गाजीपुरः गाजीपुर को ऋषियों की तपोभूमि कहा जाता है, यहां ज्ञान और साहित्य की परंपरा को आगे बढ़ाने में पुस्तकालयों की भी अहम भूमिका रही है. शहर में कपूरपुर सिटी इंटर कॉलेज के पास स्थित जिला लाइब्रेरी इसका एक उदाहरण है. करीब चार दशक पुरानी इस लाइब्रेरी में लगभग 14 हजार किताबें उपलब्ध हैं. खास बात यह है कि यहां पाठक निःशुल्क अध्ययन कर सकते हैं और 500 रुपये की सिक्योरिटी राशि देकर लाइफटाइम मेंबरशिप भी ले सकते हैं.
लाइब्रेरी से जुड़े अजय सिंह के मुताबिक, इसकी शुरुआत लगभग 1987 में हुई थी. इसके बाद 1995 में इसे नए तरीके से तैयार किया गया. वर्तमान में यहां करीब 400 पाठक जुड़े हुए हैं. लाइब्रेरी में उपन्यासों से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं, विभिन्न पाठ्यक्रमों, शोध और कानून से संबंधित किताबें उपलब्ध हैं. इसके अलावा यहां 25 मासिक पत्रिकाएं और सात समाचार पत्र भी पाठकों के लिए रखे जाते हैं.
तीन साल पहले हुआ रेनोवेशन, डिजिटल लाइब्रेरी बनाने की तैयारी
जिला लाइब्रेरी का करीब तीन साल पहले नवीनीकरण कराया गया था. इसके बाद यहां पाठकों की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया. लाइब्रेरी में वाई-फाई, ब्रॉडबैंड, स्वच्छ पेयजल और आरओ की सुविधा उपलब्ध है. पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग शौचालय भी बनाए गए हैं.यहां सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक अध्ययन किया जा सकता है. लाइब्रेरी में किताबों का कैटलॉग ऑनलाइन करने की प्रक्रिया भी चल रही है. अजय सिंह के मुताबिक, आगे इसे डिजिटल लाइब्रेरी के रूप में विकसित करने की योजना है, जिससे पाठकों को किताबों और अध्ययन सामग्री तक पहुंच बनाने में और सहूलियत मिल सके.
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए मददगार
लाइब्रेरी में आने वाले विद्यार्थियों के लिए इसका शांत वातावरण और किताबों की उपलब्धता महत्वपूर्ण है. चीतनाथ घाट क्षेत्र से आने वाले शुभम एक विद्यार्थी ने बताया कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं.यहां एसएससी समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित किताबें उपलब्ध हैं, जिससे तैयारी में मदद मिलती है. सीएसआईआर नेट-जेआरएफ की तैयारी कर रहीं प्रज्ञा पिछले करीब एक साल से यहां आ रही हैं. उन्होंने बताया कि लाइब्रेरी की सबसे अच्छी बात इसकी कम लागत वाली सदस्यता और शांत माहौल है.उनके मुताबिक, यहां दूसरे विद्यार्थियों को पढ़ते देखकर खुद भी पढ़ने की प्रेरणा मिलती है। वाटर कूलर जैसी सुविधाएं भी उनके लिए उपयोगी हैं. सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे अनिल यादव ने बताया कि लाइब्रेरी में इंटरनेट की सुविधा से उन्हें पढ़ाई में मदद मिलती है. वह रोजाना करीब पांच से छह घंटे पढ़ाई करते हैं और सुबह 10 बजे लाइब्रेरी पहुंच जाते हैं.
अखबार पढ़ने के लिए भी पहुंचते हैं वरिष्ठ नागरिक
लाइब्रेरी सिर्फ विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है. करीब 60 वर्षीय संतोष यहां समय मिलने पर अखबार पढ़ने आते हैं. उन्होंने बताया कि यहां अमर उजाला, दैनिक जागरण समेत कई हिंदी समाचार पत्र उपलब्ध हैं. उनके मुताबिक, लाइब्रेरी का शांत माहौल और लोगों का सहयोगी व्यवहार इसे खास बनाता है.
पुरानी लाइब्रेरी, नई उम्मीदें
करीब चार दशक के सफर में यह लाइब्रेरी विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों, शोधार्थियों और समाचार पत्र पढ़ने के शौकीनों के लिए उपयोगी स्थान बनी हुई है. लगभग 14 हजार किताबों, इंटरनेट और अन्य सुविधाओं के साथ अब इसे डिजिटल लाइब्रेरी के रूप में विकसित करने की तैयारी है. ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ऑनलाइन कैटलॉग और डिजिटल संसाधनों के विस्तार से पाठकों को कितनी अतिरिक्त सुविधा मिलती है.