कौन हैं एक्टिविस्ट राकेश सिंह? जिनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को किया तलब


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कौन हैं एक्टिविस्ट राकेश सिंह? जिनकी याचिका पर SC ने EC को किया तलब

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बिहार के सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कुमार सिंह उर्फ राकेश सिंह की याचिका ने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम बहस छेड़ दी है. राकेश सिंह जहानाबाद जिले के घोसी क्षेत्र के सोनवां गांव के मूल निवासी हैं और पटना में रहते हैं. उन्होंने 2020 में लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर घोसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था. उनके चुनावी हलफनामे में शिक्षा का स्तर ‘साक्षर’ और पेशा ‘बिजनेस और सोशल एक्टिविस्ट’ दर्ज था. वह चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अन्य मामलों में भी अदालत पहुंचे हैं. चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे और अखबार की रिपोर्ट अपने आप में कानूनी सबूत नहीं है.

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कौन हैं एक्टिविस्ट राकेश सिंह? जिनकी याचिका पर SC ने EC को किया तलबZoom

बिहार के सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कुमार सिंह की SIR से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचा है. (फाइल फोटो)

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक अहम मामला पहुंचा है. इस मामले में बिहार के सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कुमार सिंह उर्फ राकेश सिंह की याचिका चर्चा में है. उनकी याचिका पर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज से जुड़े सवालों पर शीर्ष अदालत में सुनवाई होनी है. इसी बीच चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर अपने फैसलों का बचाव किया है. आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर राकेश सिंह कौन हैं और उनकी याचिका में ऐसा क्या है जिसने चुनाव आयोग को अपना पक्ष रखने के लिए मजबूर किया?

राकेश सिंह बिहार के पटना में रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता हैं. उनका मूल निवास जहानाबाद जिले के घोसी थाना क्षेत्र का सोनवां गांव बताया गया है. वह पिछले कई सालों से चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उन्होंने 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में घोसी सीट से लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर चुनाव भी लड़ा था. अब SIR से जुड़े फैसलों को लेकर उनकी याचिका सुप्रीम कोर्ट पहुंची है. दूसरी ओर चुनाव आयोग ने अपने जवाब में कहा है कि याचिकाओं का आधार एक अखबार की रिपोर्ट है और अखबार की रिपोर्ट अपने आप में कानून की नजर में सबूत नहीं मानी जा सकती. इस मामले पर अदालत का रुख आगे महत्वपूर्ण होगा.

राकेश कुमार सिंह कौन हैं और कहां से आते हैं?

राकेश कुमार सिंह उर्फ राकेश सिंह बिहार के सामाजिक कार्यकर्ता हैं. उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह पटना की विद्युत बोर्ड कॉलोनी यानी एलबीएस नगर में रहते हैं. उनका पैतृक गांव जहानाबाद जिले के घोसी थाना क्षेत्र में स्थित सोनवां है. उनके पिता का नाम स्वर्गीय त्रिपुरारी प्रसाद सिंह बताया गया है. वह चुनाव और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर अदालतों का रुख करते रहे हैं. हालांकि उनके निजी जीवन और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रिकॉर्ड में सीमित है.

कितनी पढ़ाई की है राकेश सिंह ने?

राकेश सिंह की शैक्षणिक योग्यता को लेकर सार्वजनिक रिकॉर्ड में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है. 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल उनके चुनावी हलफनामे में शिक्षा का स्तर ‘साक्षर’ दर्ज बताया गया था. उस समय उन्होंने अपना पेशा ‘बिजनेस और सोशल एक्टिविस्ट’ यानी कारोबारी और सामाजिक कार्यकर्ता बताया था. उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर उनकी कोई विशिष्ट डिग्री या उच्च शैक्षणिक योग्यता बताना उचित नहीं होगा.

चुनावी मामलों में पहले भी अदालत पहुंचे

राकेश सिंह का नाम चुनावी मुकदमेबाजी से पहले भी जुड़ चुका है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से जुड़े चुनाव याचिका नंबर 6/2025 में वह पक्षकार रहे हैं. उन्होंने पटना हाईकोर्ट में बिहार विधान परिषद चुनाव स्थगित करने की मांग को लेकर भी याचिका दायर की थी. हालांकि अदालत ने निजी हित से जुड़ा मामला मानते हुए उसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार नहीं किया था. इससे साफ है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विवादों में वह न्यायिक रास्ता अपनाते रहे हैं.

SIR पर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा?

चुनाव आयोग ने राकेश सिंह की याचिका के जवाब में हलफनामा दाखिल किया है. आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 के आदेश पूरे आयोग की सर्वसम्मत सहमति से लिए गए थे. आयोग के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त या अन्य चुनाव आयुक्तों की फाइल पर दर्ज टिप्पणियां और सुझाव अंतिम फैसले नहीं माने जा सकते. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 में SIR के दौरान कोई बदलाव नहीं किया गया था. अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर रहेगी.



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