BS4 में BS6 से ऐसा क्या अंतर होता है जो हर साल रोक दी जाती है दिल्ली में एंट्री? पॉल्यूशन रोकने में ये कितना कारगर?

BS4 में BS6 से ऐसा क्या अंतर होता है जो हर साल रोक दी जाती है दिल्ली में एंट्री? पॉल्यूशन रोकने में ये कितना कारगर?


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दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए BS6 से नीचे की गाड़ियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. यह बैन 1 नवंबर 2027 से 31 जनवरी 2028 तक जारी रहेगा. इस दौरान BS4 और उससे नीचे इमर्शन स्टेज वाली गाड़ियों को दिल्ली में एंट्री नहीं दी जाएगी.

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इस सर्दी परिस्थितियां ऐसी बन रही है जिसकी वजह से दिल्ली में लंबे समय तक धुंधा का असर रह सकता है. फोटो- रायटर

प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए 1 नवंबर से BS6 श्रेणी से नीचे के वाहन दिल्ली में एंट्री नहीं पा सकेंगे. यह प्रतिबंध 1 नवंबर से 31 जनवरी तक जारी रहेगा. इससे सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को होगी जो गुड़गांव, नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद समेत दिल्ली-NCR में रहते हैं. BS6 वाहन देश में लागू मोटर वाहनों के सबसे नए मानकों का पालन करते हैं. ऐसे में सरकार की ओर से सिर्फ इसी स्टेज के वाहनों को दिल्ली में एंट्री दी गई है. इसमें किसी तरह की लापरवाही न हो इसके लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन, बॉर्डर पोस्ट और बड़ी तादाद में पुलिसकर्मी तैनात किए जा रहे हैं.

दिल्ली-NCR में सर्दियां शुरू होते हुए प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है. हवा में लगातार घुल रहे जहरीले कणों पर सरकार ने प्रतिबंध की तैयारी कर ली है. सरकार ने अभी से ही BS4 वाहनों की एंट्री पर पाबंदी लगा दी है, सिर्फ BS6 वाहनों को ही छूट दी गई है. ऐसे में सवाल ये है कि क्या पुराने वाहनों को रोकने से दिल्ली की हवा साफ हो सकती है.

BS4 और BS6 क्या है?

BS का पूरा नाम भारत स्टेज है, जो उत्सर्जन मानक है. सरकार की ओर से सबसे पहले सन् 2000 में ये मानक तय करने की शुरुआत की गई थी. इसके जरिए पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों से निकलने वाले धुएं की अधिकतम सीमा तय की जाती है. भारत में BS4 मानक देशभर में 2017 से लागू हुआ था. इसके बाद 1 अप्रैल 2020 से नए वाहनों के लिए BS6 मानक लागू कर दिया गया. BS5 को बीच में लागू किए बिना सीधे BS6 पर जाने का फैसला किया गया था. गाड़ियों का ये मानक BS4 के मुकाबले कम प्रदूषण छोड़ता है.

BS4 और BS6 में क्या है अंतर?

दोनों मानकों के बीच सबसे बड़ा अंतर नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर की निर्धारित सीमा का है. आंकड़ों से लिहाज से देखें तो BS4 इंजन नाइट्रोजन ऑक्साइड 250 mg प्रति रिलीज करता है, जबकि BS6 में यह महज 80mg प्रति किमी होता है. वहीं BS4 इंजन 25mg प्रति किमी पार्टिकुलेट मैटर रिलीज करता है, जबकि BS6 में यह 4.5Mg प्रति किमी है.

दिल्ली में BS4 गाड़ियों की एंट्री क्यों रोकी जाती है?

दिल्ली में सर्दियों के मौसम में हवा की गुणवत्ता तेजी से बिगड़ती है. इससे बचाव के लिए सरकार ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान बना रखे हैं जो समय-समय पर लागू किए जाते हैं. इसके तहत सरकारी आदेशों के अनुसार कुछ श्रेणियों के वाहनों की आवाजाही लगाई जा सकती है. इसीलिए सर्दियां शुरू होते ही दिल्ली के बाहर पंजीकृत BS4 और उससे पुराने मानक वाले वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है.

ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि पुराने वाहनों की आवाजाही सीमित करने से सड़क परिवहन से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि इसका असर कई बातों पर निर्भर करता है. मसलन, कितने वाहन प्रतिबंध के दायरे में आए, वे रोज कितनी दूरी तय करते थे और उनकी जगह किन वाहनों ने ली.



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