क्या जेडीयू में अनंत सिंह के दिन पूरे हो गए? ललन सिंह के लिए तल्खी, निशांत कुमार पर तंज और अब जन सुराज की चर्चा

क्या जेडीयू में अनंत सिंह के दिन पूरे हो गए? ललन सिंह के लिए तल्खी, निशांत कुमार पर तंज और अब जन सुराज की चर्चा


पटना. बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट के चुनाव में मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह ने अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और जन सुराज के अनुज सिंह के साथ खड़े हो गए. नीतीश कुमार ने मनाने के लिए अपने सबसे भरोसेमंद चेहरे ललन सिंह को भेजा, बातचीत भी हुई, लेकिन बात बनी नहीं. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पहल, निशांत कुमार की सक्रियता और संजय झा की भूमिका भी इस विवाद को शांत नहीं कर सकी. अब नई बात और हुई है कि वोटिंग वाले दिन (23 अक्टूबर को) अनंत सिंह ने ललन सिंह को ही पहचानने से इनकार कर दिया, कहा बिहार में 100 ललन सिंह हैं, मैं नहीं जानता. बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच इस बयान के बड़े मायने हैं क्योंकि अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच का विवाद अब केवल दो नेताओं की व्यक्तिगत अदावत नहीं रह गई है. यह जदयू के नेतृत्व, पार्टी अनुशासन और भीतर चल रहे राजनीतिक समीकरणों की परीक्षा भी बन गया है.

शुरुआत कहां से हुई, पुरानी खुन्नस क्यों निकली?

दरअसल, यह लड़ाई अभी की नहीं है. अनंत सिंह का आरोप है कि मोकामा विधानसभा चुनाव के वक्त जब वह जदयू में थे और नीतीश सरकार को समर्थन दे रहे थे, तब नीरज कुमार ने उनके खिलाफ प्रचार किया था. अनंत सिंह ने इसकी शिकायत पार्टी से की, लेकिन तब कोई एक्शन नहीं हुआ. अब जब पार्टी ने उसी नीरज कुमार को पटना स्नातक से टिकट दे दिया, तो अनंत सिंह ने क्रिया पर प्रतिक्रिया दी और बीते एक अक्टूबर को वह सीधे जन सुराज के अनुज सिंह के नामांकन में पहुंच गए और ऐलान कर दिया कि वह नीरज को नहीं, अनुज को जिताएंगे.

ललन सिंह को भेजा गया मनाने, समझौता आधा अधूरा रहा

मामला बढ़ा तो पूर्व मुख्यमंत्री और जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार खुद एक्टिव हुए. केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के घर गए, फिर ललन सिंह ने अनंत सिंह से बंद कमरे में बात की. बातचीत के बाद ललन सिंह ने खुद माना कि पार्टी से चूक हुई थी, तब कार्रवाई होनी चाहिए थी. एक अस्थायी समझौता हुआ कि अनंत सिंह नीरज के खिलाफ जुबानी हमला नहीं करेंगे, लेकिन प्रचार भी नहीं करेंगे और अनुज का समर्थन जारी रखेंगे. यानी दिल नहीं मिले, सिर्फ मुंह बंद करने की डील हुई.

अनंत सिंह का ललन सिंह को नहीं पहचानने वाला बयान, MLC चुनाव परिणाम के बाद बढ़ी कार्रवाई की चर्चा

समझौता टूटा, फिर शुरू हुआ बयानों का वार

हालांकि, ललन सिंह की कोशिशों के बाद भी अनंत सिंह का रुख नहीं बदला और डील ज्यादा दिन टिकी नहीं. इस बीच बीते 9 अक्टूबर को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पहल पर एनडीए विधायकों की बैठक हुई. इसमें गठबंधन के उम्मीदवारों के खिलाफ प्रचार करने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई, लेकिन इसके बावजूद अनंत सिंह ने अनुज सिंह का समर्थन जारी रखा. इसके बाद बीते 18 अक्टूबर को अनंत सिंह ने फिर मंच से चैलेंज दिया, कोई भी अपनी जमानत नहीं बचा पाएगा. फिर 23 अक्टूबर को वोटिंग वाले दिन दो बड़े सियासी घटनाक्रम हुए. पहला, मोकामा प्रखंड कार्यालय के बाहर नीरज और अनंत समर्थकों में वोट देने से रोकने को लेकर धक्का-मुक्की हो गई, पुलिस को 6 लोगों को हिरासत में लेना पड़ा. दूसरा, इसी दिन मीडिया ने पूछा कि ललन सिंह किसके साथ हैं, तो अनंत सिंह ने कह दिया, बिहार में एकाध सौ ललन सिंह हैं और दिल्ली वाले ललन सिंह को हम नहीं जानते. उनका यह बयान बताता है कि मनाने वाला मिशन पूरी तरह फेल हो गया है.

इस सियासी खेल में संजय झा और निशांत कुमार कहां से आए

दरअसल, अनंत सिंह खेमे का साफ मानना है कि नीरज कुमार को टिकट दिलाने में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की बड़ी भूमिका है, इसलिए गुस्सा उन पर भी है. दूसरी तरफ नीतीश कुमार के बेटे और बिहार सरकार के मंत्री निशांत कुमार खुलकर नीरज के लिए वोट मांगते दिखे. इस बारे में जब अनंत सिंह से पूछा गया तो उन्होंने तंज में कहा, वह पार्टी के मालिक हैं, कहीं भी जा सकते हैं. यानी लड़ाई अब सिर्फ नीरज तक नहीं, जेडीयू के नए पावर सेंटर तक पहुंच गई है.

अब आगे क्या, कार्रवाई होगी या अनंत जन सुराज जाएंगे

वोटिंग 23 अक्टूबर को हो गई और अब 27 अक्टूबर को आने वाले चुनाव परिणाम की प्रतीक्षा है. वहीं, अब खुले तौर पर अनंत सिंह खुद कह रहे हैं, मैं चाहता हूं पार्टी (जेडीयू) मुझ पर कार्रवाई करे. उन्होंने एक नहीं कई बार साफ-साफ कहा है कि- “न मरने का गम, न जीने की खुशी.” ऐसे में राजनीति के जानकार कहते हैं कि पार्टी के पास अब दो विकल्प हैं. अगर रिजल्ट में नीरज कुमार हारते हैं और अनुज सिंह की जीत में अनंत सिंह की भूमिका दिखती है, तो पार्टी को अनुशासन दिखाने के लिए नोटिस या निलंबन करना पड़ेगा. अगर नीरज कुमार जीत जाते हैं, तो भी कार्रवाई का दबाव रहेगा, क्योंकि एक विधायक ने खुलेआम पार्टी लाइन तोड़ी है.

क्या जदयू छोड़कर जन सुराज में जाएंगे अनंत सिंह?

तो क्या अब आर या पार; हो कर रहेगा?

वहीं, दूसरा सवाल जन सुराज का है. प्रशांत किशोर लगातार अनंत सिंह को मंच दे रहे हैं, अनंत सिंह भी जन सुराज के मंच से अनुज सिंह जिंदाबाद के नारे लगवा चुके हैं. अगर जदयू एक्शन लेती है तो अनंत सिंह के लिए जन सुराज एक तैयार विकल्प है. फिलहाल वह खुद को जेडीयू में ही बता रहे हैं, लेकिन जिस अंदाज में उन्होंने कहा कि मैं कार्रवाई चाहता हूं, उससे लगता है कि उन्होंने मन बना लिया है कि आर-पार तो अब होकर रहेगा. वहीं, जदयू के लिए यह फैसला आसान नहीं होगा, क्योंकि अनंत सिंह मोकामा के प्रभावशाली विधायक हैं और उनका अपना राजनीतिक आधार है. पार्टी उन्हें बाहर का रास्ता दिखाती है तो इसका असर मोकामा और आसपास के इलाकों में पड़ सकता है. दूसरी ओर, कार्रवाई नहीं होने पर पार्टी अनुशासन को लेकर सवाल उठ सकते हैं.



Source link