जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे: मैहर-सतना-रीवा-प्रयागराज को मिलेगी हाई-स्पीड लाइफलाइन, समय व दूरी की होगी बचत, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे: मैहर-सतना-रीवा-प्रयागराज को मिलेगी हाई-स्पीड लाइफलाइन, समय व दूरी की होगी बचत, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा


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Jabalpur Varanasi High Speed Corirdor: जबलपुर-वाराणसी हाई-स्पीड कॉरिडोर नेटवर्क से MP-UP के बीच सफर तेज होगा. इसमें सागर-सतना एक्सप्रेसवे, विंध्य एक्सप्रेसवे और प्रयागराज-जबलपुर-नागपुर कॉरिडोर शामिल हैं. मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच सफर को तेज और आसान बनाने के लिए जबलपुर-वाराणसी हाई-स्पीड कॉरिडोर नेटवर्क को बड़ी सौगात मिलने जा रही है. इस नेटवर्क के तैयार होने के बाद मैहर, सतना, रीवा होते हुए जबलपुर से प्रयागराज और वाराणसी तक का सफर घंटों कम हो जाएगा. इसे एमपी-यूपी के बीच नई लाइफलाइन कहा जा रहा है. योजना के अनुसार यह कोई एक एक्सप्रेसवे नहीं, बल्कि तीन बड़े कॉरिडोर का नेटवर्क है.

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जबलपुर वाराणसी हाई स्पीड कॉरीडोर

वाराणसीः मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच सफर को तेज और आसान बनाने के लिए जबलपुर-वाराणसी हाई-स्पीड कॉरिडोर नेटवर्क को बड़ी सौगात मिलने जा रही है. इस नेटवर्क के तैयार होने के बाद मैहर, सतना, रीवा होते हुए जबलपुर से प्रयागराज और वाराणसी तक का सफर घंटों कम हो जाएगा. इसे एमपी-यूपी के बीच नई लाइफलाइन कहा जा रहा है. योजना के अनुसार यह कोई एक एक्सप्रेसवे नहीं, बल्कि तीन बड़े कॉरिडोर का नेटवर्क है.

तीन चरणों में होगा पूरा, डीपीआर अंतिम चरण में

इसमें सबसे अहम है सागर-सतना एक्सप्रेसवे. करीब 227 किलोमीटर लंबा यह फोर-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे सागर, दमोह, पन्ना, कटनी, मैहर होते हुए सतना तक जाएगा. इसकी लागत करीब 9,850 करोड़ रुपये आंकी गई है और इसका डीपीआर अंतिम चरण में है. अभी सागर से सतना की दूरी 300 किलोमीटर है, जो नए एक्सप्रेसवे के बाद 73 किलोमीटर घटकर 227 किलोमीटर रह जाएगी. सफर जो अभी 7-8 घंटे में होता है, वह 3-4 घंटे में पूरा होगा. दूसरा बड़ा हिस्सा है विंध्य एक्सप्रेसवे. 320 से 330 किलोमीटर लंबा यह सिक्स-लेन कॉरिडोर प्रयागराज से शुरू होकर मिर्जापुर, वाराणसी, चंदौली होते हुए सोनभद्र तक जाएगा. इससे रीवा, सतना, सीधी और शहडोल जिलों को पूर्वी उत्तर प्रदेश से सीधी तेज कनेक्टिविटी मिलेगी. अनुमान है कि प्रयागराज-सोनभद्र रूट पर 3 से 5 घंटे समय की बचत होगी, जिससे सीमेंट, चूना पत्थर, कोयला और कृषि उत्पादों के परिवहन को बड़ी राहत मिलेगी.

2 घंटे का समय और 195 की दूरी का होगा बचत

तीसरा लिंक प्रयागराज-जबलपुर-नागपुर कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसे केंद्र और एमपी सरकार के एक लाख करोड़ रुपये के रोड डील में शामिल किया गया है.अधिकारियों के मुताबिक, सागर-सतना एक्सप्रेसवे के बनने से भोपाल से रीवा-प्रयागराज का सफर 590 किलोमीटर से घटकर सिर्फ 395 किलोमीटर रह जाएगा, यानी करीब 2 घंटे की बचत होगी. साथ ही यह बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र को सीधे जोड़ेगा और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे व यूपी के बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से भी जुड़ेगा. फिलहाल ये परियोजनाएं डीपीआर और टेंडर प्रक्रिया में हैं, इसलिए जमीन पर काम शुरू होने में समय लगेगा. लेकिन पूरी होने पर जबलपुर से वाराणसी तक धार्मिक पर्यटन, व्यापार और रियल एस्टेट को नई रफ्तार मिलेगी.



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