Last Updated:
Narmadapuram Tirth : मध्य प्रदेश का होशंगाबाद जिसे अब आधिकारिक रूप से नर्मदापुरम कहा जाता है, अपने पावन धर्मस्थली के लिए विश्वविख्यात है. यहां पर्यटकों की भारी भीड़ लगी रहती है क्योंकि होशंगाबाद मुंबई और दिल्ली से बेहद करीब है. यह इटारसी से महज 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यह इलाका आसानी से दिल्ली और मुंबई के लोगों के लिए सुलभ है. इस क्षेत्र की विशेषता यह है कि यहां की आबो-हवा में आध्यात्मिकता और नैसर्गिक सौंदर्य का अनूठा संगम देखने को मिलता है. पुरातन नगरी रागडाल से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह स्थान यात्रियों को अपनी शांत और मनोरम वादियों से बरबस अपनी ओर आकर्षित करता है.
होशंगाबाद के तीर्थ स्थान. Photo : News18
Narmadapuram Tirth : इटारसी से महज 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होशंगाबाद की फिजां हमेशा भक्तिमय रहती है. यहां मां नर्मदा नदी के किनारे कई तीर्थ स्थल हैं. नर्मदा नदी के पावन हिलकोरों से स्पर्शित यह धाम अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऊंचे-ऊंचे पर्वतों, विशाल पेड़ और प्राचीन मंदिरों के लिए जाना जाता है. यहां आने वाले भक्तगण सबसे पहले नर्मदा के तट पर पहुंचकर पवित्र जल में डुबकी लगाते हैं, जिससे मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति होती है. नर्मदा माता की कल-कल ध्वनि और यहां गूंजने वाले मंत्रों से यह संपूर्ण वातावरण भक्तिमय बना रहता है. भक्तों को मानसिक शांति प्रदान करने वाला यह पावन क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है. मां नर्मदा की लहरों से स्पर्शित होने के कारण अब इसका नाम ‘नर्मदापुरम’ हो गया है. यहां पग-पग पर आध्यात्मिकता की छटा बिखरती रहती है.
मां नमर्दा को मिली है वरदान
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां नर्मदा को भगवान शिव की पुत्री कहा जाता है. शिव के पसीने से जन्मी नर्मदा इस पृथ्वी को पुनीत करने वाली परम करणामयी हैं. भगवान शिव से नर्मदा को यह वरदान प्राप्त है कि उनकी पावन धारा में स्नान करने वाले भक्तों के सभी पाप धुल जाते हैं. यही कारण है कि स्नान करते समय भक्तगण मन, वचन और कर्म से नर्मदा मैया का ध्यान करते हुए डुबकी लगाते हैं. नर्मदा के शिव से जुड़े होने के कारण यहां के सभी घाटों पर भगवान शिव की विशेष आराधना की जाती है. पुराणों में भी कहा गया है कि नर्मदा स्नान से न केवल मनुष्य के सारे पाप कट जाते हैं, बल्कि उसके सभी मनोकामनाएं भी सिद्ध हो जाते हैं. एक ओर पावन नर्मदा नदी का निरंतर प्रवाह और दूसरी ओर भगवान शंकर की आराधना, इन दोनों के संगम से श्रद्धालुओं के मन में जिस आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है, वह इस तीर्थ यात्रा को और भी अधिक अविस्मरणीय बना देती है. हमारी यह पावन तीर्थ यात्रा यहीं संपन्न होती है. किसी नए और दिव्य तीर्थ की यात्रा में फिर मिलेंगे, तब तक के लिए नमस्कार!
सेठानी घाट और नर्मदा स्नान
होशंगाबाद आने वाले श्रद्धालु सबसे पहले मां नर्मदा के तट पर स्थित प्रसिद्ध घाटों पर पहुंचते हैं. विशाल प्रांगण और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच स्थित इन घाटों पर भक्तों के निरंतर आवागमन से हमेशा चहल-पहल बनी रहती है. घाटों का आध्यात्मिक दृश्य मन को प्रभु के सानिध्य में ला खड़ा कर देगा. चारों ओर पवित्र मन से उच्चारित भगवान के नाम स्मरण के अलावा और कुछ सुनाई नहीं देता. घाट की सुंदर सीढ़ियों से नदी में उतरकर भक्तगण पूरी श्रद्धा के साथ “ॐ नर्मदा मातायै नमः” का उच्चारण करते हुए पावन डुबकी लगाते हैं.ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, इन घाटों की सीढ़ियों का निर्माण तत्कालीन शासकों द्वारा करवाया गया था. यहां आने वाले भक्तों को नर्मदा नदी के तट पर कई भव्य घाट दिखाई देते हैं. यही पर कई प्रसिद्ध घाट है. इनमें से सेठानी घाट को सबसे प्रमुख माना जाता है, जिसका निर्माण सन 1851 में करवाए जाने का उल्लेख मिलता है. ऐसा माना जाता है कि इस प्रकार का भव्य और विस्तृत घाट पूरे भारत में अन्यत्र दुर्लभ है.
आध्यात्मिक ऊर्जा और संदर्शन का अनुभव
नर्मदा के तटों पर सुबह से लेकर शाम तक भक्तों की निरंतर चहल-पहल बनी रहती है. घाट की सीढ़ियों से उतरकर जब श्रद्धालु नदी में डुबकी लगाते हैं, तो उनके मन में एक अलौकिक शांति का संचार होता है. एक तरफ कल-कल बहती नर्मदा की धारा और दूसरी तरफ भगवान शिव की आराधना से जुड़ा यह वातावरण किसी भी यात्री को भौतिक चिंताओं से मुक्त कर देता है. प्राचीन काल से चली आ रही इस परंपरा के तहत होशंगाबाद के दर्शन मात्र से ही जीवन की तमाम उलझनें दूर हो जाती हैं और व्यक्ति स्वयं को प्रकृति व दिव्यता के बेहद करीब महसूस करता है.
होशंगाबाद कैसे पहुंचे
नर्मदा नदी के तट पर बसा होने के कारण इस ऐतिहासिक क्षेत्र का प्राचीन नाम नर्मदापुर था, जो समय के साथ होशंगाबाद के रूप में विख्यात हुआ. यह पावन धाम मध्य प्रदेश के प्रमुख जंक्शन इटारसी से केवल 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यहां पहुंचने के लिए देश के सभी बड़े शहरों से सड़क और रेल मार्ग की बेहतरीन सुविधा उपलब्ध है. इस क्षेत्र की विशेषता यह है कि यहां की आबो-हवा में आध्यात्मिकता और नैसर्गिक सौंदर्य का अनूठा संगम देखने को मिलता है. पुरातन नगरी रागडाल से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह स्थान यात्रियों को अपनी शांत और मनोरम वादियों से बरबस अपनी ओर आकर्षित करता है.