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पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सनातन स्वाभिमान यात्रा पर निकले हैं. यह यात्रा उज्जैन के शिवधाम से 20 अक्टूबर को शुरू हुई और एक महीने बाद अयोध्या के राम मंदिर में खत्म होगी. यह यात्रा आज शाजापुर में पहुंची. इस दौरान दिग्विजय सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने कहा, “मैं हिंदुत्व का कभी समर्थक नहीं रहा हूं और ना मैं कभी रहूंगा क्योंकि हिंदुत्व सनातन धर्म से कोई लेना देना नहीं है. हिंदुत्व शब्द तो सावरकर जी ने दिया जबकि हमारा सनातन धर्म तो हजारों वर्ष पुराना है. सनातन धर्म में कटुता और नफ़रत नहीं है. मैं सदैव सांप्रदायिक सद्भाव का पक्षधर रहा हूं.”
दिग्विजय सिंह ने सनातन स्वाभिमान यात्रा के दौरान कहा,”आज संविधान पर खतरा है और नागरिकता के अधिकार पर प्रश्न चिन्ह लग गया है. संविधान में हमें बताया गया है कि हम देश के नागरिक हैं और वोट डालने का अधिकार है. हर नागरिक का नाम जोड़ने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है, चुनाव आयोग तय नहीं करेगा कि कौन भारत का नागरिक है? कौन नहीं? यह उनका अधिकार नहीं है.” उन्होंने पत्रकार वार्ता के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कई गंभीर आरोप लगाए और कहा कि नोट चोरी और वोट चोरी दोनों में ज्ञानेश कुमार की भूमिका है. (फोटो साभारः फेसबुक @DigvijayaSinghOfficial)
दिग्विजय सिंह ने कहा, “एक धर्म है, एक धर्मांधता है. एक जगह धर्म में प्रेम है, सद्भाव है, करुणा है, दया है, अहिंसा है. दूसरी जगह धर्मांधता में कटुता है. कटुता के साथ-साथ नफ़रत है. कटुता और नफ़रत से हिंसा पनपती है.
इनमें साफ़ अंतर मेरे ज़हन में शुरू से रहा है.” (फोटो साभारः फेसबुक @DigvijayaSinghOfficial)
दिग्विजय सिंह ने कहा, “हमारा सनातन धर्म तो हजारों वर्ष पुराना है. लेकिन इस सनातन धर्म में कहीं कटुता या नफ़रत का कहीं इस प्रकार का उल्लेख उसमें नहीं है. सभी धर्मों में प्रेम, सद्भाव का ही एक संदेश है. आप स्वामी विवेकानंद जी के भाषण सुन लीजिए, रामकृष्ण परमहंस जी के सुन लीजिए, गुरु नानक के सुन लीजिए. मैंने कुरान भी पढ़ी है. कुरान में एक बात कही जाती है काफिर के बारे में…” (फोटो साभारः फेसबुक @DigvijayaSinghOfficial)
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दिग्विजय सिंह ने कहा, “काफिर वो होता है जो किसी धर्म का पालन न करे. ऐसे व्यक्ति के लिए काफिर कहा जाता है. लेकिन उसको ये कहा जाता है कि इस्लाम धर्म न पालन करे, उसे काफिर कहते हैं- ऐसा नहीं है. उसका मतलब साफ़ है कि जो धर्म का पालन न करके और जो अधर्म का पालन करे, वो काफिर है. इसलिए मैंने हमेशा से इसका पालन सन् 72 से लेकर आज तक किया है. यही सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा का मुख्य उद्देश्य है.” (फोटो साभारः फेसबुक @DigvijayaSinghOfficial)
दिग्विजय सिंह ने आगे कहा, “मैं इसे पार्टी लाइन पे भी कर सकता था. लेकिन कांग्रेस का विचारधारा यही है. महात्मा गांधी को गोली क्यों मारी गई? किसने मारी? किस उद्देश्य से मारी? नाथूराम गोडसे महात्मा गांधी जी से क्यों चिढ़ते थे? विचारधारा? और वो विचारधारा थी आरएसएस की, नफ़रत की. वो नफ़रत की विचारधारा क्योंकि अंग्रेजों ने हिंदू और मुसलमानों को बांटा और फूट डालो-राज करो की राजनीति की. जितनी भी ये मुस्लिम संगठन बने या ये कट्टरपंथी विचारधारा चली. ये अंग्रेजों के माध्यम से बाद में चली.” (फोटो साभारः फेसबुक @DigvijayaSinghOfficial)
दिग्विजय सिंह ने आगे कहा, “इसलिए साथियों, सनातन धर्म के जो उद्देश्य हैं, जो उसका एक मूल आधार तो हमारे भारतीय संविधान में है. भारतीय संविधान में सभी धर्मों का सम्मान करना ही हमारी सनातन यात्रा का उद्देश्य है. हर व्यक्ति को अपना धर्म का पालन करने का अधिकार है. इस बात से चिढ़कर आरएसएस ने हमेशा भारतीय संविधान को जलाया, हमारे नेशनल फ्लैग को जलाया.” (फोटो साभारः फेसबुक @DigvijayaSinghOfficial)
दिग्विजय सिंह ने आखिरी में कहा, “ये विचारधारा की लड़ाई है, जिस विचारधारा की लड़ाई में नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या की. महात्मा गांधी का केवल एक दोष था – ‘रघुपति राघव राजाराम, पतित पावन सीताराम, ईश्वर अल्लाह तेरे नाम, सबको सम्मति दे भगवान.’ यही सनातन धर्म है. यही सनातन धर्म का मूल उद्देश्य है, जिसकी लड़ाई आज भी हम आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के लोगों से लड़ रहे हैं. हमारी लड़ाई आखिर सांस लड़ेंगे. आज संविधान पर खतरा है. आज नागरिकता का अधिकार पर प्रश्नचिन्ह लग गया है.” (फोटो साभारः फेसबुक @DigvijayaSinghOfficial)
दिग्विजय सिंह ने कहा, “बात यह है, संविधान में हमें यह अधिकार मिला हुआ है कि हम देश के नागरिक हैं और हर नागरिक का वोट जोड़ने की जिम्मेदारी-जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है. चुनाव आयोग तय नहीं करेगा कौन भारत का नागरिक है, कौन भारत का नागरिक नहीं है, यह उनका अधिकार नहीं है. अभी तक जिस प्रकार से नाम जोड़े जाते थे, कांटे जाते थे, उसका पूरा अधिकार किसके पास था? रिटर्निंग ऑफिसर के पास था, एसडीएम के पास था, जिला कलेक्टर के पास था. dब यह सेंट्रलाइज कर लिया है ज्ञानेश्वर जी ने. उन्होंने आने के बाद पूरे चुनाव आयोग को नतबाह कर दिया है.” (फोटो साभारः फेसबुक @DigvijayaSinghOfficial)