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श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास खड़े ईरानी कच्चे तेल के टैंकरों पर सवार 27 चालक दल के सदस्य बीमार पड़ गए. श्रीलंकाई नौसेना ने दो नौकाओं की मदद से उन्हें गाले बंदरगाह तक पहुंचाया. इसके बाद उन्हें इलाज के लिए कोलंबो के एक निजी अस्पताल भेजा गया. गाले के पास ईरान के करीब एक दर्जन खाली तेल टैंकर खड़े हैं.
श्रीलंका ने ईरानी जहाज के नाविकों को बचाया.
श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास खड़े ईरान के तेल टैंकरों पर सवार 27 चालक दल के सदस्यों की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें मेडिकल सहायता के लिए किनारे लाया गया. श्रीलंकाई अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार को नाविकों को गाले बंदरगाह पहुंचाया गया और फिर इलाज के लिए राजधानी कोलंबो के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराने की खबर है. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच ईरानी तेल व्यापार और उससे जुड़े समुद्री परिवहन पर निगरानी बनी हुई है.
नौसेना की मदद से नाविकों को लाया गया किनारे
श्रीलंकाई मीडिया आउटलेट डेली मिरर के मुताबिक, बीमार नाविकों को शनिवार दोपहर जहाजों से निकालकर किनारे लाया गया. गाले बंदरगाह श्रीलंका की राजधानी कोलंबो से करीब 115 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है. विदेश मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद श्रीलंकाई नौसेना ने नाविकों को बंदरगाह तक पहुंचाने के लिए दो नौकाएं तैनात कीं. इसके बाद उन्हें मेडिकल हेल्प के लिए अस्पताल भेजा गया. दक्षिणी प्रांत के वरिष्ठ उप पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय के हवाले से बताया गया कि ये 27 लोग दक्षिणी तट के पास खड़े ईरानी कच्चे तेल के टैंकरों पर सवार थे. हालांकि, उनकी बीमारी की वजह और उनकी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति के बारे में और ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है.
गाले के पास खड़े हैं एक दर्जन खाली टैंकर
रिपोर्ट के मुताबिक, गाले बंदरगाह के पास ईरान के करीब एक दर्जन यानी 12 खाली तेल टैंकर खड़े हैं. इससे पहले श्रीलंका ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में फंसे ईरानी तेल टैंकरों और जहाजों की मदद करने से इनकार कर दिया था. इसकी वजह अमेरिका के संभावित सेकेंडरी प्रतिबंधों का खतरा बताया गया था. सेकेंडरी प्रतिबंधों का मतलब ऐसे प्रतिबंधों से है, जिनके तहत किसी तीसरे देश या उसकी कंपनियों पर भी कार्रवाई हो सकती है, अगर वे प्रतिबंधित देश के साथ कुछ खास तरह का कारोबार करती हैं. हालांकि, इस मामले में श्रीलंका के अधिकारियों ने बीमार नाविकों को चिकित्सा सहायता देने के कदम को मानवीय जिम्मेदारी के तौर पर पेश किया है.
जहाज डूबने पर भी की थी मदद
इस घटनाक्रम से पहले मार्च में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरान के युद्धपोत ‘IRIS डेना’ के डूबने की घटना सामने आई थी. खबर के मुताबिक, एक अमेरिकी पनडुब्बी ने युद्धपोत को डुबो दिया था, जिसमें 104 नाविकों की मौत हुई थी. श्रीलंकाई नौसेना ने उस युद्धपोत से 32 ईरानी नाविकों को बचाया था. वहीं, ईरान का एक अन्य नौसैनिक जहाज श्रीलंका के उत्तर-पूर्व में स्थित त्रिंकोमाली बंदरगाह पर सुरक्षित आश्रय की तलाश में पहुंचा था. फिलहाल, बीमार 27 नाविकों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध करा दी गई है.