नागौर. राजस्थान के नागौर जिले में रबी सीजन के दौरान किसान विभिन्न प्रकार की मसाला और हरी पत्तेदार फसलों की खेती करते हैं. इनमें कसूरी पान मेथी भी किसानों के लिए उपयोगी फसल मानी जाती है. इसकी पत्तियों का इस्तेमाल सब्जी, पराठे और विभिन्न व्यंजनों में किया जाता है. कसूरी मेथी की मांग बाजार में बनी रहती है. ऐसे में किसान सही समय पर बुवाई, बेहतर बीज का चयन और उचित देखभाल करके फसल की गुणवत्ता सुधार सकते हैं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, नागौर क्षेत्र में मौसम और खेत की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बुवाई की योजना बनाना जरूरी है.
पूसा कसूरी किस्म का कर सकते हैं चयन
युवा उन्नत किसान अर्जुन चौधरी ने बताया कि कसूरी मेथी की खेती के लिए किसान पूसा कसूरी किस्म के बारे में जानकारी ले सकते हैं. यह बीज किसानों के लिए लाभ का सौदा हो सकता है. यह कसूरी मेथी की प्रचलित किस्मों में शामिल है. बीज खरीदते समय उसकी शुद्धता, अंकुरण क्षमता, पैकेट पर दी गई जानकारी और बीज की वैधता की जांच करना जरूरी है. किसानों को प्रमाणित स्रोत से ही बीज खरीदना चाहिए. इसके साथ ही कृषि विभाग या स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से क्षेत्र के अनुकूल किस्म, बीज दर और बुवाई की विधि की जानकारी लेनी चाहिए. इससे अनावश्यक बीज खर्च से बचने और फसल की अच्छी शुरुआत करने में मदद मिल सकती है.
खेत तैयार करते समय रखें इन बातों का ध्यान
किसान अर्जुन चौधरी ने बताया कि कसूरी पान मेथी की अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी महत्वपूर्ण है. बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बनाना चाहिए. खेत को समतल करने के साथ जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें, ताकि सिंचाई या बारिश के बाद पानी लंबे समय तक जमा न रहे. खेत में पानी भरने से बीज के अंकुरण और पौधों की बढ़वार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. मिट्टी की उर्वरता के अनुसार सड़ी हुई गोबर की खाद का इस्तेमाल किया जा सकता है. खाद और उर्वरकों की मात्रा मिट्टी की जांच तथा कृषि विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तय करना बेहतर रहता है.
सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण पर दें ध्यान
बुवाई के बाद खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखना जरूरी है. सिंचाई जरूरत के अनुसार करें और ध्यान रखें कि खेत में पानी जमा नहीं हो. पौधों के शुरुआती विकास के दौरान खरपतवार फसल की बढ़वार को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करके खरपतवार को नियंत्रित करना चाहिए. फसल में किसी प्रकार के कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर बिना जानकारी के कीटनाशक का इस्तेमाल करने के बजाय कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें.
अच्छी गुणवत्ता से मिल सकता है बेहतर बाजार