चीन संग सीमा विवाद का सैन्य समाधान नहीं..नरवणे ने क्यों दिया गलवान का हवाला
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India-China Border Dispute: भारत और चीन के बीच सैकड़ों किलोमीटर की सीमा लगती है. इसका अधिकांश क्षेत्र हिमालयन रेंज में आता है. चीन की तरफ से अक्सर किए जाने वाले दावों और गतिविधियों से LAC पर अक्सर तनाव की स्थिति पैदा हो जाती है, लेकिन गलवान की घटना के बाद दोनों देशों की ओर से सीमा विवाद को कूटनीति और संवाद से हल करने पर जोड़ दिया है.
पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने भारत-चीन सीमा विवाद पर बड़ी बात कही है. (फाइल फोटो)
India-China Border Dispute: पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने कहा है कि गलवान घाटी में जून 2020 में हुई झड़प के बाद के घटनाक्रमों ने स्पष्ट कर दिया कि चीन के साथ सीमा विवाद का सैन्य समाधान अब विकल्प नहीं है. उन्होंने कहा कि इस घटना ने दोनों देशों के बीच विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीतिक संवाद की प्रक्रिया को नई गति दी. नरवणे ने कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा का मुद्दा लंबे समय से अनसुलझा है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सीमा और विवादित सीमा के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा स्पष्ट रूप से निर्धारित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त होती है, जबकि सीमा विवाद वाले क्षेत्रों में स्थिति अधिक जटिल होती है.
पूर्व आर्मी चीफ नरवणे ने कहा कि जहां भी दोनों देशों के बीच सीमा को लेकर मतभेद हैं, वहां टकराव की आशंका बनी रहती है. नरवणे के मुताबिक, गलवान घाटी की झड़प भी इसी तरह के विवाद का एक उदाहरण थी. हालांकि, इस घटना के बाद हुए घटनाक्रमों ने यह संदेश दिया कि चीन के साथ सीमा विवाद को सैन्य कार्रवाई के जरिए हल नहीं किया जा सकता. पूर्व सेना प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने सीमा या अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को एकतरफा बल प्रयोग से बदलने के प्रयासों को अस्वीकार्य करार दिया है. उन्होंने कहा कि भारत के इस रुख से विवाद के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों को नया प्रोत्साहन मिला है.
इंटरनेशनल लेवल पर भारत की स्थिति मजबूत
नरवणे ने भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को सुलझाने में दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच वार्ता तंत्र की अहमियत भी बताई. उन्होंने कहा कि यही वजह है कि दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की व्यवस्था महत्वपूर्ण है. इस तंत्र के माध्यम से सीमा विवाद के दीर्घकालिक समाधान की संभावनाओं पर चर्चा की जा सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि गलवान की घटना से मिले सबक ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति को मजबूत किया है. उनके अनुसार, भारत ने सैन्य, कूटनीतिक और राजनीतिक, तीनों स्तरों पर वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिष्ठा को उल्लेखनीय रूप से मजबूत किया है.
#WATCH | Pune, Maharashtra | Former Indian Army Chief General Manoj Mukund Naravane says, “…With China, we have an unsettled boundary. I use the term boundary deliberately because, unlike an international border, which is clearly demarcated and internationally recognised, a boundary is more nebulous…Wherever these areas of disagreement exist, we have been having and will keep having clashes. The Galwan clash was just another example of such an incident. However, what is important is that the events following Galwan have clearly demonstrated that, as far as China is concerned, a military solution to the boundary dispute is off the table…We have made it clear that the unilateral use of force to change boundaries or borders is unacceptable. This has brought about a change and given fresh impetus to resolving the issue through talks and dialogue.That is precisely why the mechanism for talks between the special representatives of the two countries is important…The greater lesson to emerge from Galwan: India has significantly strengthened its reputation on the world stage, both militarily and diplomatically, as well as politically”
(22.10)