Why Indian women saying no to marriage : लड़कियां शादी से क्यों कर रहीं इंकार?

Why Indian women saying no to marriage : लड़कियां शादी से क्यों कर रहीं इंकार?


भारत एक संस्कृति और परंपराओं वाला देश माना जाता है. यहां परिवार और रिश्ते सबसे ऊपर रखें जाते हैं. इतना ही नहीं इस देश में महिलाओं को घर इज्जत माना जाता है, पति को देवता और विवाह को सात जन्मों का रिश्ता. सुनने में ये सारी बाते बहुत ही दिलचस्प और भावनाओं से भरी लगती है. लेकिन इसका एक दूसरा पक्ष भी है, जहां महिलाएं घर की इज्जत के नाम पर बंधनों में बांधी जाती है, दबायी जाती है, चार दीवारों और घुंघट में छिपने के लिए मजबूर की जाती हैं.

हालांकि अब कई जगहों पर महिलाएं अपनी शर्तों पर जी रही हैं. लेकिन आज भी ऐसे कई इलाके और घर हैं, जहां महिलाओं को अपनी मर्जी से पहनने, रहने का आजादी नहीं हैं. वो या तो एक पुरुष की बेटी के रूप में पहचानी जाती है, तो किसी की बहन या पत्नी उसका खुद का कोई वजूद नहीं होता है. ऐसे में यदि किसी सर्वे में ऐसे आंकड़े सामने आए जिसमें ज्यादातर महिलाएं शादी नहीं करना चाहती है, तो इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है.

क्या है सर्वे?
नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस के आंकड़ों के अनुसार, भारत में अविवाहित महिलाओं का प्रतिशत 2011 में 13.5% से बढ़कर 2021 में 19.9% ​​हो गया है. इसका मतलब ये नहीं है कि इन सभी महिलाओं ने जानबूझकर शादी न करने का फैसला किया है. लेकिन ये एक स्पष्ट बदलाव की ओर इशारा करता है कि कई महिलाओं के लिए शादी अब उसी रफ्तार या उसी उम्र में नहीं हो रही है, जैसी पहले होती थी.

क्यों महिलाएं शादी नहीं करना चाहती हैं?
सारे रीति-रिवाज, रिश्तों को संभालने की जिम्मेदारी सिर्फ महिलाओं पर ही थोपी गयी है. एक अच्छी बहू का टैग उसी महिला को मिलता है, जो शादी के बाद अपना पूरा जीवन अपने पति और परिवार के नाम कर देती है. ऐसे में जब महिलाओं के पास खुद की पहचान बनाने का मौका है, तो ये सवाल ही नहीं उठता है कि वो शादी करके गुमनामी की जिंदगी जिए.

पुरुषों ने हमेशा महिलाओं पर पैसे कमाने और घर के खर्च को संभालने का रौब दिखाया है. ऐसे में जब महिलाओं ने पैसे कमाना शुरू किया तो उनके पास शादी करके किसी पर निर्भर रहने और उसकी चार बातें सुनने का कोई प्रेशर नहीं बच गया.

वहीं, कुछ जिन महिलाओं में अपने आसपास की महिलाओं को शादी के बाद आए बदलावों में पीसते देखा है, मां बनने और बच्चे को संभालने के दर्द से गुजरते देखा है, उन्हें ऐसा लगता है कि शादी के बाद आजादी नहीं बच जाती है.



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