परीक्षा में AI इस्तेमाल कर सकेंगे छात्र? IIM के 78 स्टूडेंट्स ने एआई से दिए पेपर, जानिए नए नियम

परीक्षा में AI इस्तेमाल कर सकेंगे छात्र? IIM के 78 स्टूडेंट्स ने एआई से दिए पेपर, जानिए नए नियम


AI in Exams 2026: स्कूल-कॉलेजों में अब तक ChatGPT या दूसरे AI टूल्स से असाइनमेंट तैयार करने और परीक्षा में जवाब लिखने को लेकर सवाल उठते रहे हैं.कई शिक्षण संस्थानों में इसे नकल से जोड़कर देखा जाता रहा है लेकिन अब भारत के कुछ बड़े संस्थान इस सोच को बदल रहे हैं.IIM अहमदाबाद, IIM बेंगलुरु, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) और IISER पुणे जैसे संस्थान छात्रों को AI से दूर रखने के बजाय उसका सही इस्तेमाल सिखाने पर जोर दे रहे हैं.

सबसे दिलचस्प प्रयोग IIM बेंगलुरु में हुआ जहां 78 MBA छात्रों ने अपने AI चैटबॉट बनाए और उनसे मिडटर्म परीक्षा के सवालों के जवाब दिलवाए वहीं IISER पुणे में शिक्षकों की ओर से लिखित रोक नहीं होने पर AI का इस्तेमाल करने की अनुमति है हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि छात्र हर परीक्षा में ChatGPT से उत्तर लिख सकते हैं. संस्थान चाहते हैं कि AI छात्रों की मदद करे, लेकिन उनकी खुद सोचने, सवालों का विश्लेषण करने और फैसले लेने की क्षमता बनी रहे.

अब कॉलेजों में बदल रहे नियम

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI ने पढ़ाई के तरीके में बड़ा बदलाव किया है.पहले छात्रों को किसी विषय की जानकारी जुटाने के लिए किताबें, रिसर्च पेपर और दूसरे स्रोत पढ़ने पड़ते थे.अब ChatGPT, Gemini और दूसरे AI टूल्स की मदद से कुछ ही समय में किसी विषय की जानकारी, सारांश और शुरुआती विश्लेषण तैयार किया जा सकता है लेकिन इससे शिक्षकों के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है.अगर छात्र हर सवाल का जवाब AI से तैयार करवा लेंगे तो यह कैसे पता चलेगा कि उन्हें विषय की कितनी समझ है? इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए भारत और विदेश के कई बड़े शिक्षण संस्थान अपनी पढ़ाई और परीक्षा की व्यवस्था बदल रहे हैं.

इनमें IISER पुणे, IIM अहमदाबाद, IIM बेंगलुरु और ISB हैदराबाद व मोहाली शामिल हैं. विदेश में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न भी AI के इस्तेमाल को लेकर नए तरीके अपना रही हैं. इन संस्थानों का उद्देश्य छात्रों को AI पर पूरी तरह निर्भर बनाना नहीं है. वे चाहते हैं कि छात्र AI से मिली जानकारी की जांच करें, अपनी समझ का इस्तेमाल करें और स्वतंत्र रूप से निर्णय लेना सीखें.

IISER पुणे में AI इस्तेमाल करने की अनुमति

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च यानी IISER पुणे ने AI को लेकर एक अलग व्यवस्था लागू की है.यहां सामान्य नियम के तौर पर छात्रों को AI इस्तेमाल करने की अनुमति है हालांकि अगर किसी कोर्स के शिक्षक या PhD सुपरवाइजर ने लिखित रूप से AI के इस्तेमाल पर रोक लगाई है तो छात्र उसका उपयोग नहीं कर सकते.यह नीति मौजूदा सेमेस्टर में लागू की गई है.इसके तहत शिक्षक तय कर सकते हैं कि किसी विषय या असाइनमेंट में जनरेटिव AI का इस्तेमाल करना चाहिए या नहीं.यह फैसला उस कोर्स में छात्रों को क्या सिखाया जाना है इसके आधार पर लिया जाता है.इंडियन एक्‍सप्रेस में छपी रिपोर्ट में IISER पुणे की AI कमेटी के चेयरपर्सन प्रोफेसर सुतीर्थ डे के हवाले से कहा गया है कि कुछ शिक्षक छात्रों को स्पष्ट रूप से बताते हैं कि उन्हें किन कामों में AI इस्तेमाल करना है और किन कामों में नहीं.

रिसर्च प्रोजेक्ट बनाने के लिए AI की अनुमति

IISER पुणे में एक असाइनमेंट के दौरान छात्रों को रिसर्च प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए AI इस्तेमाल करने को प्रोत्साहित किया गया.इसका उद्देश्य छात्रों को यह सिखाना था कि वे AI की मदद से शोध की योजना कैसे बना सकते हैं.वहीं बायोइन्फॉर्मेटिक्स के एक कोर्स में छात्रों को डेटा एनालिसिस के लिए कंप्यूटर प्रोग्राम लिखने में AI इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई. बायोइन्फॉर्मेटिक्स में कंप्यूटर और डेटा की मदद से जैविक जानकारी का अध्ययन किया जाता है.इस विषय में कई बार छात्रों को जटिल प्रोग्रामिंग करनी पड़ती है.AI की मदद से प्रोग्राम तैयार होने पर छात्र डेटा के विश्लेषण और विषय की समझ पर ज्यादा ध्यान दे सकते हैं लेकिन इस प्रयोग में एक महत्वपूर्ण शर्त भी रखी गई.

असाइनमेंट में AI की छूट, परीक्षा में खुद हल करने पड़े सवाल

IISER पुणे में जिन छात्रों को बायोइन्फॉर्मेटिक्स के असाइनमेंट में AI से प्रोग्राम बनाने की अनुमति मिली.उन्हें परीक्षा में उसी तरह की समस्याएं बिना AI के हल करनी पड़ीं.इसका उद्देश्य यह देखना था कि छात्र वास्तव में विषय को समझते हैं या केवल AI की मदद से काम पूरा कर रहे हैं.संस्थान प्रोग्रामिंग करने की क्षमता और बायोइन्फॉर्मेटिक्स की समझ को अलग-अलग परखना चाहता है.यही वजह है कि IISER पुणे में AI की अनुमति होने के बावजूद ज्यादातर क्विज, मिड-सेमेस्टर और एंड-सेमेस्टर परीक्षाएं अब भी बिना AI के आयोजित की जाती हैं. इस व्यवस्था से साफ है कि AI का इस्तेमाल करने की अनुमति और परीक्षा में AI से जवाब लिखने की छूट एक ही बात नहीं है.

IIM में ChatGPT और Gemini से बदल रही पढ़ाई

देश के प्रतिष्ठित मैनेजमेंट संस्थान IIM अहमदाबाद में भी AI के कारण पढ़ाई का तरीका बदल रहा है.यहां मैनेजमेंट की पढ़ाई में लंबे समय से केस स्टडी का इस्तेमाल होता रहा है. केस स्टडी में छात्रों को किसी कंपनी या कारोबारी समस्या से जुड़ी स्थिति दी जाती है.छात्र उस स्थिति का अध्ययन करके समस्या समझते हैं और समाधान सुझाते हैं.अब ChatGPT और Gemini जैसे AI टूल्स की मदद से छात्र लंबी केस स्टडी का सारांश कुछ ही समय में तैयार कर सकते हैं.वे क्लास में आने से पहले संभावित समाधान और विश्लेषण भी तैयार कर सकते हैं लेकिन इससे एक नई समस्या सामने आई है.जब कई छात्र एक जैसे AI टूल्स का इस्तेमाल करते हैं तो उनके जवाब भी काफी हद तक एक जैसे होने लगते हैं.

IIM अहमदाबाद ने खरीदे 1500 AI टूल लाइसेंस

IIM अहमदाबाद के निदेशक प्रोफेसर भरत भास्कर के मुताबिक संस्थान ने क्लासरूम में पढ़ाने का तरीका बदला है.कई प्रोफेसर छात्रों को केस स्टडी का सारांश तैयार करने और क्लास में चर्चा की तैयारी के लिए AI टूल्स इस्तेमाल करने को प्रोत्साहित कर रहे हैं.इसके लिए संस्थान ने 1,500 AI टूल लाइसेंस खरीदे हैं.इनका इस्तेमाल छात्रों, शिक्षकों, रिसर्च एसोसिएट्स और अन्य संबंधित लोगों के लिए किया जाना है.संस्थान चाहता है कि छात्र केवल जानकारी का सारांश तैयार करने तक सीमित न रहें.इसके बजाय वे उस जानकारी का इस्तेमाल करके समस्याओं को समझें और समाधान निकालें यानी अब सवाल केवल यह नहीं है कि किसी कंपनी की केस स्टडी में क्या लिखा है.ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि छात्र उस जानकारी के आधार पर क्या फैसला लेते हैं और अपने फैसले को कैसे सही ठहराते हैं.

IIM में 78 MBA छात्रों ने AI चैटबॉट से दी परीक्षा

AI के इस्तेमाल को लेकर सबसे दिलचस्प प्रयोग IIM बेंगलुरु में हुआ है.फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक जून-जुलाई टर्म के दौरान 78 MBA छात्रों ने अपने AI चैटबॉट तैयार किए.इन छात्रों में कोर बिजनेस एनालिटिक्स और सामान्य MBA के इलेक्टिव कोर्स से जुड़े विद्यार्थी शामिल थे.छात्रों को जनरेटिव AI विषय की मिडटर्म परीक्षा के लिए चैटबॉट बनाने का काम दिया गया.इसके बाद इन चैटबॉट्स का इस्तेमाल परीक्षा के सवालों के जवाब देने के लिए किया गया हालांकि यह सामान्य परीक्षा में ChatGPT खोलकर जवाब लिखने की छूट नहीं थी.छात्रों को एक नियंत्रित व्यवस्था के तहत अपने चैटबॉट तैयार करने और उनकी क्षमता दिखाने का अवसर दिया गया था.

छात्रों ने खुद बनाए चैटबॉट

IIM बेंगलुरु के प्रोफेसर सुभब्रत मजूमदार ने इस प्रयोग के लिए एक विशेष टेस्टिंग प्लेटफॉर्म तैयार किया.यह प्लेटफॉर्म पासवर्ड से सुरक्षित था.इसे बनाने में AI की मदद से कोडिंग करने वाले टूल्स का इस्तेमाल किया गया.परीक्षा में छात्रों के चैटबॉट्स को केवल निर्धारित कोर्स सामग्री तक सीमित रखा गया.वे बाहर की वेबसाइटों या दूसरी जानकारी तक पहुंच नहीं सकते थे.इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि चैटबॉट उन्हीं विषयों और सामग्री के आधार पर जवाब दें, जो छात्रों को कोर्स में पढ़ाई गई थी.

परीक्षा से पहले एक महीने तक चैटबॉट की टेस्टिंग

IIM बेंगलुरु के इस प्रयोग में छात्रों को अपने चैटबॉट तैयार करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया.उन्हें करीब एक महीने तक अलग-अलग चैटबॉट मॉडल तैयार करने, उनकी जांच करने और उनमें सुधार करने का अवसर मिला.इसके बाद छात्रों ने मूल्यांकन के लिए अपना अंतिम चैटबॉट जमा किया.इस परीक्षा में केवल चैटबॉट का अंतिम जवाब महत्वपूर्ण नहीं था.यह भी देखा गया कि छात्रों ने AI को निर्देश देने का तरीका कितना सही चुना.इसके अलावा चैटबॉट की सेटिंग में किए गए बदलाव और कोर्स में पढ़ाए गए सिद्धांतों का इस्तेमाल भी मूल्यांकन का हिस्सा था.

बिना कोडिंग सीखे भी छात्र बना सके चैटबॉट

IIM बेंगलुरु के इस प्रयोग की एक खास बात यह थी कि इसमें छात्रों को कोडिंग का विशेषज्ञ होना जरूरी नहीं था.इसके लिए नो-कोड रीट्राइवल अगमेंटेड जनरेशन (Retrieval-Augmented Generation)यानी RAG आधारित व्यवस्था इस्तेमाल की गई.RAG ऐसी तकनीक है जिसमें AI को जवाब तैयार करने के लिए निर्धारित जानकारी या दस्तावेजों से सामग्री उपलब्ध कराई जाती है.इस प्रयोग में चैटबॉट्स को कोर्स सामग्री से जोड़ा गया था.
नो-कोड व्यवस्था होने से ऐसे छात्र भी इसमें भाग ले सके जिनकी कोडिंग की पृष्ठभूमि नहीं थी. इससे परीक्षा में केवल प्रोग्रामिंग जानने वाले छात्रों को अतिरिक्त फायदा मिलने की संभावना कम हुई.संस्थान का उद्देश्य यह जांचना था कि छात्र AI को कितनी अच्छी तरह इस्तेमाल कर सकते हैं और पढ़ाए गए विषय को कितना समझते हैं.

ISB हैदराबाद और मोहाली में शिक्षकों को छूट

इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस यानी ISB ने AI को लेकर सभी कोर्स के लिए एक जैसा प्रतिबंध लगाने का तरीका नहीं अपनाया है.ISB के हैदराबाद और मोहाली कैंपस में अलग-अलग कोर्स के शिक्षक AI इस्तेमाल करने के नियम तय कर सकते हैं.किसी असाइनमेंट में AI इस्तेमाल करने की अनुमति दी जा सकती है.किसी ग्रुप प्रोजेक्ट में इसका इस्तेमाल सीमित किया जा सकता है वहीं किसी कोर्स या रिसर्च से जुड़े काम में AI के इस्तेमाल पर रोक भी लगाई जा सकती है.इस तरह AI का इस्तेमाल किस सीमा तक होगा इसका फैसला संबंधित शिक्षक और पढ़ाई के उद्देश्य के आधार पर किया जाता है.

ISB में AI से तैयार हो रहे वर्चुअल ट्यूटर

ISB के सेंटर फॉर लर्निंग एंड टीचिंग एक्सीलेंस और LAB-ऑफिस ऑफ एक्सपीरिएंशियल लर्निंग के अकादमिक डायरेक्टर प्रोफेसर विशाल करुंगुलम के मुताबिक संस्थान छात्रों को ऐसे कार्यस्थलों के लिए तैयार करना चाहता है जहां जनरेटिव AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी से AI इस्तेमाल करना और सही निर्णय लेना भी जरूरी है. ISB के शिक्षक कई नए प्रयोग कर रहे हैं. इनमें इंटरैक्टिव AI सिमुलेशन छात्रों के लिए व्यक्तिगत AI ट्यूटर और बिजनेस केस के प्रमुख पात्रों पर आधारित AI साथी शामिल हैं. इनकी मदद से छात्र किसी कारोबारी स्थिति को अलग-अलग नजरिए से समझ सकते हैं.वे AI से सवाल पूछ सकते हैं और संभावित परिस्थितियों पर चर्चा कर सकते हैं लेकिन इन टूल्स का उद्देश्य छात्रों को सीधे तैयार जवाब देना नहीं है.

ISB ने असाइनमेंट का तरीका भी बदला

AI के कारण ISB अपने असाइनमेंट की व्यवस्था में भी बदलाव कर रहा है.अब केवल डेटा इकट्ठा करने और जानकारी लिखने के बजाय समस्या को सही तरीके से समझने, अलग-अलग तथ्यों को जोड़ने और फैसला लेने की क्षमता पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है.छात्रों से अपेक्षा की जाती है कि वे AI से मिले सुझावों को बिना जांचे स्वीकार न करें.उन्हें AI के जवाबों की तुलना विशेषज्ञों की समीक्षा से प्रकाशित रिसर्च और स्थापित सिद्धांतों से करनी होती है.इसके अलावा क्लास में आमने-सामने चर्चा और केस स्टडी पर अपने फैसलों का बचाव करने जैसी गतिविधियों का इस्तेमाल किया जाता है.इनसे यह समझने में मदद मिलती है कि छात्र खुद कितना सोच सकते हैं.ISB में अनुभव के आधार पर सीखने और कंपनियों के साथ बातचीत करने के अवसर भी दिए जाते हैं.इन गतिविधियों में छात्रों को वास्तविक कारोबारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिनमें हमेशा एक ही सही जवाब नहीं होता.

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में भी बदल रहे AI के नियम

AI को लेकर बदलाव केवल भारत के संस्थानों तक सीमित नहीं हैं.अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में भी AI इस्तेमाल करने के नियमों में बदलाव आया है.छात्र समाचारपत्र द हार्वर्ड क्रिमसन ने हार्वर्ड कॉलेज के 20 लोकप्रिय कोर्स का विश्लेषण किया.इसमें सामने आया कि 2025 के फॉल सेमेस्टर तक लगभग सभी कोर्स में AI इस्तेमाल करने को लेकर कोई न कोई नीति लागू हो चुकी थी वहीं 2022 के फॉल सेमेस्टर से पहले इन कोर्स में ऐसी नीतियां नहीं थीं.इससे पता चलता है कि कुछ ही वर्षों में AI उच्च शिक्षा की व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है.

24% शिक्षकों ने AI पर पूरी रोक का समर्थन किया

द हार्वर्ड क्रिमसन की ओर से प्रकाशित फैकल्टी सर्वे में AI को लेकर शिक्षकों की अलग-अलग राय सामने आई.सर्वे में शामिल 34 प्रतिशत शिक्षकों ने कड़ी पाबंदियों के साथ AI इस्तेमाल करने की अनुमति दी वहीं 35 प्रतिशत शिक्षकों ने कुछ प्रतिबंधों के साथ AI इस्तेमाल करने की अनुमति दी.इसके अलावा 24 प्रतिशत शिक्षकों ने AI के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाई.पिछले साल यह आंकड़ा 20 प्रतिशत था.इसका मतलब है कि AI पर पूरी रोक लगाने वाले शिक्षकों की हिस्सेदारी बढ़ी.दूसरी ओर केवल 4 प्रतिशत शिक्षकों ने बिना किसी प्रतिबंध के AI इस्तेमाल करने की अनुमति दी.



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