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सोशल मीडिया पर मालाबार गोल्ड को लेकर वीडियो वायरल है. वीडियो में आरोप लगाया गया है कि स्टोर ने ग्राहकों को 22 कैरेट सोने के बदले 20 कैरेट बताया. वीडियो में एक ग्राहक और छोटे दुकानदार के साथ सोने की शुद्धता जांचने को लेकर विवाद दिखाया गया है. हालांकि, इन आरोपों पर मालाबार गोल्ड की तरफ से कोई भी बयान नहीं आया है. त्योहारों में आप भी सोना खरीदने या फिर एक्सचेंज करने से पहले किन बातों को ध्यान में रखें ये बताएंगे. साथ ही इस पूरे मामले के बारे में भी जानकारी देंगे.
सोशल मीडिया पर मालाबार गोल्ड के स्टोर को लेकर कई वीडियो और पोस्ट वायरल हो रहे हैं. इनमें आरोप लगाया जा रहा है कि कंपनी XRF मशीन से सोने की शुद्धता कम बताकर ग्राहकों को करीब 8% कम पैसे दे रही है. वायरल वीडियो में एक ग्राहक के 22 कैरेट सोने को 20 कैरेट बताकर उसकी कीमत कम लगाने का दावा किया गया है. हालांकि, इन आरोपों पर मालाबार गोल्ड का कोई रिएक्शन सामने नहीं आया है. इस वीडियो के मुताबिक, एक ग्राहक जब मालाबार गोल्ड के स्टोर में अपना सोना लेकर पहुंचता है, तो उसे 22 कैरेट के बजाय 20 कैरेट बताया जाता है. ग्राहक उन्हें HUID नंबर देखने के लिए भी कहता है लेकिन वह मना कर देते हैं.
सोना खरीदते समय सबसे पहले उसकी शुद्धता की जानकारी लें. गहने बनाने के लिए सोने में दूसरी धातुएं मिलाई जाती हैं. सोने में शुद्ध धातु की मात्रा जितनी ज्यादा होती है, उसकी शुद्धता उतनी ही अधिक होती है. 24 कैरेट सोना सबसे शुद्ध माना जाता है, जबकि गहने आमतौर पर 22, 18 या 14 कैरेट में बनाए जाते हैं. 22 कैरेट सोने में लगभग 91.6 प्रतिशत सोना होता है. इसलिए गहना खरीदने से पहले कैरेट और शुद्धता का स्तर जरूर देखें.
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सोने की शुद्धता की पहचान करने के लिए हॉलमार्क एक अहम तरीका है. भारत में भारतीय मानक ब्यूरो यानी BIS सोने की हॉलमार्किंग को नियंत्रित करता है. गहना खरीदते समय उस पर BIS का निशान, शुद्धता बताने वाला नंबर और छह अंकों का HUID यानी हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर जरूर देखें. HUID की जानकारी BIS Care ऐप के जरिए भी जांची जा सकती है. गहने पर दर्ज विवरण और बिल में दी गई जानकारी का मिलान करें. किसी भी तरह का संदेह होने पर दुकानदार से स्पष्टीकरण मांगें.
सोने की कीमत उसके वजन और खरीदारी वाले दिन के बाजार भाव पर निर्भर करती है. इसलिए गहना खरीदते समय उसका वजन अपनी मौजूदगी में तौलवाएं और प्रति ग्राम सोने का भाव भी पूछें. केवल दुकान में बताए गए रेट पर निर्भर न रहें, बल्कि दूसरे भरोसेमंद सोर्स से भी कीमत की तुलना करें. अगर गहने में हीरे या अन्य प्रीशियस मेटल्स लगे हैं, तो सोने और पत्थरों का वजन अलग-अलग पता करें. बिल में वजन, कैरेट और सोने का रेट स्पष्ट रूप से दर्ज कराना जरूरी है.
सोने के गहनों की कीमत में सोने के भाव के अलावा मेकिंग चार्ज और कुछ मामलों में वेस्टेज चार्ज भी शामिल होता है. मेकिंग चार्ज गहना बनाने की लागत है, जो डिजाइन और उसे तैयार करने में लगने वाली मेहनत के आधार पर अलग-अलग हो सकती है. वेस्टेज चार्ज बनाने की प्रक्रिया में सोने की संभावित बर्बादी के नाम पर लिया जाता है. खरीदारी से पहले दुकानदार से दोनों शुल्क की जानकारी लें. यह भी पूछें कि चार्ज रुपये में लिया जा रहा है या प्रतिशत के हिसाब से, ताकि अंतिम कीमत समझने में आसानी हो.
सोना खरीदने से पहले अंतिम बिल कैलकुलेशन समझना भी जरूरी है. आमतौर पर इसमें सोने की कीमत, मेकिंग चार्ज और लागू होने वाले अन्य शुल्क शामिल होते हैं. सोने के गहनों पर 3 प्रतिशत GST भी लागू होता है. इसलिए भुगतान करने से पहले दुकानदार से सभी शुल्क अलग-अलग लिखवाएं और कुल रकम की जांच करें. बिल में गहने का वजन, कैरेट, प्रति ग्राम रेट और HUID जैसी जरूरी जानकारी दर्ज होनी चाहिए. सही बिल भविष्य में गहने की शुद्धता या कीमत को लेकर विवाद होने पर आपके काम आ सकता है.
अगर आप पुराने गहने बेचने या उन्हें नए गहनों से बदलने जा रहे हैं, तो पहले जौहरी की बायबैक पॉलिसी समझ लें. पुराने सोने की कीमत आमतौर पर मौजूदा भाव, वजन और जांच में सामने आई शुद्धता के आधार पर तय होती है. खरीदते समय दिया गया मेकिंग चार्ज वापस मिलना जरूरी नहीं है. गहनों में लगे हीरे की कीमत भी अलग तरह से तय हो सकती है. सोना बेचने से पहले जौहरी से वजन, शुद्धता, सभी कटौतियों और अंतिम भुगतान का हिसाब लिखित में मांगें.
त्योहारों के दौरान कई जौहरी ग्राहकों को गोल्ड स्कीम के तहत किस्तों में पैसे जमा करने का विकल्प देते हैं. कुछ योजनाओं में मेकिंग चार्ज पर छूट या आखिरी किस्त से जुड़ा फायदा मिल सकता है. हालांकि, हर योजना के नियम अलग होते हैं. इसलिए इसमें शामिल होने से पहले योजना की अवधि, किस्तों की रकम, मिलने वाले लाभ और गहने खरीदने से जुड़ी शर्तों को अच्छी तरह पढ़ें. यह भी पता करें कि समय से पहले योजना छोड़ने पर क्या नियम लागू होंगे. सभी भुगतान की रसीदें संभालकर रखें और जल्दबाजी में फैसला न लें.