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Another world on Earth: धरती के कई ऐसे कोने हैं, जो आज भी पहेली बने हुए हैं. हम समझ ही नहीं पाते कि इसका भौगोलिक रहस्य है क्या? कुछ ऐसा ही है सोकोत्रा आइलैंड, जो एलियन ग्रह जैसा लगता है. यहां के पेड़ों से खून रिसता है और आम पेड़ों से बिल्कुल अलग दिखते हैं.
Another world on Earth: हिंद महासागर में स्थित यमन का सोकोत्रा आइलैंड किसी दूसरी दुनिया जैसा दिखाई देता है. यहां आम पेड़ों से अलग छाते के आकार वाले ड्रैगन ब्लड ट्री पाए जाते हैं, जिनसे गहरे लाल रंग का खून निकलता रहता है. इस द्वीप की सबसे खास बात यह है कि यहां के कई पेड़-पौधे दुनिया में कहीं और नहीं मिलते. यही वजह है कि इसे देखने वाले लोग इसकी तुलना अक्सर किसी एलियन ग्रह से करते हैं
सोकोत्रा की सबसे बड़ी पहचान यहां पाए जाने वाले ड्रैगन ब्लड ट्री हैं. इनकी शाखाएं ऊपर की ओर फैलकर उल्टे छाते जैसा आकार बना लेती हैं. दूर से देखने पर ये पेड़ किसी काल्पनिक दुनिया के विशाल छातों जैसे नजर आते हैं.
इन पेड़ों को ड्रैगन ब्लड ट्री इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसकी सबसे दिलचस्प खासियत इसका लाल रंग का रेजिन है. पेड़ की छाल या ऊतक को नुकसान पहुंचने पर निकलने वाला यह रस गहरे लाल रंग का दिखाई देता है, जो खून की तरह दिखाई देता है. इसी वजह से इसे ड्रैगन ब्लड ट्री नाम दिया गया है.
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मई 2018 में चक्रवात मेकुनु के दौरान सोकोत्रा क्षेत्र में कुछ भारतीय फंस गए थे. नागरिकों को निकालने के लिए भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन निस्तार चलाया था. इस अभियान में आईएनएस सुनयना की मदद से 38 भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकाला गया था.
सोकोत्रा पर ड्रैगन ब्लड ट्री के अलावा बोतल जैसे मोटे तने वाले रेगिस्तानी गुलाब भी पाए जाते हैं. इनके तने पानी जमा करने में मदद करते हैं. अजीब आकार और अनोखी बनावट वाले ये पौधे द्वीप की जैव विविधता को खास बनाते हैं.
लंबे समय तक भौगोलिक रूप से अलग रहने के कारण सोकोत्रा पर वनस्पतियों और जीवों का विशिष्ट विकास हुआ. यहां का वातावरण और प्राकृतिक परिस्थितियां कई ऐसी प्रजातियों के लिए अनुकूल बनीं, जो दुनिया के दूसरे हिस्सों में नहीं मिलतीं.
सोकोत्रा केवल विचित्र पेड़ों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अनोखे जीव-जंतुओं के लिए भी जाना जाता है. यहां कई स्थानीय पक्षी, सरीसृप और कीट प्रजातियां मिलती हैं. इनमें से कुछ प्रजातियां केवल इसी द्वीप पर पाई जाती हैं.
द्वीप के समुद्र तट, साफ नीला पानी और सफेद रेत इसकी खूबसूरती को और बढ़ाते हैं. यहां के समुद्री और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र भी बेहद महत्वपूर्ण हैं. प्राकृतिक विविधता के कारण यह जगह शोधकर्ताओं और पर्यटकों को आकर्षित करती है.
सोकोत्रा द्वीपसमूह को साल 2008 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया. इसकी असाधारण जैव विविधता और दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण के महत्व को देखते हुए इसे वैश्विक स्तर पर खास पहचान मिली. (क्रेडिट- सभी फोटो/ रॉयटर्स)