नई दिल्ली: महाविशाल ब्लैक होल ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यमय पिंड माने जाते हैं. ब्लैक होल्स को लेकर हमारे पास ज्यादा जानकारी भी नहीं. अब तक यह माना जाता रहा है कि ये भीमकाय ब्लैक होल अपनी गैलेक्सी के केंद्र में चुपचाप जमे रहते हैं. वहां बैठकर ये अपने भारी गुरुत्वाकर्षण से आसपास के तारों और गैस को नियंत्रित करते हैं. लेकिन स्लोअन डिजिटल स्काई सर्वे के एक लाख क्वासार्स के नए डेटा ने इस पुरानी धारणा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस एनालिसिस से पता चला है कि गैलेक्सियों की भीषण टक्कर के बाद कई महाविशाल ब्लैक होल अपने मूल ठिकाने से उखड़ चुके हैं. वे अंतरिक्ष में लाखों मील प्रति घंटे की रफ्तार से आवारा होकर भटक रहे हैं. इस प्रक्रिया के पीछे अल्बर्ट आइंस्टीन की जनरल रिलेटिविटी थ्योरी और ग्रेविटेशनल वेव्स का बहुत बड़ा हाथ सामने आया है. यह स्टडी अंतरिक्ष के सबसे हिंसक टकरावों की नई कहानी बयां करती है.
जब दो महाकाय दैत्य आपस में टकराते हैं तो अंतरिक्ष में क्या होता है?
ज्यादातर बड़ी गैलेक्सियों के केंद्र में एक सुपरमैसिव ब्लैक होल मौजूद होता है. इसका द्रव्यमान हमारे सूर्य से लाखों या करोड़ों गुना ज्यादा भारी होता है. जब ब्रह्मांड में दो बड़ी गैलेक्सियां आपस में टकराती हैं तो उनके केंद्र में मौजूद ब्लैक होल भी एक-दूसरे के करीब आने लगते हैं.
समय बीतने के साथ ये दोनों विशाल पिंड आपस में जुड़कर एक जोड़े की शक्ल ले लेते हैं. इसके बाद वे एक-दूसरे के चक्कर काटते हुए आखिरकार टकराकर एक अकेले महाविशाल ब्लैक होल में तब्दील हो जाते हैं. यह विलय इतना भयानक होता है कि पूरे स्पेस और टाइम के ताने-बाने को हिलाकर रख देता है.
वैज्ञानिक दशकों से इस प्रक्रिया को समझने की कोशिश कर रहे थे. अब जाकर इसके पुख्ता सांख्यिकीय प्रमाण हाथ लगे हैं.
आइंस्टीन की ग्रेविटेशनल वेव्स ने ब्लैक होल को कैसे मारी जोरदार लात?
इस पूरे टकराव के दौरान अंतरिक्ष में भयंकर ग्रेविटेशनल वेव्स यानी गुरुत्वाकर्षण तरंगें पैदा होती हैं. महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपनी थ्योरी में इन तरंगों की भविष्यवाणी बहुत पहले ही कर दी थी. जब दो ब्लैक होल आपस में मिलते हैं तो ये तरंगें अंतरिक्ष में सभी दिशाओं में एक बराबर नहीं निकलती हैं.
यदि ये तरंगें किसी एक दिशा में ज्यादा ताकत के साथ निकलती हैं तो नए बने ब्लैक होल को ठीक उल्टी दिशा में भयानक धक्का लगता है. विज्ञान की भाषा में इस झटके को रिकॉइल कहा जाता है. इस धक्के के कारण वह खरबों टन वजनी ब्लैक होल लाखों मील प्रति घंटे की रफ्तार से अपने केंद्र से बाहर की ओर भागने लगता है. यह गति इतनी तेज होती है कि वह अपने मूल स्थान से बहुत दूर निकल जाता है.
क्या गैलेक्सी से बाहर फेंक दिया गया ब्लैक होल कभी वापस लौट पाता है?
अपनी जगह से उखड़ चुका हर ब्लैक होल पूरी तरह से गैलेक्सी से बाहर नहीं निकल पाता है. कई बार गैलेक्सी का भारी गुरुत्वाकर्षण उसे अपने दायरे में बांधकर रखता है. ऐसे में यह दैत्य भटकने के बाद वापस केंद्र की ओर खिंचने लगता है.
जैसे-जैसे वह केंद्र के पास पहुंचता है उसकी गति बहुत ज्यादा तेज हो जाती है. वह तेजी से केंद्र को पार कर जाता है और दूसरी तरफ जाकर धीमा हो जाता है. इसके बाद वह फिर से अपनी दिशा बदलता है और वापस लौटने लगता है. यह पेंडुलम जैसी हलचल अंतरिक्ष में करोड़ों वर्षों तक लगातार चलती रहती है. आसपास मौजूद गैस और तारों के टकराव के कारण धीरे-धीरे उसकी यह रफ्तार कम होने लगती है.
वैज्ञानिकों को एक लाख चमकते क्वासार्स की रोशनी में ऐसा क्या दिखाई दिया?
- अकेले किसी एक ब्लैक होल की हलचल को अंतरिक्ष में पकड़ना लगभग नामुमकिन काम माना जाता है. ब्लैक होल खुद कोई रोशनी नहीं छोड़ते हैं इसलिए वे सीधे टेलीस्कोप में दिखाई नहीं देते हैं.
- बर्मिंघम यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर बेंस बेसी और उनकी टीम ने इसके लिए एक नया रास्ता निकाला. उन्होंने स्लोअन डिजिटल स्काई सर्वे से करीब एक लाख क्वासार्स के विशाल डेटा का एनालिसिस किया.
- क्वासार्स असल में गैलेक्सियों के वे बेहद चमकदार केंद्र होते हैं जहां ब्लैक होल तेजी से गैस को निगल रहे होते हैं. वैज्ञानिकों ने ब्लैक होल के करीब मौजूद गैस और उससे दूर मौजूद गैस से निकलने वाली रोशनी के फर्क को बारीकी से मापा. इस अंतर की मदद से उन्होंने ब्लैक होल की वास्तविक गति का अनुमान लगाया.
लाल रंग और धूल के घने बादलों ने ब्लैक होल की गति का राज कैसे खोला?
इस नए एनालिसिस में एक बेहद दिलचस्प पैटर्न सामने आया जिससे वैज्ञानिकों का शक सच में बदल गया. जिन क्वासार्स में ब्लैक होल बहुत तेज रफ्तार से भाग रहे थे वे देखने में ज्यादा लाल नजर आ रहे थे. इसका सीधा मतलब यह था कि वे ब्लैक होल अंतरिक्ष में धूल के बहुत घने बादलों से घिरे हुए थे.
साल 2016 में पीटर रफई, जोल्टन हैमन और जोल्ट फ्रेई ने कंप्यूटर मॉडल के आधार पर ठीक इसी बात का अनुमान लगाया था. उनका कहना था कि अपनी जगह से हटे हुए ब्लैक होल केंद्र के पास सबसे तेज रफ्तार से दौड़ेंगे जहां धूल का जमावड़ा सबसे ज्यादा होता है. पीटर रफई ने कहा, ‘हमने सालों पहले जिस थ्योरी की भविष्यवाणी की थी अब वह वास्तविक डेटा में सच साबित हुई है’. यह स्टडी बताती है कि ब्रह्मांड में ब्लैक होल का इस तरह भटकना कोई दुर्लभ बात नहीं है.
भविष्य के लीसा मिशन से अंतरिक्ष के इस भटकते शिकारी का सच कैसे सामने आएगा?
प्रोफेसर फ्रेई ने कहा, ‘यदि ये संकेत वास्तव में बाहर फेंके गए ब्लैक होल के हैं तो ऐसे विलय बहुत बड़े पैमाने पर हो रहे हैं’. इस मिशन के शुरू होने के बाद अंतरिक्ष के इन भटकते हुए शिकारियों की पूरी कहानी साफ हो जाएगी.