Ground Report: केबल स्टे ब्रिज, सड़क पर प्लास्टिक का इस्तेमाल, MP की सबसे बड़ी रिंग रोड की खूबियां चौंका देंगी!

Ground Report: केबल स्टे ब्रिज, सड़क पर प्लास्टिक का इस्तेमाल, MP की सबसे बड़ी रिंग रोड की खूबियां चौंका देंगी!


Last Updated:

Jabalpur Ring Road News: जबलपुर रिंग रोड मेगा प्रोजेक्ट पर करीब 3,540 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. कुल 114 किलोमीटर लंबी इस रिंग रोड के बन जाने से शहर के बाहर-बाहर ही भारी वाहनों की आवाजाही हो जाएगी, जिससे शहर के भीतर ट्रैफिक का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा. इस रिपोर्ट में देखिए रिंग रोड का काम कहां तक पहुंचा और कब हो जाएगी तैयार…

Jabalpur News: महाकौशल की रफ्तार को चार चांद लगाने वाले बहुप्रतीक्षित रिंग रोड प्रोजेक्ट का काम अंतिम चरणों में पहुंच चुका है. अगर आप भी जबलपुर की सड़कों पर लगने वाले जाम से परेशान हैं, तो अब आपका सफर जल्द ही बेहद आसान होने वाला है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने रिंग रोड का 80 फीसदी काम पूरा कर लिया है. अफसरों की मानें तो अगले 12 महीने यानी अक्टूबर 2027 तक यह रिंग रोड पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगी और इस पर गाड़ियां सरपट दौड़ती नजर आएंगी.

दरअसल, इस मेगा प्रोजेक्ट पर करीब 3,540 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. कुल 114 किलोमीटर लंबी इस रिंग रोड के बन जाने से जबलपुर शहर के बाहर-बाहर ही भारी वाहनों की आवाजाही हो जाएगी, जिससे शहर के भीतर ट्रैफिक का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा. इस पूरे प्रोजेक्ट को अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है. इसके अलावा रिंग रोड बनाने में NHAI विशेष तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है, जो हैरान करने वाली है. आखिर किस तरह से बन रही मध्य प्रदेश की पहली सबसे लंबी रिंग रोड देखिए ग्राउंड रिपोर्ट…

पांच चरणों में तैयार हो रही रिंग रोड
पांच चरणों में बन रही रिंग रोड को अलग-अलग हिस्सों में बनाया जा रहा है. इसमें रोड से लेकर केबल स्टे ब्रिज, रेल ओवर ब्रिज सहित सर्विस रोड शामिल हैं.

1. बरेला से मानेगांव तक रिंग रोड के 16.150 km हिस्से में 93% काम पूरा हो चुका है, जिसे जल्द ही जनता के लिए खोल दिया जाएगा.
2. मानेगांव से NH-45 (भेड़ाघाट रेलवे स्टेशन) तक: 20.125 km लंबे रिंग रोड के रूट का 79% काम पूरा हो चुका है.
3. NH-45 से कुशनेर तक: 36.305 km के दायरे में 88% काम पूरा कर लिया गया है.
4. कुशनेर से अमझर तक: 23.470 km लंबे हिस्से का 83% काम हो चुका है.
5. अमझर से बरेला: 17.875 किमी के इस आखिरी हिस्से में अभी 32% काम हुआ है, जिस पर तेजी से काम जारी है.

सड़क पर कचरे का इस्तेमाल और नर्मदा पर ब्रिज
इस रिंग रोड की सबसे खास बात ये कि इसकी सर्विस रोड के निर्माण में वेस्ट प्लास्टिक मतलब कचरे का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जो पर्यावरण के लिए एक बेहतरीन पहल है. इसके अलावा, नर्मदा नदी पर बरेला से मानेगांव के बीच बनने वाला अत्याधुनिक केबल स्टे ब्रिज इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा आकर्षण होगा. 1020 मीटर लंबे इस भव्य ब्रिज पर चलना सैलानियों के लिए भी एक अलग अनुभव होगा. इसमें 600 मीटर हिस्सा केबल स्टे शामिल हैं.



Source link