर्देशों के अनुसार ही उसकी देखभाल करनी चाहिए. लंबे समय तक बैटरी की अनदेखी करने और पानी का स्तर कम होने देने से उसकी उम्र काफी घट सकती है. ऐसे में बेहतर है कि महीने में एक बार बैटरी की जांच करें और जरूरत पड़ने पर सही तरीके से पानी डलवाएं. इससे बैटरी को जल्दी खराब होने से बचाने में मदद मिल सकती है.