न फीस, न बड़ा मंच…बस गायकी का जुनून! मुफ्त रामधुनी से शुरू हुआ सफर, आज बने जाने-माने लोक गायक

न फीस, न बड़ा मंच…बस गायकी का जुनून! मुफ्त रामधुनी से शुरू हुआ सफर, आज बने जाने-माने लोक गायक


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Begusarai Folk Singer Tinku Success Story: बिहार के बेगूसराय में बाढ़ प्रभावित इलाके के नयागांव से निकले लोक गायक टिंकू ने 1993-94 में मुफ्त में रामधुनी से गायकी की शुरुआत की थी. उस दौर में भक्ति कार्यक्रमों में गाने के बदले पैसे नहीं मिलते थे. धीरे-धीरे शादी, मुंडन, जनेऊ और अन्य संस्कारों में गायकी की मांग बढ़ी तो कमाई भी बढ़ी. LOCAL18 पर देखिए उनके सफर की कहानी.

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बेगूसराय: कला संस्कृति बिहार की पुरानी पहचान और धार्मिक आयोजन की शान माना जाता रहा है. रामधुनी में सीताराम सीताराम गानें वाला लड़का आगे चलकर एक इलाके का प्रसिद्ध लोक गायक बन सकता है.ये उम्मीद भी आप नहीं कर सकते हैं. लेकिन ऐसे ही व्यक्ति से आज आपकी मुलाकात लोकल 18 पर करवाते हैं. बिहार के बेगूसराय जिले में मटिहानी प्रखंड के बाढ़ प्रभावित इलाके के नयागांव से निकलकर लोक गायकी के क्षेत्र में पहचान बनाने वाले अमितेश कुमार दीपू उर्फ टिंकू की कहानी मेहनत और जुनून की मिसाल है. साल 1993-94 में रामधुनी से मुफ्त में गायकी की शुरुआत करने वाले टिंकू ने कभी नहीं सोचा था कि गांव की यह शुरुआत आगे चलकर उनके लिए कमाई का जरिया भी बनेगी.

रामधुनी से हुई गायकी की शुरुआत
लोकल 18 पर अमितेश कुमार दीपू ने बताया पहले से ही गांव में रामधुनी कार्यक्रमों में जाते थे. इसी दौरान धीरे-धीरे गायकी में रुचि बढ़ी और उन्होंने 1993-94 के आसपास इसे अपने करियर के तौर पर अपनाना शुरू किया. उस समय रामधुनी को धार्मिक कार्यक्रम माना जाता था और इसमें गाने वाले कलाकार पैसे नहीं लेते थे.
इसके बाद गांव में बाढ़ आता था तो मजबूरी भी ऐसे कार्यक्रम में जाना रहा था चूंकि यहां कुछ आशीर्वाद के रूप में धनराशि महज 100 ही क्यों न हो मिल जाता था. आगे संघर्ष करता रहा पर आज शादी, मुंडन, जनेऊ, श्राद्ध कर्म और दूसरे संस्कारों के कार्यक्रमों में हमें बुलाया जाने लगा. आज बेगूसराय के मटिहानी प्रखंड समेत करीब 20 गांवों में उनके कार्यक्रम होते हैं.

आज एक कार्यक्रम की फीस ₹30 हजार तक
टिंकू के मुताबिक आज उनकी गायकी की डिमांड पहले के मुकाबले काफी बढ़ गई है. कई कार्यक्रमों की एडवांस बुकिंग भी होती है. एक कार्यक्रम के लिए उन्हें करीब ₹25 हजार से ₹30 हजार तक मिलते हैं. इसके अलावा कार्यक्रम में मिलने वाले पुरस्कार से भी कमाई होती है. उनके मुताबिक, एक कार्यक्रम से खर्च निकालने के बाद करीब ₹10-15 हजार तक बचत हो जाती है. महीने में कार्यक्रमों की संख्या के हिसाब से उनकी कमाई ₹50 हजार से अधिक तक पहुंच जाती है.

युवाओं के लिए रोजगार का जरिया बन सकती है कला
टिंकू का मानना है कि संगीत और लोक गायकी केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि मेहनत और हुनर के साथ यह रोजगार का जरिया भी बन सकता है. गांव की रामधुनी से शुरू हुआ उनका सफर आज शादी-विवाह और संस्कारों के कार्यक्रमों तक पहुंच चुका है. 33 साल से अधिक समय से गायकी से जुड़े टिंकू के लिए सबसे बड़ी खुशी यह है कि आज लोग उनके कार्यक्रम को पहले से बुक करते हैं. गांव की गलियों से शुरू हुआ उनका यह सफर अब एक पहचान और कमाई, दोनों का जरिया बन चुका है.



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