Bed Rotting Trend: कंबल में घुसे रहना और फोन चलाना लगता है सुकून? सेहत से जुड़ी ये बातें जान लें

Bed Rotting Trend: कंबल में घुसे रहना और फोन चलाना लगता है सुकून? सेहत से जुड़ी ये बातें जान लें


आजकल सोशल मीडिया पर लाइफस्टाइल से जुड़ा एक ट्रेंड काफी चर्चा में रहता है, जिसे ‘Bed Rotting’ कहा जाता है. इसमें लोग अपना खाली समय बिस्तर पर लेटकर बिताते हैं. इस दौरान वे मोबाइल चलाते हैं, फिल्में या वेब सीरीज देखते हैं, गाने सुनते हैं या बस बिना कुछ किए आराम करते हैं. भागदौड़ भरी जिंदगी और काम के तनाव के बीच कुछ लोगों को यह तरीका सुकून देने वाला लगता है. लेकिन सवाल यह है कि क्या पूरे दिन बिस्तर पर पड़े रहना सच में आराम करने का अच्छा तरीका है या धीरे-धीरे यह आदत नुकसान पहुंचा सकती है?

‘Bed Rotting’ का शाब्दिक अर्थ भले ही बिस्तर पर पड़े रहने से जुड़ा हो, लेकिन सोशल मीडिया पर इसका इस्तेमाल ऐसे समय के लिए किया जाता है, जब कोई व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों और काम से ब्रेक लेकर लंबे समय तक बिस्तर पर आराम करता है. इसमें जरूरी नहीं कि व्यक्ति सो रहा हो. कई बार वह घंटों फोन चलाता है, वीडियो देखता है या बिना किसी तय काम के समय बिताता है.

इस ट्रेंड को खासतौर पर उन लोगों से जोड़कर देखा जाता है, जो लगातार काम, पढ़ाई और सामाजिक जिम्मेदारियों के कारण थकान महसूस करते हैं. ऐसे में वे कुछ समय अकेले रहकर खुद को मानसिक रूप से आराम देना चाहते हैं.

कब फायदेमंद हो सकता है बिस्तर पर आराम करना?

हर समय सक्रिय रहना जरूरी नहीं है. शरीर और दिमाग को आराम देने के लिए खाली समय निकालना भी जरूरी है. अगर कोई व्यक्ति थका हुआ है, तनावपूर्ण दिन के बाद कुछ देर लेटना चाहता है या अपने लिए समय निकालना चाहता है, तो इसमें कोई बुराई नहीं है. आराम के दौरान पसंदीदा संगीत सुनना, किताब पढ़ना या कुछ देर आंखें बंद करके शांत बैठना मन को सुकून दे सकता है. कभी-कभी काम से छोटा ब्रेक लेने से दोबारा ऊर्जा के साथ अपनी दिनचर्या शुरू करने में भी मदद मिलती है.

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि आराम करने का मतलब पूरे दिन निष्क्रिय रहना नहीं है. मानसिक सुकून के लिए टहलना, किसी पसंदीदा गतिविधि में हिस्सा लेना और दोस्तों या परिवार से बातचीत करना भी उपयोगी हो सकता है.

कब नुकसानदायक बन सकती है यह आदत?

अगर कोई व्यक्ति कभी-कभार बिस्तर पर आराम करता है, तो इसे अपने आप में समस्या नहीं माना जाना चाहिए. लेकिन जब वह बार-बार जरूरी काम टालने लगे, बाहर निकलने या लोगों से मिलने का मन न करे और दिन का बड़ा हिस्सा बिस्तर पर ही बिताने लगे, तो इस आदत पर ध्यान देना जरूरी है. लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि कम रहने से शरीर में अकड़न, सुस्ती और नींद की दिनचर्या बिगड़ने जैसी परेशानियां हो सकती हैं. वहीं, घंटों मोबाइल चलाने से आंखों पर जोर पड़ सकता है और सोने के समय स्क्रीन देखने से नींद प्रभावित हो सकती है.

अगर बिस्तर से उठने का मन लगातार नहीं करता, रोजमर्रा के काम मुश्किल लगने लगे या उदासी और थकान लंबे समय तक बनी रहे, तो इसे केवल आलस समझकर नजरअंदाज न करें. इसके पीछे तनाव, नींद की समस्या या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानी भी हो सकती है. जरूरत पड़ने पर किसी स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है.

कैसे बनाएं आराम और दिनचर्या के बीच संतुलन?

आराम के लिए समय तय करें और कोशिश करें कि पूरा दिन बिस्तर पर न बीते. बीच-बीच में उठकर पानी पिएं, हल्की स्ट्रेचिंग करें या थोड़ी देर टहलें. सोने और जागने का समय नियमित रखें. खाली समय में ऐसी गतिविधियां भी चुनें, जिनसे आपको खुशी मिले और शरीर सक्रिय रहे.



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