Rising Bharat Summit : छोटे शहरों के दुकानदारों से बढ़ेगा कर्ज का कारोबार, PhonePe की नजर इस बड़े मौके पर

Rising Bharat Summit : छोटे शहरों के दुकानदारों से बढ़ेगा कर्ज का कारोबार, PhonePe की नजर इस बड़े मौके पर


Rising Bharat Summit: भारत में कर्ज कारोबार की अगली बड़ी वृद्धि छोटे शहरों के दुकानदारों और ऐसे ग्राहकों से आ सकती है, जिनकी अब तक बैंकों और वित्तीय संस्थानों तक पहुंच सीमित रही है. PhonePe Lending के सीईओ हेमंत गाला ने 28 अक्टूबर को मुंबई में आयोजित Rising Bharat Summit में यह बात कही. उनके मुताबिक, डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल से छोटे कारोबारियों तक पहुंच बनाना आसान हो रहा है. अब कर्ज देने वाली कंपनियों को अपने पुराने ग्राहक वर्ग से आगे बढ़कर उन लोगों तक पहुंचना होगा, जिन्हें औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से पर्याप्त वित्तीय मदद नहीं मिल पाती.

गाला ने कहा कि डिजिटल लेंडिंग यानी डिजिटल माध्यम से कर्ज देने के कारोबार में नियामकीय स्थिति पहले के मुकाबले ज्यादा स्पष्ट हुई है. वहीं, बिना गारंटी वाले कर्ज यानी अनसिक्योर्ड लोन की तेज वृद्धि को लेकर चिंताएं भी कुछ कम हुई हैं. उनके मुताबिक, इस तरह के कर्ज की वृद्धि दर पहले करीब 25 फीसदी थी, जो अब घटकर 13 से 15 फीसदी के आसपास आ गई है. हालांकि, अनसिक्योर्ड लोन अभी भी बाजार का बड़ा हिस्सा हैं. आगे कारोबार बढ़ाने के लिए वित्तीय संस्थानों को नए ग्राहक खोजने और छोटे कारोबारियों की कर्ज जरूरतों को समझने पर ध्यान देना होगा.

15 फीसदी ऐसे दुकानदार ज‍िन्‍होंने कभी कर्ज नहीं ल‍िया

PhonePe Lending के ग्राहकों में करीब 15 फीसदी ऐसे दुकानदार हैं, जिन्होंने पहले कभी औपचारिक कर्ज नहीं लिया था. गाला के मुताबिक, ऐसे कारोबारियों को कर्ज देने में बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी एनबीएफसी के सामने चुनौती यह होती है कि उनके पास कर्ज चुकाने की क्षमता का आकलन करने के लिए पर्याप्त जानकारी नहीं होती. ऐसे मामलों में PhonePe डिफॉल्ट लॉस गारंटी यानी डीएलजी का इस्तेमाल करता है. यह एक ऐसा समझौता है, जिसके तहत कर्ज वितरण से जुड़ी कंपनी तय शर्तों के अनुसार कर्ज में चूक से होने वाले नुकसान का सीमित हिस्सा वहन करती है. इससे कर्ज देने वाले संस्थानों का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है.

तीन साल में बांटे 47 लाख कर्ज

गाला ने बताया कि PhonePe Lending ने पिछले तीन वर्षों में 47 लाख कर्ज वितरित किए हैं. कंपनी अब अपने बड़े डिजिटल नेटवर्क और भुगतान सेवाओं के जरिये कर्ज देने वाले वित्तीय संस्थानों को ऐसे ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है, जिनकी औपचारिक क्रेडिट हिस्ट्री सीमित है. भारत के सूक्ष्म कारोबारियों यानी माइक्रो-मर्चेंट्स के बीच इस अवसर की काफी गुंजाइश है. गाला के मुताबिक, ये कारोबारी देश के एमएसएमई आधार का 90 फीसदी से ज्यादा हिस्सा हैं, लेकिन इसके बावजूद इन्हें औपचारिक वित्तीय संस्थानों से कर्ज हासिल करने में अक्सर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

सभी कारोबार‍ियों की जरूरतें एक जैसी नहीं

गाला ने कहा कि छोटे कारोबारियों की कर्ज जरूरतें एक जैसी नहीं होतीं. किसी दुकानदार को दुकान में सामान भरने या कारोबार चलाने के लिए वर्किंग कैपिटल की जरूरत हो सकती है, जबकि किसी दूसरे कारोबारी को व्यवसाय के विस्तार या निजी जरूरतों के लिए पैसा चाहिए हो सकता है. उन्होंने सड़क किनारे दुकान लगाने वाले ऐसे विक्रेताओं का उदाहरण दिया, जो कई वर्षों से एक ही जगह कारोबार कर रहे हैं, लेकिन फिर भी औपचारिक कर्ज तक उनकी पहुंच नहीं है. गाला के अनुसार, ऐसे कारोबारी शुरुआत में औपचारिक कर्ज व्यवस्था से अनजान हो सकते हैं, लेकिन अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में उनकी दिलचस्पी रहती है.

60 करोड़ ग्राहक, 5 करोड़ कारोबारी

PhonePe के प्लेटफॉर्म पर करीब 60 करोड़ ग्राहक और 5 करोड़ व्यापारी हैं. कंपनी अपने भुगतान नेटवर्क के जरिये कर्ज देने वाले साझेदारों को ग्राहकों की पहचान और उनकी वित्तीय स्थिति का आकलन करने में मदद करना चाहती है. इसके लिए वह अपने साझेदारों के साथ काम करती है और कर्ज के योग्य ग्राहक वर्गों की पहचान करने में मददगार डेटा साझा करती है. कंपनी ने हाल ही में खासकर ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में यूपीआई से भुगतान स्वीकार करने की सुविधा बढ़ाने के लिए करीब 20,000 अतिरिक्त टर्मिनल लगाने की योजना की घोषणा की थी. गाला के मुताबिक, डिजिटल भुगतान का विस्तार छोटे कारोबारियों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने के साथ कर्ज और बीमा जैसी सेवाओं की मांग भी बढ़ा सकता है.



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