करवाचौथ पर ‘सरगी’ से होती है व्रत की शुरुआत, जानें क्या खाने से पूरे दिन मिलेगी एनर्जी

करवाचौथ पर ‘सरगी’ से होती है व्रत की शुरुआत, जानें क्या खाने से पूरे दिन मिलेगी एनर्जी


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‘सरगी’ से करवाचौथ व्रत की शुरुआत, क्या खाने से पूरे दिन मिलेगी एनर्जी?

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Karwa Chauth Sargi: करवाचौथ पर व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले सरगी खाने की परंपरा से होती है. सास अपनी बहू को सरगी देकर सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं लेकिन इस रस्म का धार्मिक महत्व क्या है और सरगी में किन चीजों को शामिल करना चाहिए, आइए जानते हैं.

उज्जैन. करवाचौथ का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए आस्था और प्रेम का प्रतीक माना जाता है. इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, बेहतर स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में खुशहाली के लिए निर्जला उपवास रखती हैं. साल 2026 में करवाचौथ 29 अक्टूबर, दिन गुरुवार को मनाया जाएगा. इस व्रत में महिलाएं सूर्योदय से लेकर रात में चंद्रमा के दर्शन और पूजन तक पानी भी नहीं पीती हैं. व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करके की जाती है.

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, करवाचौथ पर सरगी की परंपरा सदियों से चली आ रही है लेकिन क्या आप जानते हैं कि सुबह सूर्योदय से पहले सरगी खाने का विशेष महत्व क्यों है. दरअसल सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत शुरू करने से पहले सरगी ग्रहण करती हैं ताकि दिनभर ऊर्जा बनी रहे. ऐसे में सरगी की थाली में किन खाद्य पदार्थों को शामिल करना शुभ माना जाता है, इसे खाने का सही समय क्या है और क्या सरगी के बिना व्रत रखा जा सकता है, आइए जानते हैं. हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को रात 1 बजकर 6 मिनट से शुरू होगी. यह तिथि उसी रात 10 बजकर 9 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि और व्रत की परंपरा के अनुसार इस साल करवाचौथ 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा.

करवाचौथ पर सरगी क्यों जरूरी है?
करवाचौथ पर सरगी का विशेष महत्व माना जाता है. सूर्योदय से पहले खाई जाने वाली इस थाली को आमतौर पर सास अपनी बहू को प्रेम और आशीर्वाद के साथ देती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सरगी अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और सास-बहू के मजबूत रिश्ते का प्रतीक है. इस परंपरा के जरिए सास अपनी बहू की खुशहाली और पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं. सरगी में फल, मेवे और पौष्टिक चीजें शामिल की जाती हैं ताकि निर्जला व्रत शुरू करने से पहले शरीर को पर्याप्त ऊर्जा मिल सके. हालांकि सरगी की परंपरा और थाली में रखी जाने वाली चीजें अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं.

करवाचौथ की सरगी में क्या-क्या होता है?
करवाचौथ का व्रत शुरू होने से पहले सरगी खाने की परंपरा है. सरगी की थाली में ऐसी चीजें शामिल की जाती हैं, जो दिनभर बिना अन्न-जल के रहने के दौरान शरीर को ऊर्जा देने में मदद कर सकें. इसमें दूध के साथ फेनी या सेवइयां, सेब, केला और अनार जैसे फल रखे जाते हैं. बादाम, काजू, किशमिश और अखरोट भी थाली का हिस्सा होते हैं. इसके अलावा मिठाई, खीर, परांठा या मट्ठी भी रखी जाती है. वहीं सास अपनी बहू को सरगी के साथ सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी और नए कपड़े देकर आशीर्वाद देती हैं.



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