मिडिल ईस्ट टेंशन, US बॉन्ड यील्ड और ग्लोबल मार्केट का असर, शेयर बाजार की चाल पर 5 फैक्टर्स का होगा असर

मिडिल ईस्ट टेंशन, US बॉन्ड यील्ड और ग्लोबल मार्केट का असर, शेयर बाजार की चाल पर 5 फैक्टर्स का होगा असर


भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को कारोबार की शुरुआत दबाव के साथ हो सकती है. शुरुआती संकेतों में गिफ्ट निफ्टी करीब 41 अंक की गिरावट के साथ 23,341 के आसपास कारोबार कर रहा है. इससे संकेत मिल रहा है कि निफ्टी की शुरुआत पिछले क्लोज लेवल 23,346.40 के मुकाबले कमजोर हो सकती है. हालांकि, एशियाई बाजारों में कई प्रमुख इंडेक्स हरे निशान में हैं, जिससे घरेलू बाजार को कुछ सहारा मिल सकता है.

निवेशकों की नजर इस समय ग्लोबल बाजारों के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतों पर भी है. मिडिल ईस्ट में जारी टेंशन के कारण तेल की कीमतें हाई लेवल पर बनी हुई हैं. इससे महंगाई और कंपनियों की लागत को लेकर चिंता बनी हुई है. हालांकि, शुक्रवार को सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ 74,294.96 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 75.80 अंक की बढ़त के साथ 23,346.40 पर पहुंचा था. अब निवेशक आगे की दिशा के लिए ग्लोबल संकेतों पर नजर रख रहे हैं.

एशियाई बाजारों में तेजी

एशियाई बाजारों से सोमवार को मिलेजुले लेकिन ज्यादातर पॉजिटिव संकेत मिल रहे हैं. साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 1.42 फीसदी की तेजी के साथ कारोबार कर रहा है. वहीं, ताइवान का इंडेक्स 0.54 फीसदी ऊपर है. हांगकांग का हैंग सेंग करीब 0.60 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है, जबकि शंघाई बाजार लगभग सपाट है.

जापान का बाजार सोमवार को छुट्टी के कारण बंद है. जापान के बाजार में तीन दिन की छुट्टी है और नियमित कारोबार 24 सितंबर से शुरू होगा. ऐसे में एशियाई बाजारों में कारोबार की तस्वीर कुछ अलग रह सकती है.

कुल मिलाकर एशियाई बाजारों की तेजी भारतीय शेयर बाजार के लिए एक पॉजिटिव संकेत हो सकती है, लेकिन कच्चे तेल और मिडिल ईस्ट की स्थिति अभी भी निवेशकों के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है.

अमेरिकी बाजारों का हाल

शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार में भी कारोबार का रुख मिला-जुला रहा. डॉउ जोंस 0.18 फीसदी गिरकर 51,682 पर बंद हुआ. वहीं, टेक्नोलॉजी शेयरों में खरीदारी के कारण नैस्डैक 0.39 फीसदी चढ़कर 26,522 पर पहुंच गया. S&P 500 में 0.17 फीसदी की तेजी रही और यह 7,650 के लेवल पर बंद हुआ.

यूएस बॉन्ड यील्ड का हाल

अमेरिकी बाजार में बॉन्ड यील्ड और महंगे तेल को लेकर चिंता बनी हुई है. 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5 फीसदी के आसपास पहुंचने से निवेशकों की नजर ब्याज दरों और महंगाई के संकेतों पर भी बनी हुई है.

कच्चा तेल और मिडिल ईस्ट पर नजर

कच्चे तेल की कीमतें सोमवार को कुछ नरम हुई हैं, लेकिन अभी भी हाई लेवल पर हैं. ब्रेंट क्रूड करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है. तेल की कीमतों में हालिया तेजी की बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में तनाव और सप्लाई को लेकर बनी चिंता है. हालांकि, सऊदी अरब से तेल सप्लाई में सुधार की उम्मीद और कूटनीतिक गतिविधियों के कारण कीमतों पर कुछ दबाव आया है.

ग्लोबल टेंशन से बाजार पर दबाव

रूस में संसदीय चुनाव के आखिरी दिन मॉस्को की एक ऑयल रिफाइनरी को ड्रोन हमले में निशाना बनाया गया. हमले के बाद रिफाइनरी में आग लग गई. हालांकि, इस घटना में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है. वहीं, यूएस और ईरान के बीच अभी भी टेंशन बनी हुई है जिसका असर ग्लोबल बाजारों और कच्चे तेल पर हो सकता है.



Source link