कम पानी वाले खेतों में बोएं ये गेहूं, एक सिंचाई में होगा बंपर उत्पादन
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Wheat Farming: कम बारिश के कारण रबी सीजन में किसान कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली गेहूं की किस्मों का चयन कर सकते हैं. सागर के कृषि वैज्ञानिकों ने अमृता, सुजाता और शरबती जैसी किस्मों की जानकारी दी है जो एक सिंचाई में अच्छा उत्पादन देती हैं.
Wheat Farming: इस मानसून के सीजन में कम बारिश होने की वजह से रवि के सीजन में फसलों के ग्राफ में भारी उतार-चढ़ाव देखे जाने की संभावना है. किसान ऐसी फसलों का चुनाव कर रहे हैं जो कम सिंचाई में बेहतर उत्पादन दे सकें, जिन किसानों के पास सिंचाई के संसाधन कम है. वह ऐसी गेहूं की वैरियटयों की तलाश में है जो महज एक से दो पानी में ही अच्छा उत्पादन दें तो ऐसे किसानों के लिए हम कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर उन वैरायटी के बारे में बताने जा रहे हैं जो एक सिंचाई हैं 14 से 18 कुंतल तक प्रति एकड़ के हिसाब से उत्पादन दे सकती हैं.
सागर में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर आशीष त्रिपाठी बताते हैं कि हमारे जिले में शरबती सेगमेंट का काफी बड़ा रकवा है. इसके अलावा सुजाता अमृता जैसी वैरायटी भी हैं जो मात्र एक पानी में ही किसानों को अच्छा प्रोडक्शन देती हैं. बुआई करने के लिए अभी खेत की तैयारी करें. इसमें दो बोरी सिंगल सुपर फास्फेट 20 किलो यूरिया 15 किलोग्राम पोटाश को मिक्स करके डालना है. बुआई करने के लगभग 30 दिन बाद एक सिंचाई करनी है जिससे कोई समस्या नहीं आएगी.
यूरिया का छिड़काव कब करें
गेहूं की HI-1500 की बात करें तो इसको अमृता के नाम से भी जाना जाता है. यह ऐसी वैरायटी है जो एक सिंचाई में भी 14 से 18 कुंतल तक उत्पादन दे सकती है. 5 नवंबर के बाद इसकी बुवाई कर सकते हैं इसमें 40 से 45 किलो बीज प्रति एकड़ के मान से बोया जाता है. पलेवा करने के बाद सीधे बुआई कर सकते हैं और फिर इसके बाद 35 से 45 दिन के बीच में एक सिंचाई करने के बाद यूरिया 30 से 35 किलो यूरिया का छिड़काव करें.
गेहूं की HI-617 वैरायटी यानी सुजाता के नाम से जाना जाता है. यह वैरायटी केवल एक सिंचाई में अधिकतम 16 क्विंटल तक उत्पादन दे सकती है. बुवाई करते समय 30 से 35 किलो बीज की आवश्यकता होती है. इसमें लगभग 40 दिन के आसपास सिंचाई करनी पड़ती हैं. यह किस्म कम पानी जैसी परिस्थितियों के लिए अपेक्षाकृत अच्छी मानी जाती है.
इसी तरह C-306 शरबती गेहूं हल्की मिट्टी में कम सिंचाई लगभग 14 /15 क्विंटल उत्पादन देती है. बीज के लिए 40 से 45 किलोग्राम की आवश्यकता होती है, सिंचाई के बाद उर्वरक का छिड़काव के रूप में 30 किलो यूरिया की जरूरत रहेगी. यह 130 दिन की फसल हैं.