ग्रेटर नोएडा: इमारतों में दरारें हों या सार्वजनिक जमीन पर संभावित अवैध अतिक्रमण, समय रहते इनकी पहचान करना बड़ी चुनौती है. इसी समस्या का तकनीकी समाधान तलाशने के लिए बीटेक के तीन युवा छात्रों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोनॉमस ड्रोन पर आधारित एक प्रोजेक्ट आइडिया तैयार किया है. भूमि डिस्ट्री’ नाम से प्रस्तावित इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य ड्रोन की मदद से इमारतों और उनके आसपास के क्षेत्रों की निगरानी करना, संभावित खामियों की पहचान करना और संबंधित अधिकारियों तक जानकारी पहुंचाना है. ग्रेटर नोएडा स्थित आईटीएस कॉलेज में आयोजित हैकाथॉन में पहुंचे इन युवाओं की पहल का केंद्र भवन सुरक्षा और हादसों को रोकने के लिए समय रहते कदम उठाने की सोच है.
दिल्ली के सत्य निकेतन क्षेत्र में हॉस्टल की इमारत ढहने जैसी घटनाएं यह सवाल खड़ा करती हैं कि क्या तकनीक की मदद से भवनों में मौजूद खतरों के संकेत पहले पहचाने जा सकते हैं. इसी दिशा में काम करने की सोच के साथ दिल्ली टेक्निकल कैंपस के बीटेक छात्र शिवम प्रसाद और उनकी टीम ने इस आइडिया को सामने रखा है. टीम में वैभव शर्मा, अपूर्व यादव और नमण्या शामिल हैं.
हादसे से पहले मिले खतरे के संकेत
शिवम प्रसाद ने बताया कि इमारतों की सुरक्षा के लिए नियमित निरीक्षण जरूरी है, लेकिन पारंपरिक तरीके से जांच करने में समय लगता है और कई बार ऊंचाई या दुर्गम स्थानों तक पहुंचना मुश्किल होता है. ऐसे में ऑटोनॉमस ड्रोन निर्धारित क्षेत्र का अपने आप सर्वेक्षण कर सकेंगे. ड्रोन दीवारों, भवनों के बाहरी हिस्सों और आसपास के क्षेत्रों की हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करेगा. इसके बाद AI तकनीक की मदद से तस्वीरों का विश्लेषण कर दरारों और सतह को हुए नुकसान जैसे संभावित संकेतों को चिह्नित करने का लक्ष्य है. कहा कि तकनीक के जरिए शुरुआती स्तर पर जानकारी मिलने से विशेषज्ञों की जांच और जरूरी कार्रवाई समय पर कराने में मदद मिल सकती है.
निगरानी और रिपोर्टिंग होगी व्यवस्थित
टीम के सदस्य वैभव शर्मा ने कहा कि ड्रोन से केवल तस्वीरें लेना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था विकसित करना भी जरूरी है, जिससे निरीक्षण की जानकारी व्यवस्थित रूप में उपलब्ध हो सके. प्रस्तावित सिस्टम में AI द्वारा चिह्नित समस्याओं की तस्वीरें, उनकी लोकेशन और संबंधित टिप्पणियों के साथ रिपोर्ट तैयार करने की योजना है. बताया कि यह जानकारी संबंधित अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों तक पहुंचाई जा सकेगी. इससे निरीक्षण के रिकॉर्ड को संभालने और आगे की जांच की प्राथमिकताएं तय करने में मदद मिल सकती है. टीम का उद्देश्य मैनुअल निरीक्षण का बोझ कम करना और निगरानी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है.
अतिक्रमण की पहचान में भी मिलेगी मदद
टीम के सदस्य अपूर्व यादव ने बताया कि इस तकनीक का दायरा सिर्फ भवनों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है. ड्रोन से आसपास के क्षेत्रों की निगरानी कर संभावित अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण के संकेतों को भी चिह्नित करने की योजना है. तस्वीरों और वीडियो के विश्लेषण के जरिए संबंधित स्थानों की जानकारी जुटाई जा सकती है, जिससे अधिकारियों को आगे की जांच में सहायता मिल सके. हालांकि, किसी भी निर्माण को अवैध घोषित करने के लिए संबंधित रिकॉर्ड और प्रशासनिक सत्यापन जरूरी होगा.
इंजीनियरों का विकल्प नहीं, उनकी मददगार तकनीक
कहा कि यह प्रोजेक्ट स्ट्रक्चरल इंजीनियरों की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें बेहतर डेटा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है. AI से मिलने वाले संकेतों की विशेषज्ञों द्वारा जांच जरूरी होगी. प्रोजेक्ट की वास्तविक उपयोगिता ड्रोन के विकास, AI की सटीकता और फील्ड टेस्टिंग के परिणामों पर निर्भर करेगी.