FATF में फंसेगा पाकिस्तान, तालिबान का दांव बना भारत का हथियार, मसूद अजहर पर कैसे घिरेगा इस्लामाबाद?

FATF में फंसेगा पाकिस्तान, तालिबान का दांव बना भारत का हथियार, मसूद अजहर पर कैसे घिरेगा इस्लामाबाद?


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तालिबान के एक दांव से PAK की घेराबंदी, FATF में भारत को कैसे मिलेगा फायदा?

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FATF की 28 से 30 अक्टूबर तक पेरिस में होने वाली बैठक में भारत पाकिस्तान के सामने मसूद अजहर का मुद्दा उठा सकता है. भारत का आरोप है कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा. इस बीच तालिबान ने पाकिस्तान के उस दावे को खारिज किया कि जैश-ए-मोहम्मद का सरगना अजहर अफगानिस्तान में है. भारतीय पक्ष इस विरोधाभास को पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए अहम मान रहा है. पाकिस्तान 2018 से 2022 तक FATF की ग्रे लिस्ट में रहा था. अब नजर इस बात पर है कि बैठक में भारत की दलील पर क्या चर्चा होती है और पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी प्रयासों पर क्या रुख सामने आता है.

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FATF की पेरिस बैठक में भारत पाकिस्तान से मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई के सबूत मांग सकता है. (फाइल फोटो)

पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने के लिए भारत को अब तालिबान के एक बयान से नया आधार मिल गया है. मामला आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर का है. भारत का आरोप है कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र की सूची में शामिल आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने में दोहरा रवैया अपना रहा है. अब 28 से 30 अक्टूबर तक पेरिस में होने वाली FATF की बैठक में भारत इस मुद्दे को उठा सकता है. सूत्रों के मुताबिक भारत का जोर इस बात पर रहेगा कि पाकिस्तान ने मसूद अजहर के खिलाफ ठोस कार्रवाई के सबूत नहीं दिए हैं. ऐसे में सवाल है कि तालिबान के बयान से पाकिस्तान की मुश्किलें कैसे बढ़ सकती हैं और FATF में भारत की रणनीति क्या होगी?

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में पेच पाकिस्तान के उस दावे से जुड़ा है जिसमें कहा गया था कि मसूद अजहर 2019 से अफगानिस्तान में है. तालिबान के प्रवक्ता जिया अहमद थाकल ने सितंबर में इस दावे को खारिज करते हुए कहा था कि अजहर अफगानिस्तान में नहीं है. उन्होंने यह भी कहा था कि पाकिस्तान की ओर से उसकी मौजूदगी को लेकर कोई औपचारिक संवाद नहीं किया गया. भारत इसी विरोधाभास को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की तैयारी में है. सूत्रों के मुताबिक भारतीय पक्ष ने बैठक से पहले सहयोगी देशों के राजनयिकों और FATF के प्रमुख सदस्यों से संपर्क भी किया है. हालांकि बैठक में क्या फैसला होगा और पाकिस्तान पर कोई नई कार्रवाई होगी या नहीं यह अभी तय नहीं है.

तालिबान के बयान से पाकिस्तान पर सवाल

भारत की दलील का अहम हिस्सा यही है कि पाकिस्तान मसूद अजहर की मौजूदगी अफगानिस्तान में बताता रहा है जबकि तालिबान ने इस दावे को नकार दिया. इससे अजहर के ठिकाने और उसके खिलाफ पाकिस्तान की कार्रवाई पर सवाल उठते हैं. भारत चाहता है कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकियों के खिलाफ ठोस कदम उठाए. नई दिल्ली ने पहले भी पाकिस्तान से कहा था कि वह अपनी जमीन पर सक्रिय प्रतिबंधित आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करे और केवल इनाम घोषित करने जैसे दिखावटी कदमों तक सीमित न रहे.

FATF की बैठक में क्या होगा?

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी FATF मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था है. 28 से 30 अक्टूबर तक पेरिस में होने वाली बैठक में पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी प्रयासों की समीक्षा भी अहम मुद्दा हो सकती है. सूत्रों के मुताबिक भारत मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई के सबूतों की कमी को उठाने की तैयारी में है. बैठक में शामिल प्रतिनिधि वैश्विक वित्तीय सुरक्षा और बदलते खतरों पर चर्चा करेंगे. लेकिन भारत के मुद्दे पर कोई औपचारिक निर्णय होगा या नहीं इसकी अभी पुष्टि नहीं है.

पहले भी ग्रे लिस्ट में रह चुका है पाकिस्तान

पाकिस्तान 2018 से 2022 तक FATF की ग्रे लिस्ट में रहा था. उस दौरान उस पर आतंकवाद के लिए फंड जुटाने और अवैध वित्तीय लेनदेन रोकने में कमियां होने की बात कही गई थी. जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े वित्तीय नेटवर्क भी चिंता का विषय रहे. ग्रे लिस्ट से बाहर आने के बाद भी पाकिस्तान की निगरानी एशिया-पैसिफिक ग्रुप के जरिए जारी रही. इसमें मसूद अजहर से जुड़े आतंक वित्तपोषण मामले पर कार्रवाई भी शामिल रही है.

मसूद अजहर भारत के लिए क्यों अहम मुद्दा है?

मसूद अजहर भारत में कई बड़े आतंकी हमलों के मामलों में वांछित है. इनमें 2001 के संसद हमले, 2016 के पठानकोट एयरबेस हमले और 2019 के पुलवामा हमले से जुड़े आरोप शामिल हैं. 1999 में IC-814 विमान अपहरण के बाद भारत ने यात्रियों की रिहाई के बदले अजहर समेत तीन आतंकियों को छोड़ा था. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मई 2019 में उसे वैश्विक आतंकी घोषित किया था. भारत अब चाहता है कि पाकिस्तान उसके खिलाफ वास्तविक कार्रवाई के प्रमाण दे. FATF में इस मुद्दे को उठाने से इस्लामाबाद पर कूटनीतिक दबाव बढ़ सकता है.



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