राजस्थान के एक दावे से यूपी में हलचल, कागज लेकर गली-गली घूम रहे DM, सच हुआ दावा तो टूटेंगी दुकानें, दफ्तर और घर

राजस्थान के एक दावे से यूपी में हलचल, कागज लेकर गली-गली घूम रहे DM, सच हुआ दावा तो टूटेंगी दुकानें, दफ्तर और घर


आगरा: राजस्थान सरकार ने आगरा, प्रयागराज, वाराणसी और मथुरा में पुरानी जयपुर रियासत की संपत्तियों पर मालिकाना हक का दावा किया है. इसके बाद यूपी सरकार ने सात दशक से भी पुराने रेवेन्यू और मालिकाना हक के रिकॉर्ड्स की दोबारा जांच शुरू कर दी है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्यूमेंट्स से पता चला है कि राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने यूपी सरकार से इन संपत्तियों को राजस्थान के नाम पर दर्ज करने को कहा है. इसके बाद यूपी बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के कमिश्नर ने चारों जिलों के डीएम को रिकॉर्ड्स की जांच करने और रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है.

राजस्थान सरकार ने ‘राजस्थान समझौते’ के आधार पर किया दावा
राजस्थान सरकार ने अपना दावा 1949 में हुए ‘राजस्थान समझौते’ (Rajasthan Covenant) के आर्टिकल VI(2)(c) और 1952 में विलय के समय के रिकॉर्ड्स के आधार पर किया है. उनका कहना है कि विलय के बाद राजस्थान के बाहर स्थित पुरानी जयपुर रियासत की संपत्तियां राजस्थान सरकार को मिल गई थीं. इस दावे के बाद पुरानी बिक्री डीड, म्यूटेशन, डेवलपमेंट स्कीम और मौजूदा कब्जे की जांच शुरू हो गई है. क्योंकि रियासतों के खत्म होने के कई दशक बाद इनमें से कई संपत्तियों के मालिक बदले या उन पर डेवलपमेंट का काम हुआ.

जयपुर हाउस पर मंदिर से लेकर दफ्तर तक
आगरा में, राजस्थान के दावे में जयपुर हाउस की लगभग 100 बीघा जमीन, दो हवेलियां, सदाशिव मान कामेश्वर मंदिर और सड़क की जमीन का एक हिस्सा शामिल है. जयपुर हाउस अब घनी आबादी वाला रिहायशी और कमर्शियल इलाका बन गया है और यहां आगरा डेवलपमेंट अथॉरिटी (ADA), GST भवन और BJP व RSS के दफ्तर हैं. हालांकि, आगरा प्रशासन की शुरुआती जांच में ऐसे रिकॉर्ड मिले हैं जो राजस्थान के दावे को मुश्किल में डाल सकते हैं.

आगरा में 100 बीघा जमीन जयपुर हाउस के
दस्तावेजों से पता चला है कि खतौना गांव में खसरा नंबर 554 के तहत 59 बीघा और 17 बिस्वा जमीन, 31 मई 1969 को आगरा नगर निगम के तत्कालीन मुख्य नगर अधिकारी ने राजस्थान PWD के प्रॉपर्टी अधिकारी से एक रजिस्टर्ड डीड के जरिए खरीदी थी. जयपुर हाउस एस्टेट की व्यापक जांच कर रहे अधिकारियों को अलग से लगभग 100 बीघा जमीन के पुराने रिकॉर्ड मिले हैं, जिससे मौजूदा मालिकाना हक तय करने के लिए ज़मीन के अलग-अलग हिस्सों और बाद में हुए लेन-देन का इतिहास अहम हो गया है.

एडीए ने कहा- राजस्थान सरकार के पीडब्ल्यूडी से खरीदी गई थी जमीन
ADA की वाइस-चेयरपर्सन एम. अरुणमौलि ने TOI को बताया, “दस्तावेजों की जांच से साफ है कि यह जमीन म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने राजस्थान सरकार के PWD से खरीदी थी. एक रिपोर्ट तैयार की जा रही है और उसे राज्य सरकार को भेजा जाएगा. सरकार के स्तर पर लिए गए फ़ैसले के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.”

प्रयागराज में भी दावे की जांच जारी
राजस्थान के इस दावे का प्रयागराज में तुरंत और बड़ा असर हुआ है. वहां अधिकारियों ने कटरा सवाई जय सिंह इलाके में 35.25 एकड़ में फैले 1,263 घरों और दुकानों की पहचान की है. जिला प्रशासन ने इन संपत्तियों की खरीद-बिक्री पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है. अधिकारी पुराने मालिकाना हक के रिकॉर्ड, म्यूटेशन और मौजूदा कब्जे की जांच कर रहे हैं. रिकॉर्ड की जांच पूरी होने तक इलाके के एक बड़े हिस्से में लेन-देन पर रोक लगा दी गई है.

वाराणसी और मथुरा में भी जांच शुरू
वाराणसी और मथुरा में भी इसी तरह की जांच शुरू हो गई है. राजस्थान ने वाराणसी के मानमंदिर इलाके में 44 घरों और मानमंदिर घाट पर अपना दावा जताया है. वहीं, मथुरा में उसका दावा लगभग 2.16 एकड़ ज़मीन पर है, जिसमें जसवंतगंज धर्मशाला के छह कमरे भी शामिल हैं. दोनों जिलों में रेवेन्यू और म्युनिसिपल अधिकारी अपनी रिपोर्ट UP सरकार को भेजने से पहले पुराने रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं.



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