Aviation News: दिल्ली समेत देश के कोहरे से प्रभावित रहने वाले एयरपोर्ट्स पर सर्दियों में फ्लाइट ऑपरेशंस को बेहतर बनाए रखने के लिए सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है. सर्दियों में कोहरे के चलते फ्लाइट लेट होने, कैंसिल होने और डिपार्चर टाइम बदलने से यात्रियों को काफी परेशानी होती है. इस बार सरकार का फोकस ऐसी परेशानियों को कम करने और यात्रियों को समय पर सही जानकारी देने पर है.
इसी तैयारी के तहत सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने 27 अक्टूबर को विंटर सीजन 2026-27 के लिए पहली फॉग प्रिपेयर्डनेस मीटिंग की. सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के सेक्रेटरी समीर कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में हुई इस मीटिंग में डीजीसीए, एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई), बीसीएएस, सीआईएसएफ, इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (आईएमडी), दिल्ली एयरपोर्ट, कोहरे से प्रभावित दूसरे एयरपोर्ट्स और एयरलाइंस के अधिकारी शामिल हुए.
15 दिसंबर से 15 फरवरी तक रहेगा कोहरे का सीजन
- मीटिंग में आईएमडी के अधिकारियों ने बताया कि इस बार फॉग सीजन 15 दिसंबर 2026 से 15 फरवरी 2027 तक रहने की उम्मीद है. ऐसे में एयरपोर्ट पर फ्लाइट ऑपरेशंस को सुचारू रखने के लिए पहले से सभी जरूरी इंतजाम करने पर जोर दिया गया.
- सरकार ने साफ किया कि कोहरे के दौरान फ्लाइट की सेफ्टी से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. साथ ही, फ्लाइट में देरी, कैंसिलेशन या रीशेड्यूलिंग होने पर यात्रियों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए सभी एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा.
- मीटिंग में एयरलाइंस को निर्देश दिया गया कि फ्लाइट में देरी, कैंसिलेशन या डिपार्चर टाइम में बदलाव होने पर यात्रियों को समय रहते जानकारी दी जाए. इसके लिए एसएमएस, मोबाइल ऐप और ईमेल का इस्तेमाल करने को कहा गया है.
- इसका मकसद यह है कि यात्रियों को एयरपोर्ट पहुंचने से पहले ही अपनी फ्लाइट का लेटेस्ट स्टेटस पता चल जाए. उन्हें बिना सही जानकारी के एयरपोर्ट पहुंचकर घंटों इंतजार न करना पड़े.
- एयरलाइंस को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि लो विजिबिलिटी में फ्लाइट ऑपरेट करने के लिए क्वालिफाइड क्रू और जरूरी नियमों का पालन करने वाले एयरक्राफ्ट उपलब्ध रहें. फ्लाइट शेड्यूल भी वास्तविक हालात को ध्यान में रखकर बनाया जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर समय पर फैसला लिया जा सके.
रनवे से लेकर एटीसी तक, हर स्तर पर तैयारी
एएआई और एयरपोर्ट ऑपरेटर्स को इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) और रनवे विजुअल रेंज (आरवीआर) जैसे सिस्टम की तैयारी जांचने के निर्देश दिए गए हैं. कम विजिबिलिटी में इन सिस्टम की मदद से पायलट्स को लैंडिंग में सहायता मिलती है. इसके साथ ही एयरसाइड सेफ्टी, टर्मिनल में पर्याप्त जगह और एयरपोर्ट ऑपरेशंस के बीच बेहतर कोऑर्डिनेशन पर भी जोर दिया गया.
डीजीसीए को एयरक्राफ्ट और क्रू की तैयारी की निगरानी करने, नियमों का पालन सुनिश्चित करने और एयरलाइंस की पैसेंजर फैसिलिटेशन से जुड़ी व्यवस्थाओं की जांच करने को कहा गया है. वहीं, आईएमडी को समय पर वेदर फोरकास्ट और मौसम से जुड़े अपडेट देने के निर्देश दिए गए हैं. एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) और एयर नेविगेशन सर्विस प्रोवाइडर्स को भी कोहरे के दौरान विमानों की सुरक्षित आवाजाही, लो विजिबिलिटी प्रोसीजर्स और ट्रैफिक मैनेजमेंट का खास ध्यान रखने को कहा गया है.
लंबे इंतजार में यात्रियों की मदद के लिए भी इंतजाम
मीटिंग में इस बात पर भी चर्चा हुई कि अगर फ्लाइट में काफी देर हो जाए या उसे कैंसिल करना पड़े, तो यात्रियों को किस तरह मदद दी जाएगी. एयरलाइंस को चेक-इन काउंटर्स, हेल्पडेस्क और कस्टमर केयर पर पर्याप्त स्टाफ तैनात रखने को कहा गया है. एयरपोर्ट पर मौजूद हेल्पलाइन डेस्क पर ऐसे कर्मचारी होने चाहिए, जिन्हें फ्लाइट की स्थिति की सही जानकारी हो और जो यात्रियों के सवालों का जवाब देने के साथ उनकी मदद भी कर सकें.
इसके अलावा ग्राउंड हैंडलर्स को पर्याप्त स्टाफ रखने, बैगेज मैनेजमेंट बेहतर बनाने और एयरक्राफ्ट टर्नअराउंड में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं. बीसीएएस और सीआईएसएफ की भूमिका पर भी चर्चा हुई. कोहरे के कारण जरूरत पड़ने पर यात्रियों को टर्मिनल से बाहर जाने के बाद दोबारा एंट्री देने या फिर से बोर्डिंग कराने जैसी स्थितियों में सुरक्षित और व्यवस्थित पैसेंजर मूवमेंट सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है.