मेट्रो के लिए कटे पेड़ तो उजड़ गई बेजुबानों की दुनिया, 50 साल से जिन डालियों पर था बसेरा, रातभर भटकते रहे तोते

मेट्रो के लिए कटे पेड़ तो उजड़ गई बेजुबानों की दुनिया, 50 साल से जिन डालियों पर था बसेरा, रातभर भटकते रहे तोते


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इंदौर के रानी सराय कॉम्प्लेक्स में 160 पेड़ों की कटाई होनी है. अबतक 50-60 पेड़ काटे जा चुके हैं. इन पेड़ों पर हजारों तोतों का बसेरा था. इंदौर मेट्रो के लिए बन रहे स्टेशन की वजह से इस कॉम्प्लेक्स में तोड़फोड़ चल रही है. पेड़ों की कटाई चल रही है. ये पेड़ पिछले 50 सालों से तोतों का बसेरा बने हुए थे. इन पेड़ों की कटाई के बाद से तोतें बेघर हो गए हैं. इसलिए स्थानीय लोग पिछले कई समय से इसका विरोध कर रहे थे.

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रानी सराय में टूटा तोतों का बसेरा.

रिपोर्ट- मिथिलेश गुप्ता, इंदौर. सुबह हुई तो सैकड़ों तोते अपने आशियाने से उड़कर दाना-पानी की तलाश में निकल गए. हर दिन की तरह शाम को अपने घर लौटने की उम्मीद थी. लेकिन उन्हें क्या पता था कि जिस पेड़ पर उनका बरसों से बसेरा था, शाम होने तक वह जमीन पर गिरा दिया जाएगा. जब वे लौटे तो वहां न उनका आशियाना था, न घनी डालियां और न ही वह ठिकाना, जहां हर रात सुकून से गुजरती थी. रानी सराय में सोमवार को मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए हुई पेड़ों की कटाई ने सैकड़ों बेजुबानों से उनका घर छीन लिया.

रानी सराय परिसर में सुबह करीब 5 बजे तक पेड़ों पर तोतों की चहचहाहट गूंज रही थी. रोज की तरह पक्षियों के झुंड अपने ठिकानों से उड़कर चले गए. दिन में मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए पेड़ों की कटाई शुरू हुई. कुछ ही मिनटों में हरे-भरे पेड़ जमीन पर आ गिरे. उनकी डालियों पर बसेरा करने वाले पक्षियों के लिए यह किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं था. शाम हुई तो तोते अपने पुराने ठिकानों पर लौटे, लेकिन इस बार उनका स्वागत पेड़ों की डालियों ने नहीं, बल्कि जमीन पर पड़े कटे तनों और बिखरी शाखाओं ने किया. जिस जगह हर शाम तोतों की चहचहाहट सुनाई देती थी, वहां अब सन्नाटा और उजड़े आशियानों के निशान थे.

कभी इस डाल पर बैठे, कभी उस डाल पर… रातभर तलाशते रहे घर

अपने पुराने ठिकाने पर पहुंचे तोते देर तक इधर-उधर फड़फड़ाते रहे. कोई एक डाल पर बैठता तो कोई दूसरी डाल पर जाकर ठहरने की कोशिश करता. वे बार-बार जगह बदलते रहे, लेकिन उनका पुराना बसेरा लौटकर नहीं आया. रात होने के बाद भी तोतों की आवाजाही जारी रही. आसमान में उड़ते पक्षियों के झुंड और नीचे जमीन पर पड़े पेड़ एक ऐसी तस्वीर दिखा रहे थे, जिसमें विकास की रफ्तार के बीच बेजुबानों की बेबसी साफ नजर आ रही थी.

50 साल पुराना बसेरा, अब बाकी पेड़ों पर भी संकट

रानी सराय परिसर के इन पेड़ों पर करीब 50 साल से तोतों का बसेरा बताया जा रहा है. लंबे समय से इन पेड़ों को अपना घर बनाए पक्षियों के सामने अब नए ठिकाने की तलाश का संकट है. मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए परिसर के जिस हिस्से में पेड़ों की कटाई होनी है, उसे खाली कराकर सोमवार को कार्रवाई शुरू की गई. अधिकारियों की मौजूदगी में पेड़ काटे गए. जानकारी के मुताबिक, मंगलवार को करीब 160 पेड़ों की कटाई की जानी है. ऐसे में बचे हुए पेड़ों पर बसेरा करने वाले पक्षियों का ठिकाना भी आने वाले दिनों में खत्म हो सकता है.

विकास की राह में पीछे छूट गए बेजुबान

मेट्रो शहर को बेहतर परिवहन और विकास की नई राह देगी, लेकिन रानी सराय में कटते पेड़ों के बीच उन पक्षियों का सवाल भी खड़ा है, जिनकी पूरी दुनिया इन्हीं डालियों तक सीमित थी. इंसानों के लिए ये पेड़ शायद विकास की राह में आने वाली बाधा हों, लेकिन सैकड़ों तोतों के लिए यही उनका घर थे. सुबह उड़कर गए इन परिंदों को शायद अंदाजा भी नहीं था कि शाम को लौटने पर उनका आशियाना जमीन पर बिखरा मिलेगा. अब उन्हें नए ठिकाने तलाशने होंगे. पेड़ तो कट गए, लेकिन सवाल छोड़ गए- जिन बेजुबानों ने इन डालियों पर करीब आधी सदी गुजारी, उनके उजड़े आशियाने की भरपाई आखिर कौन करेगा?



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