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यदि डसते समय सांप का विषदंत टूट जाए, तो उसे वापस आने में 3 से 6 महीने लगते हैं. इस दौरान सांप शिकार नहीं कर पाता. पलामू के स्नेक एक्सपर्ट डॉ. डीएस श्रीवास्तव ने इस संबंध में विस्तार से बताया है.
पलामूः मानसून के सीजन में सर्पदंश के मामले अक्सर सामने आते हैं. बारिश के दौरान सांप अपने बिलों से बाहर निकलकर सुरक्षित और सूखी जगह की तलाश में घरों, खेतों और आसपास के इलाकों में पहुंच जाते हैं. इसी दौरान लोगों के सांप के संपर्क में आने और सर्पदंश की घटनाएं देखने को मिलती है. कई मामलों में जानकारी के अभाव में लोग सांप को मारने की कोशिश भी करते हैं, जबकि सांप के काटने के बाद सबसे जरूरी है कि पीड़ित को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाया जाए.
क्या एक बार काटने के बाद सांप दोबारा नहीं काट सकता?
पलामू जिले के एक्सपर्ट डॉ डी एस श्रीवास्तव ने बताया कि अक्सर लोगों के बीच यह चर्चा होती है कि सांप एक बार काटने के बाद दोबारा कई महीनों तक नहीं काट सकता. सांप के विषदंत और विषग्रंथि को लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं. विषदंत सांप के मुंह में मौजूद विशेष दांत होते हैं, जिनके जरिए वह विष पहुंचाता है. किसी स्थिति में विषदंत को नुकसान पहुंचने पर सांप के लिए दोबारा काटना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में सांप एक बार काटने के बाद छह महीने तक दोबारा नहीं काट सकता.
विषदंत का सांप के जीवन में क्या काम है?
उन्होंने कहा कि सांप के विषदंत उसके शिकार को पकड़ने और विष पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. सांप की विषग्रंथियां उसके विष का निर्माण और भंडारण करती हैं. विषदंतों को नुकसान होने पर सांप को शिकार करने में परेशानी हो जाती है. ऐसे में सांप अपना भोजन भी नहीं कर पाता है. हालांकि, सांप की प्रजाति और उसके विषदंतों की संरचना के आधार पर यह प्रक्रिया अलग-अलग होती है. जिस दांत को फिर से तैयार होने में 3 से 6 महीने का समय लगता है.
कोबरा-करैत का जहर श्वसन तंत्र पर करता है असर
आगे कहा कि सांपों के विष का प्रभाव उनकी प्रजाति पर निर्भर करता है. कोबरा और करैत जैसे सांपों का विष मुख्य रूप से न्यूरोटॉक्सिक प्रभाव पैदा कर सकता है, जिससे शरीर की नसों और मांसपेशियों पर असर पड़ता है. गंभीर स्थिति में सांस लेने वाली मांसपेशियां प्रभावित होने से श्वसन में परेशानी हो सकती है.
रसेल वाइपर के विष से रक्त पर पड़ता है असर
वहीं रसेल वाइपर जैसे सांपों के विष में हेमोटॉक्सिक प्रभाव देखा जाता है. इससे रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और शरीर में रक्तस्राव जैसी गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है. सर्पदंश के बाद दर्द, सूजन, रक्तस्राव या अन्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं. ऐसे में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचना ही जरूरी है. ताकि उचित उपचार से जान बचाया जा सके.