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Patna Purnia Expressway: पटना से पूर्णिया का सफर आने वाले समय में काफी आसान और तेज हो सकता है. पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के पूरा होने के बाद दोनों शहरों के बीच सड़क यात्रा करीब 3 से 4 घंटे में पूरी होने की उम्मीद है. करीब 282 किलोमीटर लंबा यह छह लेन एक्सप्रेसवे बिहार के कई जिलों को जोड़ेगा. अभी पटना से पूर्णिया जाने में ज्यादा समय लगता है. नया एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद सफर का समय घटेगा.
पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को तेज रफ्तार यातायात के लिए डिजाइन किया जा रहा है. इस छह लेन कॉरिडोर पर वाहनों की अधिकतम डिजाइन गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक रखी गई है. यानी एक्सप्रेसवे चालू होने के बाद लंबी दूरी का सफर पहले के मुकाबले काफी तेजी से पूरा हो सकेगा. हालांकि वास्तविक ड्राइविंग स्पीड ट्रैफिक, मौसम और लागू नियमों पर निर्भर करेगी. एक्सप्रेसवे का निर्माण ग्रीनफील्ड परियोजना के तौर पर हो रहा है. इसका मकसद बिहार के उत्तर-पूर्वी हिस्से को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी देना और पटना से पूर्णिया के बीच यात्रा को आसान बनाना है. (इमेज AI से बनाई गई हैं.)
प्रस्तावित पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे का कॉरिडोर हाजीपुर के मीरनगर से शुरू होकर बिहार के कई जिलों से गुजरेगा. इसका रास्ता समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा और मधेपुरा होते हुए पूर्णिया जिले के डगरूआ यानी हंसदह तक जाएगा. करीब 282 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर को छह लेन का बनाया जा रहा है. इस रूट से कई इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी. एक्सप्रेसवे का निर्माण पूरा होने के बाद पटना से पूर्णिया के बीच यात्रा का समय घटने की उम्मीद है. साथ ही रास्ते में आने वाले शहरों और कस्बों को भी तेज सड़क नेटवर्क से जुड़ने का फायदा मिलेगा.
यह सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर का नेटवर्क होगा. करीब 282 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे पर 21 बड़े पुल और 140 छोटे पुल प्रस्तावित हैं. इसके अलावा 11 रेलवे ओवरब्रिज भी बनाए जाने हैं. एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों में कुल 21 इंटरचेंज और 322 अंडरपास का प्रस्ताव है. इन संरचनाओं का उद्देश्य एक्सप्रेसवे पर तेज यातायात बनाए रखने के साथ स्थानीय सड़कों और रेलवे लाइनों को सुरक्षित तरीके से पार कराना है. इतने बड़े स्तर पर पुल, ओवरब्रिज और अंडरपास बनने से परियोजना का निर्माण कार्य भी काफी बड़ा होगा. जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है.
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पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे को बिहार के दूसरे बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क से भी जोड़ा जाएगा. वैशाली में यह आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे से कनेक्ट होगा. इससे बिहार के अलग-अलग हिस्सों के बीच एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी का नेटवर्क मजबूत होने की उम्मीद है. एक एक्सप्रेसवे से दूसरे एक्सप्रेसवे तक कनेक्शन मिलने से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले वाहनों को बेहतर रूट मिल सकता है. खासकर उत्तर बिहार के जिलों के लिए यह कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण होगी. पटना से पूर्णिया की ओर जाने वाले यात्रियों के अलावा कारोबार और माल ढुलाई से जुड़े वाहनों को भी इसका फायदा मिलने की उम्मीद है.
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे की खास बात यह भी है कि पूर्णिया जिले में अकेले 8 इंटरचेंज प्रस्तावित हैं. इसके अलावा पूर्णिया एयरपोर्ट को भी एक्सप्रेसवे से सीधा जोड़ने की योजना है. एयरपोर्ट कनेक्टिविटी बेहतर होने से आसपास के जिलों से यहां पहुंचना आसान हो सकता है. यात्रियों के साथ कारोबार और पर्यटन से जुड़े लोगों को भी इसका फायदा मिलने की उम्मीद है. एक्सप्रेसवे का यह हिस्सा पूर्णिया को बिहार के बड़े सड़क नेटवर्क से जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकता है. परियोजना पूरी होने के बाद एयरपोर्ट तक तेज और सुगम सड़क कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है.
पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया छह जिलों में आगे बढ़ रही है. NHAI ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है. परियोजना पूरी होने के बाद करीब 282 किलोमीटर का छह लेन एक्सप्रेसवे बिहार के कई जिलों को तेज सड़क नेटवर्क से जोड़ेगा. इसमें बड़े पुल, छोटे पुल, रेलवे ओवरब्रिज, इंटरचेंज और अंडरपास जैसी कई संरचनाएं शामिल होंगी. सबसे बड़ा फायदा पटना और पूर्णिया के बीच यात्रा समय में कमी के रूप में देखने को मिल सकता है. लक्ष्य पूरा हुआ तो दोनों शहरों के बीच सफर करीब 3 से 4 घंटे का हो सकता है.