अमेरिकी संसद में समोसा कहां से आया? भारतीय मूल के सांसदों को क्यों कहते हैं Samosa Caucus, मकसद क्या

अमेरिकी संसद में समोसा कहां से आया? भारतीय मूल के सांसदों को क्यों कहते हैं Samosa Caucus, मकसद क्या


अमेरिकी संसद में कौन-कौन हैं समोसा कॉकस के सदस्य?
जनवरी 2025 में अमेरिका की 119वीं कांग्रेस के शपथ ग्रहण के बाद प्रतिनिधि सभा में भारतीय मूल के छह सांसद हो गए थे. यह उस समय अमेरिकी इतिहास में भारतीय-अमेरिकी प्रतिनिधित्व की रिकॉर्ड संख्या थी. इनमें सभी डेमोक्रेटिक पार्टी से हैं. अमेरिका में 2025 में गठित 119वीं कांग्रेस के आधार पर समोसा कॉकस में कौन-कौन शामिल हैं? आइए गौर फरमाते हैं.

2026 के अमेरिकी चुनाव में क्यों चर्चा में है समोसा कॉकस?
अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को मिड टर्म चुनाव होने हैं. इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों के लिए मतदान होगा. इस बार समोसा कॉकस की चर्चा केवल भारतीय मूल के नेताओं की बढ़ती राजनीतिक मौजूदगी को लेकर नहीं, बल्कि इसकी सदस्य संख्या में संभावित कमी को लेकर भी हो रही है. ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक इस समय प्रतिनिधि सभा में समोसा कॉकस के 6 सदस्य हैं. हालांकि इनमें दो नेता ऐसे हैं, जिनके चुनावी घटनाक्रम ने सवाल खड़े कर दिए हैं.

क्या समोसा कॉकस में फिर से 6 सांसद हो सकते हैं?
मौजूदा छह सदस्यों में से चार सांसद दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं. इनमें अमी बेरा, रो खन्ना, प्रमिला जयपाल और सुहास सुब्रमण्यम शामिल हैं. इसके अलावा डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अमीश शाह एरिजोना और पिया दांडिया फ्लोरिडा से चुनाव मैदान में हैं. अब अगर अमीश शाह और पिया दांडिया दोनों जीते तो संख्या 6 हो सकती है. दोनों में से कोई एक जीते तो 5 तक और अगर दोनों हार जाएं तो 4 तक नंबर पहुंच सकता है.

पीएम मोदी ने अमेरिकी संसद में क्यों किया था समोसा कॉकस का जिक्र?
22 जून 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी कांग्रेस के जॉइंट सेशन को संबोधित किया था. अपने भाषण में उन्होंने भारतीय मूल के अमेरिकियों की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए समोसा कॉकस का जिक्र किया. पीएम मोदी ने कहा था कि उन्हें बताया गया है कि समोसा कॉकस अब सदन में लोकप्रिय हो रहा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समूह बढ़ेगा और भारतीय व्यंजनों की डायवर्सिटी भी अमेरिकी संसद तक पहुंचेगी. उनके इस बयान में भारतीय मूल के नेताओं के बढ़ते प्रतिनिधित्व की ओर ध्यान दिलाया गया था.

इसका जिक्र इसलिए भी खास था क्योंकि भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक केवल कारोबार, तकनीक और शिक्षा के क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि अमेरिकी राजनीति में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं.

क्या समोसा कॉकस के सभी सांसद भारत के पक्ष में वोट करते हैं?
यह समझना जरूरी है कि भारतीय मूल का होने का मतलब यह नहीं है कि सभी सांसद हर मुद्दे पर एक जैसी राय रखते हैं. समोसा कॉकस के सदस्य अमेरिकी चुनाव क्षेत्रों से चुने जाते हैं और उनकी पहली संवैधानिक जिम्मेदारी अपने अमेरिकी मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करना है. उनकी राजनीतिक प्राथमिकताएं आव्रजन, स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार, कर व्यवस्था, तकनीक, विदेश नीति और दूसरे घरेलू मुद्दों पर अलग-अलग हो सकती हैं.

भारतीय मूल के होने के कारण भारत से जुड़े मुद्दों पर उनकी राय में समानता हो सकती है, लेकिन इसे एक तय राजनीतिक रुख नहीं माना जा सकता. इसी तरह, समोसा कॉकस को भारत सरकार का आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल या भारत के हितों के लिए बना संगठन समझना भी गलत होगा. यह अमेरिकी राजनीति में भारतीय-अमेरिकी रिप्रजेंटेशन को पहचान देने वाला अनऑफिशियल नाम है.

अमेरिकी राजनीति में भारतीय असर
भारतीय मूल के अमेरिकियों का अमेरिकी कांग्रेस तक पहुंचने का इतिहास समोसा कॉकस से काफी पुराना है. डेमोक्रेटिक पार्टी के दलीप सिंह सौंद 1957 में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुने गए थे. इसके बाद रिपब्लिकन नेता बॉबी जिंदल ने 2005 में कांग्रेस में प्रवेश किया. 2012 में अमी बेरा के चुनाव के बाद प्रतिनिधि सभा में भारतीय मूल के नेताओं की मौजूदगी बढ़ने लगी. 2017 में रो खन्ना, प्रमिला जयपाल और राजा कृष्णमूर्ति चुने गए. 2023 में श्री थानेदार और 2024 के चुनाव में सुहास सुब्रमण्यम की जीत ने यह संख्या 6 तक पहुंचा दी.

इस बदलाव की अहमियत केवल सांसदों की संख्या तक सीमित नहीं है. यह अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की राजनीतिक भागीदारी और चुनाव लड़ने की बढ़ती क्षमता को भी दिखाता है. हालांकि किसी समुदाय का राजनीतिक प्रभाव केवल उसके नेताओं की संख्या से तय नहीं होता. चुनावों में मतदान, स्थानीय मुद्दों पर सक्रियता और अलग-अलग समुदायों के साथ गठबंधन भी अहम भूमिका निभाते हैं.

समोसे से आगे पहचान की कहानी
समोसा कॉकस नाम सुनने में भले ही हल्का-फुल्का लगे, लेकिन इसके पीछे अमेरिकी लोकतंत्र में भारतीय मूल के लोगों की बढ़ती भागीदारी की कहानी है. 2018 के आसपास लोकप्रिय हुए इस नाम ने भारतीय-अमेरिकी सांसदों को एक साझा पहचान दी. 2025 में 6 सदस्यों तक पहुंचने वाला यह समूह अब 2026 के मध्यावधि चुनावों में अपनी संख्या को लेकर चर्चा में है.

3 नवंबर के चुनाव यह तय करेंगे कि प्रतिनिधि सभा में भारतीय मूल के सांसदों की संख्या कितनी रहती है. लेकिन इस चुनाव का महत्व केवल समोसा कॉकस के आंकड़े तक सीमित नहीं होगा. यह भी देखा जाएगा कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय अमेरिकी राजनीति में अपनी भागीदारी और प्रभाव को किस तरह आगे बढ़ाता है.



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